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प्रदेश के नंबर-1 जिला अस्पताल में एक भी मेडिसिन विशेषज्ञ नहीं

कायाकल्प में प्रदेश का नंबर-वन जिला अस्पताल अब मेडिसिन विशेषज्ञ विहीन हो गया है। अस्पताल में पदस्थ एकमात्र...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 01:10 PM IST

कायाकल्प में प्रदेश का नंबर-वन जिला अस्पताल अब मेडिसिन विशेषज्ञ विहीन हो गया है। अस्पताल में पदस्थ एकमात्र मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. एचडी गुप्ता भी बुधवार को सेवानिवृत हो गए। अब खांसी, जुकाम, बुखार, पेट रोग व ह्रदय रोग के मरीजों को इलाज के लिए अब ग्वालियर का रुख करना पड़ेगा। मेडिसिन विभाग में अब सिर्फ मेडिकल ऑफीसर ही बचे हैं। जबकि ओपीडी में प्रतिदिन 350 से 400 मरीज मेडिसिन विशेषज्ञ को दिखाने आते हैं। मालूम हो कि जिला अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में पहले से ही विशेषज्ञ नहीं है, अब मेडिसिन विभाग भी खाली हो गया है। इधर सिविल सर्जन डॉ अजीत मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में शासन को पत्र लिखकर विशेषज्ञ डॉक्टर की मांग की है।

यहां बता दें कि मेडिसिन विभाग में चार स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के पद हैं, जिसमें एक पद लंबे समय से खाली पड़ा हुआ था। वहीं दिसंबर महीने में डॉ केके दीक्षित ने वीआरएस ले लिया। जबकि दूसरे मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ अजीत मिश्रा पर सिविल सर्जन की जिम्मेदारी है। इसलिए वे ओपीडी में आने वाले मरीजों को नियमित तौर पर नहीं देख पाते। डॉ एचडी गुप्ता ही अकेले व्यवस्थाएं संभाल रहे थे, उनके सेवानिवृत्त होने के बाद संकट खड़ा हो गया है।

गायनिक, नेत्र रोग, ईएनटी व पैथोलॉजी विभाग के बाद मेडिसिन में भी विशेषज्ञ नहीं

डॉ. एचडी गुप्ता को विदाई समारोह के दौरान सम्मानित करते हुए समाजसेवी।

आबादी बढ़कर हुई दोगुनी, विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद बढ़ाना तो छोड़िए स्वीकृत पद भी नहीं भरे गए

जिले की आबादी लगातार बढ़ रही है। लेकिन इसके अनुपात में डॉक्टर लगातार घट रहे हैं। स्थिति यह है कि जिले में कुल 143 डाॅक्टरों के पद हैं। इनमें 68 पद खाली पड़े हुए हैं। खासबात तो यह है कि यह पद वर्ष 1991 की आबादी के आधार पर स्वीकृत किए गए थे। तब से जिले की आबादी दो गुना हो गई है। लेकिन डाॅक्टरों के पदों की वृद्धि तो दूर की बात स्वीकृत पद भी खाली पड़े हैं।

36 पदों में से 25 रिक्त

जिला अस्पताल में मेडिसिन विभाग से पहले कई और विभाग भी ऐसे हैं, जिनमें विशेषज्ञ नहीं हैं। गायनिक, नेत्र रोग, ईएनटी और पैथॉलाजी विभाग में भी विशेषज्ञ लंबे समय से नहीं हैं। ट्रामा सेंटर में भी स्पेशलिस्ट डाॅक्टर नहीं है। यहां बता दें कि जिला अस्पताल स्पेशलिस्ट डाॅक्टरों के 36 पद हैं। इसमें 25 पद रिक्त पड़े हैं।

आॅन पेमेंट डाॅक्टर बुलाने की योजना ठंडे बस्ते में

भिंड जिला अस्पताल का पिछले दिनों निरीक्षण करने आई स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गौरी सिंह ने व्यवस्थाएं देखने के बाद ग्वालियर से आॅन पेमेंट डाॅक्टर बुलाने की बात कही थी। लेकिन उनके जाने के बाद यह योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई। जबकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में शासन को प्रस्ताव बनाकर भी भेज दिया गया है।

कलेक्टर ने भी पत्र भेजा है

डॉ एचडी गुप्ता के रिटायरमेंट के बाद मेडिसिन विभाग तो खाली हो गया है। हमने इस संबंध में शासन को पत्र भेज दिया है। साथ ही कलेक्टर साहब की ओर से भी पत्र गया है। फिलहाल हमारे पास जो डाक्टर हैं उन्हीं से हम व्यवस्था बनाने का प्रयास करेंगे। - डॉ अजीत मिश्रा, सिविल सर्जन, भिंड

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