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207 नल-जल योजनाओं में से 101 बंद खेतों से पानी ढोकर लाने को लोग मजबूर / 207 नल-जल योजनाओं में से 101 बंद खेतों से पानी ढोकर लाने को लोग मजबूर

Bhind News - पेयजल आपूर्ति के लिए नल-जल योजनाओं और हैंडपंपों के खनन पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी जिले में पानी का संकट...

Bhaskar News Network

May 11, 2018, 02:10 AM IST
207 नल-जल योजनाओं में से 101 बंद खेतों से पानी ढोकर लाने को लोग मजबूर
पेयजल आपूर्ति के लिए नल-जल योजनाओं और हैंडपंपों के खनन पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी जिले में पानी का संकट गहराया हुआ है। ग्रामीण अंचल की 207 नल-जल योजनाओं में से 101 बंद हैं। 20 हजार हैंडपंपों में से भी 20 फीसदी खराब हैं। गोहद क्षेत्र में पानी की आपूर्ति के लिए कई योजनाएं बनीं लेकिन इनका सफल क्रियान्वयन नहीं होने से समस्या जस की तस बनी हुई है। कुओं का अस्तित्व मिटने के बाद हैंडपंप पानी आपूर्ति के विकल्प बने लेकिन यह भी बड़ी संख्या में खराब हैं। ऐसे में लोग खेतों में लगे ट्यूबवेलों से पानी ढोकर लाने को मजबूर हो हैं।

स्कीम बोर हो गए फेल: नल-जल योजनाएं संधारण एवं संचालन ठीक प्रकार से नहीं होने के कारण बंद हैं। नल-जल योजनाओं के बंद का कारण स्कीम बोर फेल होना बिजली की आपूर्ति न होना व पाइप लाइनों का क्षतिग्रस्त होना है। पीएचई ने बंद नल-जल योजनाओं को पुन: चालू कराए जाने के प्रयास किए लेकिन यह प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है। ग्राम जामपुरा, जामना और कचनावकलां में काम पूरा करा दिया गया है लेकिन बिजली समस्या के चलते नल-जल नहीं मिल रहा है। गाता और ऊमरी के आधे भाग में जरूर नल-जल उपलब्ध कराने में सफलता मिली है। देहरा, देहगांव, महूरी, सिलोली, सरसई एवं कुरथरा में जल्दी पानी मिलने लगेगा

20 हजार हैंडपंप में से 20 फीसदी हैं खराब

अमायन क्षेत्र गहेली गांव में खेत पर लगे ट्यूबवेल से पानी ढोकर लाते ग्रामीण।

नयागांव में क्षतिग्रस्त पाइप लाइन को नहीं कराया जा रहा सही

नयागांव में 25 साल पहले नल-जल योजना शुरू कराई गई थी। इससे लोगों को 10 साल तक पानी मिला। ग्राम पंचायत को हस्तांतरित हाेने के बाद जब लाइनें क्षतिग्रस्त हुई तो इन्हें दुरुस्त नलजल योजना पीएचई द्वारा ग्राम पंचायत को सौंप दी गई। इसके बाद पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हुई तो ग्राम पंचायत के सहयोग से इसे दुरुस्त करा लिया गया। लेकिन दस साल पहले यह फिर खराब हुई तो पुन: शुरू नहीं हो सकी। ग्रामीणों ने ईई से लेकर सीएम तक ग्रामीण फरियाद की लेकिन नलों से पानी नहीं मिल सका।

एक करोड़ खर्च, फिर भी पानी नहीं हो सका सप्लाई: अमायन क्षेत्र के पांच गांव में पानी आपूर्ति के लिए दो साल पहले आजी मां मंदिर के निकट दो स्कीम बोर कराए गए। यहां से ग्राम सड़ा, टकपुरा, आंतों, बुजुर्ग व कुपावली में पाइप लाइन डलवाकर छोटी- छोटी टंकियों से पानी उपलब्ध कराना था। इस कार्य पर करीब एक करोड़ की राशि खर्च हुई पर अब तक स्कीम बोर चालू नहीं हुए हैं। अब लाइनें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। पीएचई के साथ ही 181 पर शिकायत के बाद कोई नतीजा नहीं निकला।

गोहद के खारा पानी समस्याग्रस्त गांव के लिए नई योजना: गोहद क्षेत्र के खारा पानी समस्या ग्रस्त सिलोहा, खरौआ, सिरसौदा, चंदाहरा, इटायदा, किटी, भडेरा, करवास, माधौगढ़ के लिए दूर से पाइप लाइन डालकर पानी उपलब्ध कराने की नई योजना को स्वीकृति मिली है। यहां पहले बोर कराकर पानी मीठा या खारा यह चेक किया जाएगा। इसके बाद पाइप लाइन डलवाई जाएगी।

तीन करोड़ कराए स्वीकृत: विधायक

भिंड विधायक नरेंद्रसिंह कुशवाह ने बताया बंद नलजल योजनाओं को चालू कराने के लिए तीन करोड़ रुपए से अधिक की राशि स्वीकृत हुई है। बाराकलां को 20 लाख रुपए, विलाव को 34 लाख, ईसुरी को 17 लाख, हार की जमेह को 1.97 करोड़, जामपुरा को 15.49 लाख, कीरतपुरा को 14.23 लाख,, कोट को 20.42 लाख, मधुपुरा को 13.26 लाख, पांडरी को 27.26 लाख, सरसई को 17.98 लाख, टेहनगुर को 29.17 लाख रुपए पाइप लाइन डालने सहित अन्य कार्यों के लिए पीएचई को दिए गए हैं।

अकलौनी में 30 साल से बंद है योजना

गाेरमी क्षेत्र के अकलौनी गांव में सन 1984 में नल-जल योजना शुरू हुई। गांव में टंकी बनवाकर गलियों में पाइप लाइनें डलवाई गईं। इनसे ग्रामीणों को दो साल तक पानी मिला। इसके बाद से बंद पड़ी योजना को चालू कराने की मांग पर दो साल पहले एक स्कीम बोर भी कराया गया। लेकिन इसमें अब तक मोटर नहीं डलवाई जा सकी है। गांव में हैंडपंप भी कम संख्या में हैं। लोगों को कतार में लगकर पानी भरने को मजबूर होना पड़ रहा है।

जल्दी चालू होंगी नल-जल योजनाएं


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