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मनुष्य जीवन आत्म कल्याण के लिए मिला है: विराग सागर

मनुष्य जीवन आत्म कल्याण के लिए मिला है। इसे ऐसे ही व्यर्थ न गंवाओ हमारे जीवन में बहुत सारे समय आत्म कल्याण के लिए...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 02, 2018, 02:15 AM IST

मनुष्य जीवन आत्म कल्याण के लिए मिला है: विराग सागर
मनुष्य जीवन आत्म कल्याण के लिए मिला है। इसे ऐसे ही व्यर्थ न गंवाओ हमारे जीवन में बहुत सारे समय आत्म कल्याण के लिए मिलते है जो एक एक क्षण करके निकल जाते है। दुनिया में बहुत से ऐसे लोग है जो बैठे ही रह जाते है जिन्हें धर्म का कोई ज्ञान ही नहीं है। यह जीवन मनुष्य (पर्याय) दुर्लभ है। समाप्त होती जा रही है हमें जीवन के अंतिम समय में कुछ करना चाहिए जिससे कल्याण हो जाए जो मनुष्य जीवन में ही कर सकते है। जीवन क्षण भंगुर है पहले क्षण में क्या हो जाए अगला क्षण हमारा किस रूप में आये इसलिए हमें आत्म कल्याण के लिए प्रभु की भक्ति निर्मल भावों से करनी चाहिए। यह बात मंगलवार को ऋषभ सत्संग भवन में मंगलवार को आयोजित धर्मसभा में राष्ट्रीय संत विराग सागर महाराज ने कही।

धर्म

शहर के ऋषभ सत्संग भवन परिसर में धर्मसभा कार्यक्रम का आयोजन हुआ

भगवा कपड़े पहनकर संन्यासी वेष को कलंकित करना संन्यास धर्म के साथ शत्रुता है

उन्होंने कहा कि भारतीय अध्यात्म विद्या की यही परम्परा है कि आत्म सुधार, आत्म निर्माण और आत्म विकास का सारा कार्यक्रम परिवार के साथ रहकर सात्विक आजीविका कमाते हुए पूर्ण किया जाय। इसके बाद यदि किसी की ऐसी परिस्थिति हो कि अपनी पूर्णता का लाभ जनता को मार्ग दर्शन कराते हुए दे सके तो उसे परिव्राजक या संन्यासी हो जाना चाहिए। आगे महाराज ने कहा कि साधना करने के लिए अपरिपक्व मन बुद्धि के लोगों का भगवा कपड़ा पहन कर संन्यासी हो जाना और अपनी अपूर्णताओं से वेष को कलंकित करते फिरना, संन्यास धर्म के साथ शत्रुतापूर्ण व्यवहार है। ऐसे व्यक्ति अपराधियों की श्रेणी में रखने योग्य हैं। ईश्वर प्राप्ति तो उन्हें होनी ही कहां है। इसी क्रम में विनम्र सागर जी महाराज ने कहा कि जन्मदिन हमें उनका मनाना चाहिए जिनके गुण गाये जाते है हमारे गुरुवर के गुणों को दुनिया गा रही है ऐसे महान संत गणाचार्य विराग सागर जी महाराज है। जो जन्म को नष्ट करने के लिए तत्पर है वो अवतारी है, वंदनीय है, पूजनीय है ये तो श्रावक का पुरुषार्थ है चाहे गुरूदेव मना करे तो भी मनाना चाहिए ये शुभ कार्य है जो मनाता है फल उसे ही मिलता है। कार्यक्रम के शुभारंभ में आचार्य परमेष्ठी विधान का आयोजन प्रतिष्ठाचार्य संजय शास्त्री सिहौनियां ने विधि विधान से नित्य क्रिया अभिषेक पूजन के पश्चात सम्पन्न कराया एवं बच्चों ने गुरू भक्ति पर भक्ति नृत्य करते हुए पूजन विधान में शामिल हुए। इस अवसर पर रतनलाल जैन, राकेश जैन, सुनील जैन, मनोज जैन, आकाश जैन, कैश जैन, रॉबिन जैन, दिनेश जैन, निर्मल चन्द जैन, निशा जैन, मनोरमा जैन, शोभा जैन, मोती रानी जैन, पुष्पा जैन, संगीता जैन, ममता जैन, कोमल जैन, मंजू जैन, खुशी जैन, शिवी जैन, पुष्पा जैन, र|ा जैन, विनीता जैन, आदि बढ़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।

शोभायात्रा आयोजन 2 मई को

गणाचार्य विराग सागर जी महाराज के जन्म दिन के अवसर पर श्री जी की शोभायात्रा चैत्यालय जैन मंदिर से 2 मई दिन बुधवार को प्रातः काल 7 बजे निकाली जायेगी जो कि बताशा बाजार, सदर बाजार, गोल मार्केट होते हुए वापस ऋषभ सत्संग भवन पहुंचेगी। इस शोभायात्रा में 56 जोड़े बैंड बाजों के साथ नगर का भ्रमण करते हुए ऋषभ सत्संग भवन पहुंचेगी वहां पर आचार्य जी का विशेष पूजन 56 जोड़ो के साथ सम्पन्न कराई जायेगी एवं सायंकालीन सभा में 1008 दीपकों से महाआरती होगी।

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