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7 फीट तक गिरा जलस्तर, नलों में टोंटियां नहीं, दीवारों पर लिखवा रहे ‘पानी बचाओ’

मेले में झूला सेक्टर के पास बर्बाद होता पानी। सात फीट तक गिरा जलस्तर नपा की जलप्रदाय शाखा से मिली जानकारी के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:20 AM IST

मेले में झूला सेक्टर के पास बर्बाद होता पानी।

सात फीट तक गिरा जलस्तर

नपा की जलप्रदाय शाखा से मिली जानकारी के अनुसार अप्रैल महीने में अचानक शहर का जलस्तर 7 फीट तक नीचे तक चला गया है। इसके अलावा पिछले साल भी फरवरी महीने में जलस्तर 6 फीट तक गिर गया था। लगातार दो साल से गिर रहे जलस्तर चिंता का विषय है। जलसंरक्षण कार्यकर्ता संजीव बरूआ का कहना है कि पिछले दो साल से जलस्तर गिर रहा है। इसके लिए शहर के लोग ही दोषी हैं। स्थिति यह है कि घरों में लगे सबमर्सिबल पंप(बोर) से लोग प्रतिदिन लाखों लीटर पानी बर्बाद कर रहे हैं। यदि पानी की बर्बादी को लेकर लोग जागरूक हो जाएं तो काफी हद तक भू-गर्भ जल स्तर को गिरने से रोका जा सकता है।

एेसे बचाएं पानी: बगीचे में इस्तेमाल करंे किचन का पानी

जलसंरक्षण कार्यकर्ता बरूआ का कहना है कि लोग घर में किचन में यूज करने वाले पानी का वेस्ट करने की जगह उसे अपने गार्डन या फिर पौधों के लिए यूज कर सकते हैं ताकि अतिरिक्त पानी का संचयन किया जा सके। इसके अलावा पीने योग पानी से लोग अपने वाहनों की धुलाई न करके घर में जो पानी उपयोग के दौरान बचा है। उससे धुलाई करना चाहिए। वहीं कपड़े धुलने में कम से कम पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं। कोशिश करें कि उस पानी का भी कहीं इस्तेमाल कर लिया जाए। घर से कहीं बाहर जाने से पहले बाथरूम और किचन के नल को जरूर चेक कर लें।

धुलाई सेंटर पर हो रही है पानी की बर्बादी

कलेक्टर इलैया राजा टी ने मार्च महीने में पानी की बर्बाद रोकने के लिए शहर में संचालित वाहन धुलाई सेंटर को नोटिस देकर गर्मी सीजन तक सेंटर बंद करने के आदेश दिए गए थे। लेकिन उसके बाद भी शहर में वाहन धुलाई सेंटरों पर दो पहिया और चार पहिया वाहनों की धुलाई का काम हो रहा है। वॉशिंग के नाम पर हर रोज लाखों लीटर पानी वेस्ट किया जा रहा है। इन सेंटर पर न तो रिसाइक्लिंग की व्यवस्था है और न ही वहां पानी को संचयन किया जाता है।

नलों में नहीं है टोंटी

नगर पालिका द्वारा मेला परिसर सहित कालोनियों में लोगों को पानी की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकारी नल लगा गए हैं। लेकिन नपा की उदासीनता के चलते नलों में टोटियां नहीं हैं। साथ ही वार्डों में जो स्कीम बोर हैं। उनमें लगे लोहे के पाइप कंडम हो चुके हैं। जिनसे रोजाना कई गैलन पानी बर्बाद हो रहा है। लेकिन इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

स्वयं जागरूक होना पड़ेगा

शहर में सात फीट तक जलस्तर गिरा है। यह बात सही है। लेकिन नपा की ओर से समय-समय पर जल बचाओ के लिए लोगों को जागरूक करने का काम किया जाता है। लेकिन यह काफी नहीं है। इसके लिए लोगों को स्वयं जागरूक होना पड़ेगा -रामनरेश शर्मा, उपाध्यक्ष, नपा भिंड

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