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कथा... भागवत में पहले सत्य को प्रणाम करें: शास्त्री

भिंड | भगवान भाव के भूखे हैं और भक्तों की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। जरूरत इस बात की है कि उनके नाम का सुमिरन...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 03:25 AM IST
भिंड | भगवान भाव के भूखे हैं और भक्तों की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। जरूरत इस बात की है कि उनके नाम का सुमिरन सतत होता रहे। भागवत साक्षात नारायण का स्वरूप और मुक्ति प्रदाता है। भागवत के आरंभ में सबसे पहले सत्य को प्रणाम किया गया है, क्योंकि सत्य में ही राम है सत्य में ही कृष्ण है और सत्य में ही शिव है। यह वचन गुरुवार को ग्राम खेरा में स्थित धरमूबाबा आश्रम चल रही भागवत कथा के दौरान पंडित देवनारायण शास्त्री ने कही। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन की पूजा कर समाज को पर्यावरण की रक्षा का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि पर्वत, पेड़, जल यही हमें जीवन देते हैं। इसलिए इनका संरक्षण आवश्यक है। यह हमारे साक्षात देवता हैं। उन्होंने गोवर्धन पूजा की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि जिस तरह भगवान कृष्ण ने रूढ़ीवादी परंपरा तोड़ कर गोवर्धन पूजा का नया संदेश दिया।