पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Gormi News Mp News 50 Of The People In The Villages Are Still Defecating In The Open The Sarpanches Did Not Meet The Targets

गांवों में 50% लोग आज भी खुले में जा रहे शौच, सरपंचों ने पूरे नहीं किए लक्ष्य

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

स्वच्छता मिशन के तहत केंद्र सरकार ने गांवों को खुले में शौच मुक्त कराने का जो सपना देखा है वह महज कागजों में सिमट कर रह गया है। डेढ़ साल पहले जिले की सभी पंचायतों को ओडीएफ करार दिया गया है। लेकिन हकीकत टटोली जाए तो गांवों में 50 फीसदी आबादी आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर है। ऐसा नहीं है कि शौचालय बनाने की राशि पंचायतों में नहीं भेजी गई। बल्कि टॉयलेट निर्माण के लिए बजट आने के बाद भी अधिकारियों ने सक्रियता से काम नहीं किया। गोरमी क्षेत्र की अधिकांश पंचायतों को खुले से शौचमुक्त किया गया है। मगर हकीकत यह है कि सुबह होते ही गांव की महिलाएं एवं पुरुष हाथ में लोटा और बोतल लेकर निकल पड़ते हैं। यह दृश्य ओडीएफ हुई पंचायतों की हकीकत बयां करता है।

गांवों की हकीकत जानने के लिए जब पड़ताल की गई तो सामने आया कि अकलौनी, नुन्हाड़, बमूरपुरा, प्रतापपुरा सहित आदि गांवों में लोग सुबह लोटा व बोतलें लेकर खेतों की ओर शौच को जाते हैं। सड़कों के किनारे और आम रास्तों पर इस कदर गंदगी कर दी जाती है कि लोगों को निकलने में तकलीफ होती है। इसी से ग्रामीणों में कीटाणुओं के साथ गंभीर बीमारियां पनप रही हैं। गांवों में सुबह के वक्त एक ही नजारा दिखाई देता है कि लोग खेत, सड़क किनारों पर लोटा लिए शौच को जाते नजर आते हैं। इससे कई बार लोगों में विवाद बढ़ जाता है। ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता अभियान सफल बनाने के लिए जिन अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई थी, उन्होंने पूरी तत्परता के साथ काम नहीं किया। मॉर्निंग फॉलोअप के दौरान भी प्रेरकों की सक्रियता लोगों को खुले में शौच के दुष्परिणाम नहीं बता सकी। क्योंकि गांवों में स्वच्छता को लेकर नियमित अभियान नहीं चलाए गए।

सरकार के करोड़ों खर्च

जनपद अधिकारी एवं पंचायत के माध्यम से सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च करके ग्रामीण इलाकों को स्वच्छता की पटरी पर लाने का प्रयास किया है। फिर भी गांवों की तस्वीर बदलने में प्रशासन कामयाब नहीं हो सका। हकीकत देखी जाए तो कस्बे के अधिकांश गांवों में लोगों के यहां शौचालय नहीं बनाए गए हैं। इसमें दस प्रतिशत लोगों को पोर्टल पर अपात्र घोषित कर दिया गया, जबकि 20 फीसदी ग्रामीणों के खाते में शौचालय निर्माण की राशि नहीं भेजी गई। बाकी अधिकारियों ने कागजों में टॉयलेट का निर्माण दिखाकर निर्माण की राशि निकाल ली है।

अकलौनी में खुले में शौच जाते लोग ।
खबरें और भी हैं...