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90 साल पुराने बांध का मंत्री ने किया निरीक्षण जीर्णोद्धार के लिए 3.24 करोड़ का प्रस्ताव भेजा

Bhind News - बांध की चौतरफा कच्ची पार फूटने से पानी का संग्रहण नहीं हो पा रहा रौन क्षेत्र के बिरखड़ी गांव में बने प्राचीन...

Jan 29, 2020, 08:56 AM IST
Ron News - mp news 90 year old dam minister sent proposal for inspection renovation 324 crore

बांध की चौतरफा कच्ची पार फूटने से पानी का संग्रहण नहीं हो पा रहा

रौन क्षेत्र के बिरखड़ी गांव में बने प्राचीन बांध का अस्तित्व फिर से जिंदा करने के लिए सहकारिता मंत्री डॉ गोविंद सिंह ने पहल की है। मंत्रीजी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ बांध का निरीक्षण कर जीर्णोद्धार के लिए आदेश जारी किए हैं। निर्देश पर अमल करते हुए विभाग के अधिकारियों ने निर्माण के लिए 3 करोड़ 24 लाख रुपए की डीपीआर तैयार कर शासन को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव स्वीकृत होते ही बिरखड़ी में बांध का जीर्णोद्धार किया जाएगा।

बता दें कि 90 साल पुराने बांध की चौतरफा कच्ची पार फूटने से पानी का संग्रहण नहीं हो पा रहा है। जिससे आसपास के 25 गांवों में गर्मियां शुरू होते ही जल संकट गहराने लगता है। ग्राम वासियों की मांग पर मंत्री डॉ सिंह ने तत्परता दिखाई और संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर बांध के जीर्णोद्धार की पहल शुरू की। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने कहा कि प्राचीन बांध को फिर से सरोवर बनाने के लिए सरकार का पूरा समर्थन मिलेगा। इसके लिए जल्द प्रस्ताव स्वीकृत कराकर टेंडर प्रक्रिया होगी।

एक किमी दूर गिरता था झरना, सैलानी भी आते थे

बांध से एक किमी की दूरी पर नौधा गांव में पहाड़ से बारहमासी झरना गिरता था। इस झरने का लुत्फ उठाने के लिए ग्रामीणों के अलावा बाहर से आने वाले लोग भी आनंद उठाते थे। मगर बांध सूखने के बाद इलाके में पानी की कमी ने प्राकृतिक सौंदर्य का स्वरूप ही बदल दिया। झरना तो दूर अब इस क्षेत्र में पीने का पानी भी 200 फीट की गहराई में बोर करने पर मिलता है। जबकि पहले पानी का स्तर 50 फीट के लेवल पर था। बिरखड़ी गांव के रामेंद्र सिंह बताते हैं कि बांध खुदवाने में ग्रामीणों ने बड़ी मेहनत की थी। गांव के सैकड़ों लोग फावड़ा लेकर सुबह से शाम तक काम करते थे। लेकिन उस समय धन का अभाव होने के कारण बांध की पार को पक्का नहीं किया गया और इसका लाभ ग्रामीणों को केवल 20 साल तक मिला। पार टूटने के बाद प्रशासन ने भी बांध के जीर्णोद्धार के लिए कोई कदम नहीं उठाए।

16 साल पहले हुआ सर्वे

पानी के गिरते लेवल को सुधारने के लिए समाजसेवी एवं ग्रामीणों ने बांध को दोबारा बनाने की मांग की थी। इसके बाद वर्ष 2004 में जिला पंचायत के माध्यम से इसका निरीक्षण कराया गया। सर्वे के बाद शासन को प्रस्ताव भी भेजा गया। लेकिन जीर्णोद्धार का काम आगे नहीं बढ़ सका। हालांकि अब ग्रामीणों को उम्मीद बंधी है कि मंत्रीजी के हस्तक्षेप के बाद बांध का जीर्णोद्धार हो जाएगा।

150 फीट गिरा जलस्तर

बांध का पानी सूखने के बाद क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में 150 फीट तक जलस्तर गिर गया है। जिस समय बांध में लबालव पानी रहता था, तब भूमिजल स्तर की गहराई 50 फीट तक थी। लेकिन बांध की पार टूटने के बाद बारिश का पानी संग्रहित होना बंद हुआ तो रौन, ररुआ, परसाला, पड़ौरा, बिरखड़ी, नौधा, बसंतपुरा, मेहदा, सहित आदि गांवों में पानी का संकट गर्मियों में बढ़ जाता है।


शासन को प्रस्ताव भेजा है

स्टेट के समय बना था

सूखा की मार से बचने के लिए सिंधिया स्टेट में उस समय की क्षेत्र के राजाओं ने नौधा-बिरखड़ी के बीहड़ में 225 हैक्टेयर में बांध का निर्माण किया था। बांध में बारिश का पानी संग्रहित हुआ तो आसपास के 25 गांवों में फिर कभी सूखा नहीं पड़ा। मगर बदलते परिवेश में बांध के जीर्णोद्धार पर ध्यान नहीं दिया गया और कच्ची पार अधिक पानी के दबाव में फूट गई। बारिश का पानी अब बांध में जमा होता है, लेकिन तीन सौ मीटर की लंबाई में कच्ची पार फूटी होने के कारण बहकर तीन किमी दूर सिंध नदी में चला जाता है। इससे इस क्षेत्र में पानी का लेवल पहले से 150 फीट नीचे चला गया है।

एक साल में खुदा है बांध

बांध बनाने के लिए पारंपरिक औजारों के साथ ग्रामीणों ने खुदाई प्रारंभ की थी। जिसमें लोगों को करीब एक साल का समय लगा था। ग्रामीण कहते हैं कि उन्होंने बुजुर्गों से सुना है कि बांध में इतना पानी था कि आसपास कुएं खोदने पर 20 फीट की गहराई में पानी निकल आता था। रौन, ररुआ, परसाला, पड़ौरा, बिरखड़ी, नौधा, बसंतपुरा सहित आदि गांवों में जलस्तर स्थिर रहता था। पास में सिंध नदी और बांध होने के कारण यहां एक झरना भी बहता था। ग्रामीण आज भी बांध के कायाकल्प को लेकर आस लगाए हुए हैं। मगर शासन व प्रशासन इस ओर कतई गंभीर नहीं दिख रहा है।

बिरखड़ी में बांध का निरीक्षण करते मंत्री डॉ. गोविंद सिंह।

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