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अफसराें से अाेला पीड़ित किसान बाेले- सरकार का भराेसा नहीं कब चली जाए, अाप ही ईमानदारी से सर्वे करा दीजिए

एक वर्ष पहले
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संयुक्त कलेक्टर बाेले- अाेलावृष्टि से हुए नुकसान पर मुआवजे के लिए 85 कराेड़ सरकार से मांगे

ओलावृष्टि से नुकसान के सर्वे पर सवाल खड़े करते हुए अासपास के गांवाें से आए किसानों ने शुक्रवार काे कलेक्टाेरेट का घेराव कर दिया। किसानाें की बात सुनने के लिए कलेक्टर नहीं अाए किसान अाक्राेशित हाे गए। ज्ञापन लेने अाए संयुक्त कलेक्टर के सामने किसानाें ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अाेलाें से गेहूं, सरसाें की फसलों काे 70 से 100 फीसदी तक नुकसान हुआ है। सर्वे के लिए टीमें कहीं पहुंची और कहीं पहुंची ही नहीं हैं। सर्वे के काम में पारदर्शिता भी नहीं रखी जा रही है, उन्हें यह नहीं बताया जा रहा है कि उनका कितने प्रतिशत नुकसान माना है। वर्तमान मंे चल रहे हालातों के बीच सरकार का कोई भरोसा नहीं है कि कब चली जाए, प्रशासन से बची खुची आस है लेकिन निष्पक्ष रूप से सर्वे न होने से उम्मीद धूमिल हो रही है। मालूम हो कि प्रशासन ने अटेर, गाेहद, मेहगांव अाैर भिंड विधानसभा के 207 गांवाें में अाेलाें से नुकसान माना है। इसके लिए फिलहाल 85 कराेड़ की मांग शासन से की है। नुकसान का अांकड़ा बढ़ सकता है।

जिले में 6 मार्च को हुई ओलावृष्टि में फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए प्रशासन ने शासन से 84 करोड़ रुपए से अधिक की राशि मांगी गई है। भू- अभिलेख अधीक्षक गजनफर अली ने बताया यह अंतिम मांग पत्र नहीं है। सर्वे रिपोर्ट प्राप्त होने पर जरूरत के अनुसार राशि मांगी जाएगी।

प्रशासन ने की 85 करोड़ रुपए की मांग

अटेर, भिंड, गाेहद अाैर मेहगांव विस के 207 गांवाें में अाेलाें से नुकसान माना, सर्वे पूरा होने पर बढ़ सकती है संख्या

हमारे गांव में अब तक नहीं पहुंची सर्वे टीम

1. अटेर क्षेत्र के ग्राम पचोखरा के किसान राधामोहन शर्मा ने कहा कि गांव में गेहूं व सरसों की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। जबकि अब तक नुकसान का आंकलन करने के लिए टीम नहीं पहुंची है। भिंड क्षेत्र के चरथर के किसान सर्वेश शर्मा का कहना था कि जब उन्होंने पटवारी से पूछा कि उनके यहां सर्वे हुआ या नहीं तो पटवारी धर्मेंद्र नरवरिया ने कहा कि तुम्हारे हल्के का चार्ज अब हमारे पास नहीं है।

बिजली कनेक्शन काटने की धमकी दे रहे अफसर

2. ग्राम सगरा विनोद सिंह राजावत एवं सुनील त्रिपाठी का कहना था कि ओलावृष्टि में प्रभावित किसानों से बैंक व बिजली की वसूली स्थगित रखी जाना चाहिए। इसके लिए विधायक संजीव सिंह कुशवाह भी यह कह चुके हैं कि फिलहाल बैंक ऋण व बिजली बिल की वूसली न की जाए पर बिजली कंपनी के अमले द्वारा बिजली का बिल जमा न किए जाने पर कलेक्शन काट दिए जाने धमकी दी जा रही है।

पहले बोवनी की फसल का नहीं किया आकलन

3. कोट के किसान हरगोविंद सिंह राजावत ने बताया कि ओलावृष्टि के दूसरे राेज उनके पटवारी सुभाष शर्मा पहुंचे। उन्होंने बाद में बोई गई हरी सरसों की फसल तो मुआयना किया पर पहले बोई गई फसल का आंकलन नहीं किया। जबकि पहले बोनी की गई फसल में बाल से दाना पूरी तरह झड़ गया था। इसी प्रकार की स्थिति गांव के अन्य किसानों द्वारा भी बताते हुए कहा गया मुआवजा मिलेगा भी नहीं पता नहीं।

अब तक नहीं पहुंची सर्वे करने के लिए टीम

4. रौन क्षेत्र के परसाला निवासी किसान राम करन का कहना था उनके द्वारा पांच बीघा में बोई गई सरसों की फसल पूरी तरह से ओलावृष्टि में नष्ट हो गई है। जिसका सर्वे करने के लिए अब तक टीम नहीं पहुंची है। जबकि पिछले साल ओलावृष्टि होने पर सर्वे के तीसरे रोज राहत राशि मिल गई थी। अबकी बार हुए नुकसान की भरपाई हो पाएगी या नहीं असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

यहां बता दें कि जिले में 6 मार्च को हुई ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों ने किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। गौरी सरोवर किनारे बिहारी पार्क पर जुटे किसान रैली के रूप से कलेक्टोरेट पहुंचे। यहां संयुक्त कलेक्टर शिवम शर्मा को किसानों ने अपनी व्यथा सुनाई। इस पर संयुक्त कलेक्टर ने किसानों से कहा कि आपको इतना भरोसा दिला सकता हूं कि कलेक्टर को आपकी बात से अवगत करा दिया जाएगा। किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजीव बरुआ संयुक्त कलेक्टर से बात करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि किसानों को 5 हजार रुपए प्रति बीघा के मान से आर्थिक मदद मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल किसानों को गेहूं पर 160 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बोनस की घोषणा सरकार ने की लेकिन उसका भी भुगतान अब तक नहीं हुआ है। किसानों ने यह भी कहा कि इस संकट की घड़ी में बैंक ऋण और बिजली बिल वसूली स्थगित की जाना चाहिए लेकिन किसानों पर राशि जमा करने के लिए दबाव डाला जा रहा है। इस मौके पर राजेंद्र बघेल, सरमन शर्मा, देव चौधरी, गिरजाशंकर शर्मा, गजेंद्र सिंह नरवरिया, रामनिवास, सरपंच नारायण सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।

कलेक्टोरेट का घेराव कर नारेबाजी करते किसान।

पीड़ा बताते समय किसान संजीव बरूआ के आंखों में आंसू आ गए।
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