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अतिवृष्टि के बाद अब कड़ाके की ठंड से फसलों पर पाला पड़ने के आसार

Bhind News - अतिवृष्टि यानी छह माही बारिश से खरीफ सीजन में फसलें बर्बाद हो गईं। अब रबी सीजन में कड़ाके की ठंड से पाला पड़ने के...

Dec 10, 2019, 09:26 AM IST
अतिवृष्टि यानी छह माही बारिश से खरीफ सीजन में फसलें बर्बाद हो गईं। अब रबी सीजन में कड़ाके की ठंड से पाला पड़ने के अासार हैं। रबी सीजन में अधिकतर गेहूं, लहसुन व चने का रकबा होता है। इसी आशंका में किसानों ने पाले से ज्यादा प्रभावित होने वाली धनिया, चना व सरसों का रकबा कम कर दिया है। वैज्ञानिकों ने बताया कि इनमें भूमि जनित रोग होने की भी आशंका है। मावठा ज्यादा गिरता है तो इसबगोल की फसल खराब हो सकती है। संतरा फसल ज्यादा प्रभावित हो सकती है। पपीता पर भी असर होगा।

मौसम विज्ञान केंद्र ने बीजोपचार की एडवायजरी जारी की है। इसमें चना, गेहूं और मैथी की विभिन्न किस्मों की जानकारी दी। किसानों को रेज्ड बेड पद्धति से बुआई की सलाह दी है। इसके अलावा नाइट्रोजन जनित उर्वरकों का उपयुक्त मात्रा में उपयोग करने की सलाह दी। तेल वाली फसलों जैसे- सरसों में 5 किग्रा सल्फर प्रति बीघा तथा गेहूं की फसल में 5 किग्रा जिंक बुआई के पूर्व जमीन में डालने की बात कही। वहीं फास्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा एवं नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुआई के समय या बुआई के पूर्व विभिन्न फसलों की अनुशंसा के आधार पर प्रयोग करना बताया है। गेहूं में 5 किग्रा जिंक प्रति बीघा की दर से जमीन में बुआई से पूर्व डालने तथा गेहूं में जैविक बीजोपचार के लिए 10 ग्राम मात्रा एडजेक्टोबेटर प्लस, 10 ग्राम मात्रा पीएसवी प्रतिकिलो बीज से उपचारित कर बीज की बुआई करने को कहा गया।

गेहूं की फसल में जड़ माहों व फॉल आर्मी कीट का प्रकोप

गेहूं में जड़ माहों व फॉल आर्मी कीट का प्रकोप दिखने लगा है। इसकी रोकथाम के लिए कीमिदा क्लोफीड 17.8 % एसएल की 140 मिली मात्रा लगभग 300 से 400 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। या एसीटामिप्रिड 20 % एसपी की 500 ग्राम मात्रा या थाईमिथोजाम 25 % डब्ल्यूई की 100 ग्राम मात्रा 400 से 500 लीटर पानी में घोल बनाकर गेहूं की खड़ी फसल पर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़के।

चने में इल्ली नियंत्रण के लिए 50 खूंटियां प्रति हेक्टे. लगाएं

चने की फसल में सी-आकृति की 50 खूंटियां प्रति हेक्टेयर खेतों में पक्षियों के बैठने के लिए खड़े करें ताकि पक्षी हानिकारक इल्लियों को एकत्र कर खा सके। चने की इल्ली नियंत्रण के लिए 12 हेलील्यूर थैरोमाेन ट्रेप प्रति हेक्टेयर की दर से खेतों में स्थापित करें। इससे की चने पर इल्ली की वृद्धि रुकेगी। लहसुन व प्याज की फसल में आसमानी, चिपचिपा ट्रेप लगाएं ताकि रसचूसक कीट इस पर आकर चिपककर मर जाएंगे।

सलाह : गेहूं का ज्यादा होगा उत्पादन, विपणन व भंडारण की करें व्यवस्था

कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीएस चुंडावत ने बताया इस बार गेहूं का उत्पादन अधिक होगा। इसके लिए विपणन एवं भंडारण के लिए व्यवस्था करना सुनिश्चित करें। इस बार किसानों ने मटर की बोवनी ज्यादा की है, इसलिए दाम कम हो सकते हैं इसलिए उसे बाहर भेजने व्यवस्था करें ताकि उचित मूल्य मिल सके। ज्यादा बारिश होने के बाद भी किसान फसलों में सिंचाई स्प्रिंकलर व फव्वारा पद्धति, सूक्ष्म फव्वारा पद्धति या टपक सिंचाई विधि से करें ताकि भूजल का दोहन कम से कम हो, तथा बचे हुए पानी को गेहूं के बाद मूंग या जायद की फसलें लेने के लिए करें। किसान नीम लेपित यूरिया का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें।

शासन : प्रशासन को भी देना होगा ध्यान, कृषि यंत्रों पर मिलंे छूट

इस बार रबी सीजन में गेहूं का रकबा ज्यादा होने से हार्वेस्टर का उपयोग किया जाएगा। इसके कारण खेतों में पराली ज्यादा रहेगी। किसान उसे जलाने का प्रयास करेंगे लेकिन इसके लिए उन्हें समझाइश दी जाए। ऐसे यंत्र जो पराली को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर के जमीन में मिला दें, शासन-प्रशासन द्वारा ऐसे यंत्रों पर अनुदान दिया जाए। वहीं अनुदान योजना का समय रहते लाभ प्रदान किया जाए। साथ ही ऐसे यंत्र जो पराली को एकत्रित बंडल बनाते हैं उनके लिए भी अनुदान की राशि दें। पराली जलाने से प्रदूषण होता है, साथ ही जमीन की उर्वरा शक्ति भी कम होती है। इसके लिए किसानों को प्रेरित करें व हो सके तो कानूनी कार्रवाई भी करें।

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