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अकोड़ा... जहां सिर्फ एक जगह होता है सामूहिक होलिका दहन

एक वर्ष पहले
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जिले के अकोड़ा नगरीय क्षेत्र में होली के त्योहार पर सामाजिक सद्भाव की अनूठी मिसाल देखने को मिलती है। यहां 25 हजार की आबादी के बीच एक ही जगह होलिका दहन होता है। इसमें ऊंच- नीच का भेदभाव को भुलाकर लोग उत्साहपूर्वक शामिल होते हैं।

यहां यह सिलसिला गांव बसने के समय से चला आ रहा है और अब जब नगरीय स्वरूप में आ गया है तब भी यह परंपरा कायम है। होलिका दहन के स्थल को होली थोक के नाम से जाना जाता है। इसी होली से सभी लोग अपने घरों पर होलिका दहन करने के लिए अग्नि लेकर जाते हैं। यहां बता दें बदले परिवेश में लोग गली- मोहल्लों में अलग-अलग होलिका दहन करने लगे हैं। लेकिन 25 हजार लोगों के बीच एक ही जगह होलिका दहन होना बड़ी बात हैं। होलिका दहन में हर घर से लोग गोबर से बने कंडे और गुलरियां लेकर पहुंचते हैं। होली में आग लगाने की जिम्मेदारी एक ही परिवार के हवाले हैं। इसी परिवार का सदस्य आग लगाता है। इसके पहले हर घर से कोई न कोई पूजन के लिए पहुंचता है।

हाेलिका दहन के साथ शुरू होता है फाग गायन

होलिका दहन के साथ फाग गायन शुरू हो जाता है। दूसरे रोज पड़वा को सुबह होली थोक से फाग गाती हुई टोली समूचे गांव का भ्रमण करती है और लोगों को रंग गुलाल लगाते हुए मेल मुलाकात का सिलसिला दिन भर चलता है। इसके बाद होली के उपलक्ष्य में फाग गायन के कई जगह आयोजन पांच दिन तक चलते रहते हैं। यह सिलसिला रंग पंचमी तक चलता रहता है।

शाम को 6. 26 से रात्रि 8.53 बजे तक होगा दहन

9 मार्च पूर्णिमा को होलिका दहन होगा। पूर्णिमा तिथि सुबह 3.03 बजे से शुरू होगी। पं. अखिलेश शर्मा के अनुसार होलिका दहन का मुहूर्त शाम को 6. 26 से रात्रि 8.53 बजे तक का है। रंग गुलाल की होली 10 मार्च को खेली जाएगी। अकोड़ा के जसवंत सिंह यादव कहते हैं कि उनके गांव में होली का त्योहार अनूठे अंदाज में मनाया जाता है। इसमें आपसी गिले शिकवे दूर हो जाते हैं।

अकोड़ा में हाेलिका दहन की तैयारी करते लोग।
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