बिजली के अभाव में 25 साल पहले बंद हुई पेयजल योजना, चार किमी दूर से ढो रहे पानी

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:05 AM IST

Bhind News - मेहदा गांव के लोग बीहड़ के कुएं से पानी भरकर लाते। कुएं का पानी हो जाता है खत्म मेहदा गांव में कुल तीन हजार की...

Ron News - mp news drinking water scheme water stopped from the distance of four km in the absence of electricity 25 years ago
मेहदा गांव के लोग बीहड़ के कुएं से पानी भरकर लाते।

कुएं का पानी हो जाता है खत्म

मेहदा गांव में कुल तीन हजार की आबादी निवास करती है। गांव में 25 सरकारी हैंडपंप लगाए गए, लेकिन किसी में मीठा पानी नहीं है। गांव से करीब एक किमी की दूरी पर बीहड़ में पुराना कुआं बना है। जिसमें मीठा पानी भरने के लिए ग्रामीण सुबह चार बजे से नंबर लगाकर पहुंच जाते हैं। कुएं के सभी घाटों के अलावा बीच में लोग रस्सी डालकर पानी खींचते हैं। पर कुएं का पानी भी सुबह आठ बजे तक खत्म हो जाता है। इसके बाद गांव से चार किमी दूर चौकी सरकार मंदिर पर लगे हैंडपंप से ग्रामीण पानी ढोते हैं। गर्मी में प्यास बुझाने के लिए लोगों को घंटों समय पानी भरने में लगता है। फिर भी शासन व प्रशासन ने समस्या पर ध्यान नहीं दिया है।

पाइप जर्जर होने और मोटर खराब होने से 25 साल से स्कीम बोर बंद, खारे पानी की समस्या से जूझ रहे ग्रामीण

गांव में लोगों को खारे पानी से निजात दिलाने के लिए पीएचई विभाग ने गांव से डेढ़ किमी दूर 30 साल पूर्व स्कीम बोर लगाया था। बोर खनन के बाद गांव में पाइप लाइनें बिछाकर घरों में कनेक्शन भी किए गए थे, लेकिन ग्रामीणों को 5 साल तक नियमित पानी मिलने के बाद लाइनें जगह-जगह जर्जर होती चली गईं, जिस पर विभाग के अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। बाद में धीरे-धीरे कर बोर की मोटर भी खराब हो गई। ग्रामीणों की मांग पर गांव में दोबारा पाइप लाइन बिछाई गई थी, मगर वह भी कामयाब नहीं हो सकी है। अब पीएचई की लाखों की योजना का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। बहरहाल खारे पानी की समस्या से जूझ रहे लोगों को कोसों दूर चलकर मीठे पानी का इंतजाम करना पड़ता है।

रौन के मेहदा गांव की तीन हजार की आबादी परेशान

रौन के मेहदा गांव में तीन हजार की आबादी है जो खारे पानी की समस्या से जूझ रही है। गांव में पीएचई विभाग द्वारा करीब आधा सैकड़ा हैंडपंप लगे हैं, जिसमें 13 हैंडपंप पानी छोड़ गए हैं और 26 हैंडपंप खारे पानी की वजह से जंग लगने के कारण खराब हो चुके हैं। गांव में अब 26 हैंडपंप लगे हुए हैं, मगर यह हैंडपंप भी खारा पानी दे रहे हैं। गांव के दिनेश पुरोहित का कहना है कि गांव में ज्यादातर महिलाएं पानी भरने जाती है, इस कारण कई युवाओं के रिश्ते इसलिए लौट गए कि उनकी बेटियों को कुएं से पानी खींचना पड़ेगा। वहीं ग्रामीणों का आक्रोश भी शासन व प्रशासन के अधिकारियों के खिलाफ बढ़ता जा रहा है। गांव के रतन चौधरी, आकाश गुप्ता, सुनील सिंह, प्रकाश सिंह सहित आदि लोगों ने योजना शुरू कराने की मांग की है।

गांव का पानी पशुओं के लिए उपयोगी

गांव में कुछ हैंडपंप संचालित हैं, जिनमें खारा पानी आता है। ग्रामीण यह पानी पशुओं को पिलाने के साथ नहाने व कपड़े धोने में उपयोग करते हैं। जबकि कुछ लोगों का मानना है कि खारा पानी पीने से पाचन तंत्र ठीक नहीं रहता है। ग्रामीण सुबह से बीहड़ में साइकिलों व ट्रैक्टर-ट्राॅलियों से पानी ढोना शुरू कर देते हैं। लेकिन सुबह आठ बजे जब कुएं में पानी खत्म हो जाता है तब लोग दूसरे गांवों में पानी भरने जाते हैं। हालांकि दोपहर में कुएं में पानी फिर से भर आता है। बता दें कि सुबह चार बजे पानी भरने जाते हैं तो कुएं में बाल्टी डूब जाती है, लेकिन दो घंटे बाद कुएं में आधी बाल्टी डूबती है। जिसके कारण लोगों को घंटों मशक्कत करनी पड़ती है।

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