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बृह्मचारी से वैराग्य की ओर अग्रसर होने की चल रही प्रक्रिया के दौरान मंच पर बैठे चारों ब्रह्मचारी व दूसरे चित्र में नसिया बाग में मौजूद श्रद्धालुओं का सैलाब।

Bhind News - आचार्यश्री ने मुनि दीक्षा से पहले गुन्नू के दोस्तों से पूछा- तुम्हारे मित्र काे ले जा रहे हैं, अब भी वक्त है पूछ...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 06:45 AM IST
Bhind News - mp news during the ongoing process of moving from brihachari to the asceticism the four brahmachari sitting on the stage and the other pictures show the influx of devotees present in nasiya bagh
आचार्यश्री ने मुनि दीक्षा से पहले गुन्नू के दोस्तों से पूछा- तुम्हारे मित्र काे ले जा रहे हैं, अब भी वक्त है पूछ लो... बाद में फिरौती दोगे, तब भी नहीं छोड़ेंगे


बृह्मचारी से वैराग्य की ओर अग्रसर होने की चल रही प्रक्रिया के दौरान मंच पर बैठे चारों ब्रह्मचारी व दूसरे चित्र में नसिया बाग में मौजूद श्रद्धालुओं का सैलाब।

तीन को मुनि व एक को क्षुल्लक दीक्षा दी गई

भास्कर संवाददाता| भिंड

जैनेश्वरी दीक्षा समारोह में जैनाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने शहर के युवा सार्थक (गुन्नू भैया) के दोस्तों से पूछा तुम्हारे मित्र ने संत बनने की इच्छा जाहिर की है। यह तुम्हारे साथ भिंड की गलियों में कभी कार तो कभी बाइक से घूमा करते थे अब इन्हें दो पैरों की गाड़ी पर चलना होगा। न किसी से पानी मांग सकेंगे और न ही भोजन। अब इन्हें एसी, कूलर, पंखा भी नहीं मिलेगा। इनसे पूछ लो अब भी कोई सांसारिक इच्छा रह गई हो तो वापस लौट जाएं, बाद में तुम लोग फिरौती दोगे फिर भी हम इन्हें नहीं छोडें़गे। इसके साथ ही गुन्नू भैया के साथ अन्य तीन दीक्षार्थियों से भी पूछा कि अब भी मन में कोई इच्छा रह गई हो तो अपने घर वापस लौट सकते हो लेकिन चारों ने कहा महाराज हमारी अब कोई सांसारिक इच्छा नहीं रह गई हमें आपकी शरण में संत बनना है। इसके बाद तीन को मुनि व एक को क्षुल्लक दीक्षा दी गई।

यहां बता दें स्थानीय दिगंबर जैन नसिया प्रांगण में आयोजित जैनेश्वरी दीक्षा समारोह में जैनाचार्य ने दीक्षार्थियों से कहा कि आपका जीवन अब उस सैनिक की भांति हो गया जो देश की सीमा पर तैनात होता है तब वह अपने माता- पिता का नहीं होता केवल देश का रक्षक होता है। उसी प्रकार आज से आप लोग देश और समाज के हो जाओगे। साधु होने का उदेश्य धर्म की रक्षा करना होता है आपको धर्म की रक्षा करना होगी और अपने मोक्ष के लिए साधना करना होगी। संत की जाति नहीं होती उनका जीवन नदी के समान होता है। संत की चर्या में भेदभाव का कोई स्थान नहीं होता। अब तक यह होता था जब इच्छा हुई तब पानी पी लिया और मनमर्जी से भोजन कर लिया। अब एक समय भोजन करना होगा। साधु बनने के बाद सभी सुविधाएं खत्म। आज से आपकी चटाई बिछोना होगी और हाथ आपका तकिया होगा। दो पैरों की गाड़ी पर ही चलना होगा।

शहर में 30 साल बाद हुई मुनि दीक्षा

गणाचार्य विराग सागर महाराज ने जिस उदासीन आश्रम नसिया प्रांगण में वर्ष 1989 में आचार्य विशुद्ध सागर को छुल्लक दीक्षा प्रदान की थी। उसी स्थान पर आज 30 साल बाद विशुद्ध सागर महाराज ने चार दीक्षा कराईं। छुल्लक दीक्षा होने पर विशुद्ध सागर महाराज ने अपना क्षुल्लक दीक्षा में दिया नाम गुन्नू भैया को मुनि यशोधर सागर दिया गया।

भावुक हुए गुन्नूू भैया, आचार्य श्री ने कराया शांत

आचार्यश्री के समक्ष दीक्षा के लिए प्रार्थना कर रहे गुन्नू भैया उस समय भावुक हो गए जब वे अपने परिवारजन सहित समाज के लोगों से सांसारिक जीवन में जाने- अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना कर रहे थे। इस वक्त पंडाल में बैठे सभी लोगों की आंखें भी नम हो आईं। तब आचार्य श्री ने अपने वात्सल्य भाव से गुन्नू भैया को शांत कराया।

घोड़ों पर सवार होकर पहुंचे दूध से कराया गया स्नान

दीक्षा से पहले चारों दीक्षार्थी घोड़ों पर सवार होकर दीक्षा स्थल पर पहुंचे। जहां इनकी भव्य अगवानी की गई। इसके पश्चात कैशलौच हुआ। हल्दी और दूध से स्नान कराया गया। इसके बाद दीक्षा समारोह शुरू हुआ। सबसे पहले चारों लोगों का नामकरण संस्कार किया गया फिर पिच्छी कमंडल प्रदान किए गए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

मुनि विश्रुत सागर व विहसंत सागर रहे मौजूद

कार्यक्रम में मुनि विश्रुत सागर व मुनि विहसंत सागर महाराज, कर्नाटक से आए भट्टारक लक्ष्मीसेन महाराज साक्षी थे। इस मौके पर ग्वालियर में न्यायाधीश कुलदीप जैन, भिंड में न्यायाधीश मुन्नालाल राठौर, विधायक संजीव सिंह कुशवाह, धर्म चंद्र शास्त्री, रविसेन जैन, राजेंद्र जैन बिल्लू, मुकेश जैन सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

दीक्षार्थियों का संस्कार कराते मुनि।

दीक्षा के बाद दीक्षार्थी का नया जीवन होता है शुरू:जैनाचार्य ने कहा कि दीक्षा के बाद दीक्षार्थी का नया आध्यात्मिक जीवन शुरू होता है। जैन दर्शन में दीक्षार्थियों को नए नाम दिए जाने की परंपरा है। क्योंकि अगर दीक्षा के बाद भी व्यक्ति को पुराना नाम रहा तो उसे परिवार से राग की उत्पत्ति होना स्वाभाविक है। इसलिए नया नाम देकर धर्म क्षेत्र में आगे बढ़ने की शुरुआत होती है।

दीक्षार्थियों का परिचय

बृह्मचारी गुन्नू भैया (19)- मुनि यशोधर सागर महाराज






बृह्मचारी मणिकांत भैया (48)- मुनि योग्य सागर महाराज






बृह्मचारी अंकित भैया- मुनि यतींद्र सागर महाराज






बृह्मचारी देवास भैयाजी- क्षुल्लक य| सागर महाराज






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