पशुओं से फसल बचाने किसान कर रहे जगार
सरकारी भूमि पर दबंगों का कब्जा, पंचायतों में गोशाला के लिए जगह नहीं
खेतों में रबी की फसल लहलहा रही है। लेकिन आवारा घूम रही मवेशियों की चिंता किसानों को अभी तक सता रही है। सड़कों पर टहलने वाले आवारा पशु रात में फसल में विचरण करने लगे हैं। ऐसे में किसानों की उम्मीदें दम तोड़ती नजर आ रही हैं। ग्राम पंचायतों सरकारी भूमि के अभाव में गोशालाएं नहीं बन पा रही हैं । सरकार के समक्ष यह समस्या अवश्य होगी कि जिन गांवों में श्मशान घाट बनाने की जगह तलाशना मुश्किल हो रहा है, वहां गोशालाओं के लिए भूमि कहां से लाएंगे।
सरकारी जमीन पर हो रही खेती:
सरकारी भूमि पर दबंग कब्जा करके खेती करने लगे हैं। शासन की खाली पड़ी राजस्व भूमि पर खेती एवं अतिक्रमण कर मकान बनने की वजह से मुर्दा जलाने तक के लिए गांव में शासकीय भूमि नहीं बची है। इन हालातों में गोशाला खोलने के लिए भूमि सबसे बड़ी बाधा साबित होगी। बता दें कि गोहद में करीब एक हजार, लहार में डेढ़, अटेर में 2 हजार और मेहगांव में एक हजार हैक्टेयर से अधिक गोचर भूमि छोड़ी गई है, जिसमें समाजसेवियों द्वारा दान की गई भूमि अलग से है। इसके अलावा गांव-गांव में खाली पड़ी राजस्व भूमि पर अनेक प्रकार से उपयोग लेने की वजह जमीन का एक टुकड़ा तक खाली नहीं किया। इसकी वजह से विकास जनित कार्यों जैसे शासकीय भवन निर्माण, गौचर के लिए भूमि नहीं है, जिससे आवारा मवेशियों की सर्वव्यापी समस्या किसानों की खेती को निरंतर नुकसान पहुंचा रही हैं। हालांकि एंटी माफिया स्कॉवयड गठित होने के बाद अतिक्रमण कारियों के पसीने छूट गए हैं पर जिस तरह राजनीति में नई गर्माहट देखने को मिली है उससे भविष्य की कल्पना करना ठीक नहीं होगा।
लहार में रोड पर खड़ीं आवारा गाय ।