पशुओं से फसलों को बचाने किसान बनाने लगे गोशाला, अब रात में नहीं जागना पड़ेगा

Bhind News - खूजा गांव में ग्रामीणों ने आवारा पशुओं के लिए बनाई अस्थायी गोशाला। अब रात में आवारा पशुओं से नहीं करनी होगी...

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 03:50 AM IST
Lahar News - mp news gaushala started to save crops from the farmers now it will not wake up at night
खूजा गांव में ग्रामीणों ने आवारा पशुओं के लिए बनाई अस्थायी गोशाला।

अब रात में आवारा पशुओं से नहीं करनी होगी खेतों की रखवाली

ग्रामीण इलाकों में किसान शासन से उम्मीद हार चुके हैं। पंचायत सरपंच से लेकर कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों तक किसानों ने गोशालाएं बनाने की मांग की है। किसानों ने अस्थायी गोशालाएं बनाकर रात में खेतों पर फसल बचाने का प्रबंध किया है। खूजा गांव के संतोष धाकड़ ने बताया पहले चौबीसों घंटे खेतों की निगरानी रखनी पड़ती थी। गांव में किसान अपने निजी काम छोड़कर खेतों पर रात में रतजगा करने को मजबूर थे। मगर ग्रामीणों के इस संयुक्त प्रयास से किसानों को कुछ हद तक निजात मिली है। आवारा पशुओं के झुंड को घेरकर लोग गोशाला में बंद कर देते हैं, जिससे रात के समय किसान बेफिक्र होकर घरों में सोते हैं। इस तरह की समस्या किसी एक गांव या पंचायत में नहीं है। आवारा मवेशियों से प्रत्येक गांव में किसान आहत है, जिस पर सरकार का ध्यान नहीं है।

गौरतलब है कि खूजा गांव में पंचायत भवन के पास होमगार्ड सैनिक खुमान सिंह कुशवाह की निजी जगह है। गांव के लोग खेतों पर फसल बचाने के लिए शाम को खाना खाने के बाद घर से निकल जाते थे। कड़ाके की ठंड में किसान खेतों पर फसल की रखवाली करते हैं। इस समस्या को लेकर गांव के उप सरपंच रामदेवी विजयसिंह धाकड़ ने पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव से भी ग्रामीणों के साथ मिले थे और गांव में पुरजोर तरीके से गोशाला बनाने की मांग रखी थी। मगर यहां से बात नहीं बनी तो ग्रामीणों ने खुद ही सहयोग कर गांव में गोशाला बनाने की ठान ली। लोगों ने तार फेंसिंग कर आवारा गायों को संरक्षित करने का दायित्व निभाया गया । इस कार्य में गांव के लोग एकमत होकर सहयोग प्रदान करते हैं। इसी प्रकार बाराकलां गांव में भी किसानों ने तालाब के पास गोशाला बना ली है।

सड़कों के किनारे फसलों का अधिक नुकसान

किसानों की सरसों, चना और मसूर की फसल मार्च के महीने में पककर तैयार होगी। लेकिन खेतों में अभी से फसल बचाना मुश्किल हो रहा है। सबसे अधिक समस्या उन किसानों को हो रही है, जिनके खेत सड़क किनारे पड़ते हैं। क्योंकि आवारा मवेशी रोड पर झुंड बनाकर निकलते हैं और आसपास खड़ी फसल को चर लेते हैं। इसके साथ ही एकाध झुंड अंदर खेतों तक पहुंच जाते हैं। तुकेड़ा के किसान शिवराज सिंह ने बताया गांव में सैकड़ों गाय आवारा घूम रही है। गांव का हर एक किसान इन गायों से परेशान है। खास बात यह है कि ग्रामीण इलाकों में कहां से गाय की भरमार बढ़ रही है, इसकी खबर लोगाें को नहीं है। मगर आवारा पशुओं को संरक्षण देने के लिए सरकार ने कोई प्लान तैयार नहीं किया है। किसान जयप्रकाश धाकड़, खुमान सिंह कुशवाह, बलवीर सिंह कुशवाह, पुष्पेंद्र पटेल, संतोष धाकड़, रज्जन सिंह सहित आदि लोगों ने खुद ही पशुओं से फसल बचाने के उपाय सुझाए हैं।

पशुओं को छोड़ रहे पशुपालक

ग्रामीण इलाकों में पशुपालक गायों को पालते हैं। जब तक गाय दूध देती है, वह चारा-पानी खिलाकर घर में रखते हैं, लेकिन जैसे ही गाय दूध देना बंद कर देती है, ग्रामीण उसे खूंटे से आवारा ढील देते हैं। वहीं गाय चारे की तलाश में किसानों के खेतों में पहुंचती है और फसल को नष्ट करती है। किसानों के लिए पिछले दो साल से आवारा मवेशियों की वजह से फसल की रखवाली करना मुश्किल हो गया है। कभी प्राकृतिक आपदा तो मानवीय आपदा के चलते किसानों को खेती में हर साल घाटा सहन करना पड़ रहा है। किसानों ने आवारा पशुओं को प्रतिबंधित करने की मांग प्रशासन से की है, लेकिन जिम्मेदार इस समस्या का हल खोज पाने में असफल साबित हुए हैं। यही वजह है कि किसानों को हर साल खेती में घाटा सहना पड़ता है।

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