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िदल का मरीज 40 मिनट अाेपीडी के बाहर तड़पता रहा, सिस्टम पर्चा बनवाने मां को दौड़ाता रहा, थम गई बेटे की सांसें

एक वर्ष पहले
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ट्रॉमा के अाॅपरेटर ने कहा- अाेपीडी से पर्चा बनवाकर लाओ, अाेपीडी में काउंटर पर बैठे व्यक्ति ने कहा- यहां नहीं, ट्रामा में ही बनेगा पर्चा

शिवपुरी जिला अस्पताल के लापरवाह सिस्टम ने साेमवार काे हाई ब्लड प्रेशर मरीज की जान ले ली। हार्ट अटैक की आशंका को देखते हुए मनियर निवासी एक युवक को उसकी मां और छोटा भाई जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में लेकर पहुंची। लेकिन हालत गंभीर होने के बाद भी मरीज को भर्ती करने के बजाए उसकी मां को ओपीडी में पर्चा बनवाने के लिए भेज दिया। करीब अाधा घंटे तक लाइन में लगने के बाद नंबर अाया ताे ओपीडी काउंटर पर बैठे ऑपरेटरों ने मरीज की मां से कह दिया कि पर्चा यहां नहीं, ट्रॉमा सेंटर में ही बनेगा। इस बीच बीमार बेटे की हालत लगातार बिगड़ रही थी। अस्पताल में वहां से गुजर रहे एक व्यक्ति ने उसकी हालत बिगड़ती देखी ताे वह उसे उठाकर ट्रॉमा सेंटर के अाईसीयू में ले गया। यहां पर डॉक्टर ने उसकी नब्ज देखी तो मरीज मर चुका था। यानी इलाज से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।

लाइन में आधा घंटा खड़ी रही मां, नंबर आया तो ऑपरेटर बोला- ट्रॉमा में बनेगा पर्चा

मनियर निवासी संजय (34) पुत्र फूल खां की सोमवार की सुबह 9.30 बजे अचानक तबियत बिगड़ गई। संजय को उसकी मां गुड्‌डीबाई अपने छोटे बेटे की मदद से ऑटो से जिला अस्पताल लेकर पहुंची। गंभीर हालत के चलते सीधे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराने के लिए पहुंची। बीमार बेटा संजय दर्द से कराह रहा था। उसे एक तरफ बिठाकर काउंटर से भर्ती पर्चा बनवाने के लिए मजदूरी की किताब दी। गुड्‌डी बाई का आरोप है कि काउंटर पर बैठे कंप्यूटर ऑपरेटर ने कहा कि यहां 60 साल के व्यक्ति का पर्चा बनता है। किताब फेंकते हुए बाहर ओपीडी काउंटर से पर्चा बनवाने की नसीहत दी। गुड्‌डी बाई इसके बाद फिर बेटे को उठाकर ओपीडी काउंटर पर ले गईं। बेंच पर संजय को लिटाकर लाइन में लग गई। करीब आधा घंटे बाद नंबर आया तो ओपीडी काउंटर के ऑपरेटर ने कह दिया कि पर्चा तो ट्रॉमा सेंटर से ही बनेगा। करीब 40 मिनट बीत जाने के बाद संजय की हालत अाैर ज्यादा खराब हो गई। संजय की बिगड़ती हालत वहां से गुजर रहे एक व्यक्ति ने देखी ताे उसे सीधे ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में ले गए। यहां डॉ सुरेश पिप्पल ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया।


हम गिड़गिड़ाते रहे... उन्हाेंने हमारी एक नहीं सुनी, अाखिरकार मेरे बेटे की जान ले ही ली

मेरे बेटे की हालत बहुत खराब थी। उसके सीने में दर्द हो रहा था। ब्लड प्रेशर और शुगर बहुत बढ़ी हुई थी। उसे बहुत घबराहट हो रही थी। हम उसे ट्रॉमा सेंटर में लेकर गए तो वहां काउंटर पर बैठे ऑपरेटर ने कहा कि यहां साठ साल से ऊपर के लोगों का पर्चा बनता है। इसका पर्चा ओपीडी से बनवाकर लाओ। हम उसके सामने गिड़गिड़ाए भी कि मेरा बेटा मर जाएगा, उसका इलाज शुरू कर दाे। उसके बाद जहां से कहाेगे हम वहां से पर्चा बनवा लाएंगे। लेकिन उन्होंने हमारी एक नहीं सुनी। हम अपने बीमार बेटे को साथ लेकर पर्चा बनवाने चले भी गए। उसे बेंच पर लिटा दिया। हम पर्चा बनवाने लगे। लेकिन काफी देर इंतजार के बाद वहां भी कह दिया कि ट्रॉमा सेंटर में ही पर्चा बनेगा। हम वहां से लौटकर आए तो हमारा बेटा सुधबुध खो बैठा था। उसकी हालत देखते नहीं बन रही थी। जब तक आईसीयू में लेकर पहुंचे तब तक वह अांखें मूंद चुका था।

जैसा कि मृतक संजय की मां गुड्डीबाई ने भास्कर को बताया

संजय की मां गुड्डी ट्रॉमा सेंटर में पर्चा बनाने वाले युवक पर आरोप लगाती हुई।

ट्रॉमा सेंटर में संजय खां की जांच करने के बाद उसे मृत घोषित करते डॉक्टर।

जिम्मेदार पर कार्रवाई होगी


युवक की मौत के बारे में जानकारी किसी ने नहीं दी। ट्रॉमा सेंटर में किस ऑपरेटर ने पर्चा नहीं बनाया, इसकी जानकारी लेंगे। जिम्मेदार पर कार्रवाई करेंगे।
डॉ. एमएल अग्रवाल, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल शिवपुरी

बेंच पर लेटे युवक की हालत बिगड़ती देख एक व्यक्ति ने उसे आईसीयू में भर्ती कराया, तब तक देर हो चुकी थी
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