भारत विश्व को देता है शांति का संदेश
सकल जैन समाज के अतिशय क्षेत्र और अहिंसा की नगरी बरासों में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव और विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन हो रहा है। महोत्सव के चौथे दिन सोमवार को तप कल्याण महोत्सव आयोजित किया गया। इसमें भगवान आदिनाथ के तप का नाटकीय मंचन किया गया गया, वहीं श्रद्घालुओं ने भगवान की शांतिधारा का पूजन किया।
इस मौके पर गणाचार्य विराग सागर ने कहा कि भारत अहिंसा की धरती है जो विश्व को शांति का संदेश देता है। जैन धर्मावलंबियों के विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल अहिंसा की नगरी मधुवन से बुधवार को भारत सहित पूरे विश्व को अहिंसामय बनाने और हिंसा रोकने के अभियान का शंखनाद होगा। यहां सम्मेद शिखर में चल रहे पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान इस अभियान की शुरुआत की जाएगी। तप कल्याणक में श्रद्घालुओं द्वारा तन कल्याण के नाटकीय मंचन के दौरान भगवान आदिनाथ की ईश्वर के प्रति आस्था जागृत होती है जिसके चलते वे ईश्वर की प्राप्ति के लिए तप करने लगते हैं। इस दृश्य को देखकर भक्त भजनों पर नृत्य करने लगते हैं। नाटक के मंचन से पहले श्रद्घालुओं ने भगवान आदिनाथ की शांतिधारा पूजन किया। इस दौरान दिल्ली, कानपुर, ग्वालियर, भिंड, इटावा, जालौन सहित अन्य स्थानों से आए श्रद्घालु शामिल हुए।
ईश्वर की मर्जी के बिना कोई कार्य संभव नहीं
धर्मसभा में गणाचार्य विराग सागर ने कहा कि दुनिया में ईश्वर की मर्जी के बिना कोई भी कार्य करना संभव नहीं है। व्यक्ति कार्य से पहले ईश्वर का ही स्मरण करता है। इसके बाद वह कार्य के लिए आगे बढ़ाता है और हमारे द्वारा किए गए कार्य में हमें सफलता मिल जाती है, तब हमारे कहने में आ ही जाता है कि जो कुछ भी हो रहा सब ईश्वर की ही कृपा है उसकी ही देन हैं, जो कुछ भी है सब उसी का है हमारा तो कुछ भी नहीं है लेकिन इस बात को भी झुठलाया नहीं जा सकता कि हमने कार्य की शुरुआत ईश्वर का नाम लेकर ही की थी।
पंचकल्याणक महोत्सव में तप कल्याणक का नाटकीय मंचन करते हुए कलाकार।