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जियो और जीने दो: गणाचार्य

एक वर्ष पहले
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धर्म सभा में मुनिश्री ने बताया जैन धर्म का सिद्यांत

जैन धर्म को मनाने वाला कोई पुरुष और स्त्री अन्य धर्म और जाति में विवाह करता है तो वह पंचकल्याणक महोत्सव क्रियाओं में शामिल नहीं हो सकता है। इसके अलावा वह किसी भी जैन संत को आहार भी नहीं करा सकता है। यह बात बरासों जैन मंदिर में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव में धर्मसभा के दौरान गणाचार्य विराग सागर महाराज ने मौजूद श्रद्धालुओं ने कही।

महाराज ने कहा कि जैन धर्म सभी को जियो और जीने दो की सीख देता है। इस के साथ ही गृहस्थ लोगों को अपने बच्चों के विवाह और शादी अपने धर्म में करने की बात कहता है। अन्य धर्म और जाति में शादी करने से वह पुरुष और स्त्री जैन मुनि को आहार कराने का अधिकार खो देता है ऐसा इसलिए क्योंकि जैन मुनि हमेशा जैन धर्म को मानने वालों के यहां ही आहार करते हैं। गणाचार्य ने धर्मसभा में आगे बोलते हुए बताया कि भगवान महावीर ने अपने प्रवचनों में धर्म, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, क्षमा पर सबसे अधिक जोर दिया। त्याग और संयम, प्रेम और करुणा, शील और सदाचार ही उनके प्रवचनों का सार था। भगवान महावीर ने चतुर्विध संघ की स्थापना की। देश के भिन्न-भिन्न भागों में घूमकर भगवान महावीर ने अपना पवित्र संदेश फैलाया। उन्होंने दुनिया को पंचशील के सिद्धांत बताए। इसके अनुसार ये सिद्धांत सत्य, अपरिग्रह, अस्तेय, अहिंसा और क्षमा हैं। उन्होंने अपने कुछ खास उपदेशों के माध्यम से दुनिया को सही राह दिखाने की कोशिश की।

गणाचार्य विराग सागर महाराज को चढ़ाया श्रीफलः पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान जयपुर, हैदराबाद, झांसी, जबलपुर, आमीगांव, जगदलपुर, इटावा, दिल्ली, ग्वालियर, आगरा से आए श्रद्धालुओं ने गणाचार्य विराग सागर महाराज के समक्ष श्रीफल चढ़ाते हुए आगामी चातुर्मास हमारे नगर में करने की प्रार्थना की।

225 जिन प्रतिमाओं के कान में पढ़ा सूर्यमंत्र

धर्मसभा आयोजन के बाद गणाचार्य विराग सागर और मुनि विहसंत सागर महाराज ने बरासों जैन मंदिर परिसर में 225 जिन प्रतिमाओं के कानों में सूर्यमंत्र का उच्चारण किया, अब श्रद्धालु इन प्रतिमाओं का पूजन कर सकेंगे। प्रतिमाओं के कान में सूर्यमंत्र उच्चारण के बाद उपस्थिति लोगों ने भगवान अजितनाथ के जयकारे लगाए। जिससे मंदिर सहित आसपास का पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। महिलाओं ने भजनों पर नृत्य की प्रस्तुति भी दी।

भक्त ने पूछा- बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि क्यों हो रही है, मुनि बोले- यह प्रकृति के अति दोहन का नतीजा

महोत्सव में शाम को भगवान के समोशरण का सृजन किया गया। समोशरण में 12 सभाएं लगीं। समोशरण में जाकर भगवान ने अपनी दिव्य ध्वनि से धर्मोपदेश दिया। समोशरण में भगवान गणाचार्य विराग सागर महाराज(समोशरण में श्रद्घालुओं ने इनको भगवान माना) ने भक्तों के द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए उनकी जिज्ञासों को शांत किया। समोशरण में श्रद्घालु मनोज जैन ने भगवान से पूछा कि भगवन देश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि क्यों हो रही है। भगवान गणाचार्य ने भक्त की बात का जबाव देते हुए कहा कि प्रकृति का जब दोहन अति से अधिक होता है तो लोगों को ऐसे परिणाम देखने को मिलते हैं। इसी क्रम में भक्त प्रकाश जैन ने पूछा कि देश और प्रदेश की राजनीति में उथल-पुथल होने के पीछे क्या कारण रहा है। गणाचार्य ने भक्त के प्रश्न का जबाव देते हुए कहा कि राजनीति आज की प्रकृति के समान हो चुकी है, यह कभी भी बदल सकती है। समोशरण में अन्य भक्तों की गणाचार्य ने जिज्ञासा शांत की।

समोशरण में गणाचार्य विराग सागर भक्तों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए।

गणाचार्य विराग सागर के प्रवचन सुनते हुए भक्तगण।
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