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बेतवा नदी के किनारे से माफिया काट रहे हरी लकड़ी, पुलिस नहीं कर रही कार्रवाई
दबोह क्षेत्र से निकली बेतवा नदी के बीहड़ में माफिया हरे-भरे पेड़ों को काटकर जंगल वीरान कर रहे हैं। दिन के उजाले में बीहड़ों से लकड़ी काटकर बाजार की आरा मशीनों पर बेच दी जाती है। लकड़ी से भरे ट्रैक्टर-ट्राॅली को पुलिस रोकने के बजाय आसानी से निकलने देती है। शासन व प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर लकड़ी माफिया सुबह से देर शाम तक नदी किनारे बीहड़ में लकड़ी की कटाई करते हैं। जिससे दिन प्रतिदिन प्राकृतिक पर्यावरण का स्वरूप बिगड़ता जा रहा है। बीहड़ों में दिखाई देने वाले साल, बबूल, पीपल, नीम, आम, पार्वती बबूल आदि पेड़ों को काटकर लकड़ी माफिया समाप्त कर रहे हैं। इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों से बात की गई तो वह कार्रवाई का दिलासा दे रहे हैं।
माफियाओं पर नहीं होती कार्रवाई: बीहड़ों में पेड़ों की कटाई ग्रामीण इलाकों में रहने वाले माफिया आसानी से कर लेते हैं, लेकिन हरी लकड़ी को बाजार की आरा मशीनों तक पहुंचाने का काम पुलिस की मिली भगत से किया जाता है। सूत्रों की मानें तो बीहड़ से हर रोज आधा दर्जन ट्रैक्टर-ट्रॉली लकड़ी से भरकर निकलते हैं। जिन्हें आरा मशीनों तक पहुंचने में दबोह थाना से होकर गुजरना पड़ता है। अब सवाल लाजमी है कि पुलिस के पहरे से हरे-भरे पेड़ों की अवैध तस्करी कैसे की जाती है। जबकि आवागमन वाले मार्ग पर पुलिस की चेकिंग रहती है। हालांकि पुलिस प्रशासन अपना पल्ला झाड़ रही है। उसके बावजूद लकड़ी माफिया अपना कारोबार धड़ल्ले से संचालित कर रहे हैं। क्षेत्र के मारपुरा, अमहा, खूजा, अरुषि, बड़ागांव सहित आदि गांवों के बीहड़ माफियाओं ने वीरान कर दिए हैं।
बीहड़ से काटकर लाई लकड़ी को बेचने के लिए खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली।