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मंडी में इलेक्ट्रॉनिक कांटे नहीं, घटतौली के भय से किसान व्यापारियों को तौल रहे उपज
हर महीने लाखों रुपए के राजस्व का घाटा प्रशासन को झेलना पड़ रहा है
मौ कृषि उपज मंडी में पिछले एक साल से इलेक्ट्रॉनिक कांटे खराब पड़े हैं। सादा कांटों पर अनाज तुलने से किसानों का घटतौली का भय रहता है जिसके कारण वह मंडी में अपनी उपज न बेचकर व्यापारियों के यहां दासों पर तुलाई करा देते हैं। ऐसे में मंडी टैक्स की चोरी कर हर महीने लाखों रुपए के राजस्व का घाटा प्रशासन को झेलना पड़ रहा है। मामले को लेकर प्रशासन के अधिकारी नए सीजन में कांटे सुधरवाने का दावा कर रहे हैं मगर देखना होगा कि किसानों को यह सुविधा कब तक प्राप्त होती है।
मंडी सचिव राजेंद्र सिंह गुर्जर की लापरवाही के कारण किसानों सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। सचिव की मनमर्जी से व्यापारी मंडी में बोली लगाने आते हैं और चले जाते हैं, जबकि तौल का काम व्यापारियों के दासों पर ही किया जाता है। किसान भी ग्रामीण इलाकों से चलकर मंडी पहुंचते हैं मगर जब यहां कांटे नहीं दिखते हैं तो वह मजबूर होकर दासों पर ही अनाज बेचकर चले जाते हैं। समस्या को लेकर जब तहसीलदार निशिकांत जैन को अवगत कराया गया तो उन्होंने कहा कि गल्लामंडी में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसानों की शिकायत प्राप्त होती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मंडी में नहीं आते किसानः मंडी में अनाज तौलने के लिए कोई सुविधा प्राप्त नहीं है। केवल व्यापारी बोली लगाने के लिए आते हैं और चले जाते हैं। किसानों की रसीद काटकर कह दिया जाता है कि दासे पर इस स्थान पर पहुंचकर अपना अनाज तुलवाएं। किसान भी भ्रमित रहते हैं और वह व्यापारियों को अनाज बेचकर चले जाते हैंं। वहीं मंडी प्रशासन के अधिकारियों का यह काम रहता है कि किसानों को सभी सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं, व्यापारी मंडी में अनाज तौल रहे हैं कि नहीं। लेकिन सचिव गुर्जर से जब इलेक्ट्रॉनिक कांटों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बेतुका जवाब दिया। पानी की समस्या को लेकर भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। किसानों हरिओम शर्मा का कहना है कि प्रशासन के कर्मचारी इतने लापरवाह हैं कि उन्हें सुविधाओं से कोई वास्ता नहीं है । यही कारण है कि मंडी सूनी पड़ी रहती है।
जल्द ही इलेक्ट्रॉनिक कांटे सही करवा देंगे
निशिकांत जैन, नायब तहसीलदार, मौ
किसानों के साथ होती है घटतौली
किसानों के साथ मंडी में घटतौली होती है इसके लेकर कई बार अधिकारियों से शिकायतें हुई हैं। मगर वर्तमान में इक्का दुक्का ट्रॉली ही लेकर किसान पहुंच रहे हैं। खुद के गोदामों या दुकानों पर व्यापारी इलेक्ट्रॉनिक कांटों से अनाज अवश्य तौलते हैं पर उसमें भी वह दासे के नाम पर घटतौल कर देते हैं। किसान मंडी में इसलिए तौल नहीं कराते हैं क्योंकि यहां सादा कांटों पर हम्माल अनाज मार लेते हैं। ऐसे में किसानों को दोनों तरफ से निराशा ही हाथ लग रही है।
मंडी में नहीं पीने का पानी
कृषि उपज मंडी में कसचिव की लापरवाही के कारण 7 महीने से फ्रीजर खराब पड़ा है जिससे पानी की किल्लत बढ़ गई है। इसके साथ ही यहां कैंटीन की सुविधा नहीं की गई है। किसान खाना खाने के लिए अपने घर से भोजन लेकर आते हैं। जबकि पांच रुपए की रेट से मंडियों में कैंटीन से भोजन की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बावजूद किसानों को शासन की सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है।
मौ में खुले में व्यापारी के दासे पर तौल रहे अनाज ।
मंडी में बोली के लिए खड़ी अनाज से भरी ट्रॉली ।