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ओला पीड़ित किसान नहीं मनाएंगे होली, पटवारी बोले- हम भी साथ, प्रशासन का दावा- सभी को मिलेगा मुआवजा
गोरमी क्षेत्र में ओले से फसल बर्बाद होने के बाद शासन से आस
जिले के 200 से अधिक गांवों में शुक्रवार को हुई ओलावृष्टि से किसानों की सरसों और गेहूं की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है। प्रशासन का सर्वे दल जब गांवों में पहुंचता है तो किसानों का दर्द उनके सामने झलक उठता है। ओलों का घाव इतना गहरा हुआ है कि अन्नदाताओं ने होली न मनाने का निर्णय ले लिया। उनके साथ मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने निर्णय लिया है कि वह किसानों के साथ हैं और होली की खुशियां नहीं मनाएंगे। पंचायत सरपंचों ने भी कह दिया कि अगर किसान दुखी हैं तो हम उत्सव कैसे मना सकते हैं। जब तक शासन से पीड़ित किसानों को नुकसान की नहीं होती है कोई खुशी नहीं मनाएगा। इसके बाद ग्रामीणों की उम्मीद सरकार से जाकर टिक गई हैं। संघ के जिला संरक्षक देवेंद्र त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष मनीष शर्मा, जिला सचिव राघवेंद्र सिंह तोमर के आश्वासन पर सभी पटवारियों ने होली न मनाने का निर्णय लिया है। साथ ही विधायक ओपीएस भदौरिया ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर किसानों को मुआवजा देने की मांग करते हुए कहा कि किसानों से अभी बिजली या बैंक का बकाया कर्ज नहीं वसूला जाए।
प्रशासन ने गठित किए दल
गोरमी तहसील में प्रत्येक गांव के लिए राजस्व पटवारी, कृषि विस्तार अधिकारी और ग्राम सेवक सहित तीन लोगों का सर्वे दल गठित किया गया है। तहसीलदार शिवदत्त कटारे का कहना है कि टीमें गांवों में सर्वे कार्य शुरु कर दिया है। किसानों को किसी तरह से घबराने की आवश्यकता नहीं है। पूरी तरह से निष्पक्ष सर्वे किया जाएगा। अगर किसी गांव में कर्मचारी नहीं पहुंचते हैं तो धैर्य रखें एक भी खेत सर्वे की लिस्ट से नहीं छूटेगा।
हम भी होली नहीं मनाएंगे
सुघरसिंह नरवरिया, सरपंच, दौनियापुरा
निष्पक्ष सर्वे किया जाएगा
शिवदत्त कटारे, नायब तहसीलदार, गोरमी
बेटी की शादी कैसे करेंगे
एक महीने बाद 4 मई को बेटी राखी की शादी करनी है। हमारे पास एक बीघा जमीन है बाकी 12 बीघा 7 हजार रुपए प्रति बीघा के हिसाब से कटता पर ली है। 5 बीघा में गेहूं बाकी में सरसों की फसल बोई थी। खेतों में गुरुवार को सरसों की कटाई शुरु की थी लेकिन दूसरे दिन पूरी फसल ओलों की भेंट चढ़ गई। अब बेटी की शादी और साहूकारों से लिया कर्ज कैसे चुकाएंगे इसी की चिंता सताए जा रही है ।
पूरन बरैठा, किसान, दौनियापुरा
फिर साहूकारों से लेना पड़ेगा कर्ज
साहूकारों से कर्जा लेकर कटता पर 4 बीघा फसल में सरसों बोई थी। लेकिन फसल पर बरसे ओलों ने सब कुछ तबाह कर दिया है। 29 जून को बेटी कविता की शादी है। पहले से कर्जा लिया है वह भी चुकाना है ऐसे में साहूकारों से फिर से कर्जा लेना पड़ेगा। अब तो प्रशासन से ही उम्मीद है, अगर ठीक मुआवजा मिला तो ही जीवन चल पाएगा। ओला-पानी ने तो बर्बाद कर दिया।
रामौतार बरैठा, किसान, दौनियापुरा
अब सालभर क्या खाएंगे
खेतों में खड़ी फसल ओलों से नष्ट हो गई है। अब साल भर परिवार का भरण पोषण कैसे करेंगे इसकी चिंता सताए जा रही है। पूरे गांव की उम्मीदें शासन पर टिकी हैं। अगर सही मुआवजा मिल जाए तो किसानों को थोड़ा बहुत सहयोग मिल जाएगा। खेत में तो कुछ भी नहीं बचा। अगर प्रशासन से मुआवजा नहीं मिला तो भूखों मरने की नौबत आ जाएगी। ओला- पानी ने सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
गजेंद्र सिंह भदौरिया, किसान, अकलौनी
तबाही ने बर्बाद किया
क्षेत्र के दौनियापुरा, रजगढि़या, कल्यानपुरा, राऊपुरा, हसनपुरा, अकलौनी, बालूपुरा, प्रतापपुरा, कृपे का पुरा, सुकांड आदि गांवों में ओला से तबाही के बाद किसानों के चेहरे उतर गए हैं। कुछ ऐसे भी लोग हैं जो उपज से बेटियों की शादी के लिए उम्मीद लगाए बैठे थे। मगर 20 से 40 मिनट बरसी आफत ने उनकी उम्मीदों पर इस तरह कुठाराघात किया कि उनकी साल भर की मेहनत पर ही पानी फिर गया। ओलावृष्टि के बाद खेतों में खड़ी फसल का नजारा देखकर किसान अपने आंसू नहीं रोक पाए। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के अधिकारियों ने दिलासा दिया है कि पूरा मुआवजा दिया जाएगा। लेकिन किसानों को अभी भी इंतजार है।
ऐसे समझें किसानों का दर्द... किसी को बेटी की शादी चिंता किसी को कर्ज की
दौनियापुरा में ओलावृष्टि से झड़ी सरसों दिखाते किसान ।