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पंचकल्याणक: भगवान की माता को दिखे 16 स्वप्न, भक्तों ने भरी गोद

9 महीने पहले
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अतिशय क्षेत्र में हो रहे आयोजन में देशभर से आए श्रद्धालु ले रहे भाग

अतिशय क्षेत्र बरासों जैन मंदिर में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव और विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को गर्भ कल्याणक उत्तर रूप महोत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें भगवान आदिनाथ की माता मरू को 16 स्वप्न का मंचन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान आदिनाथ के माता-पिता की गोद भरने के साथ गणाचार्य विराग सागर महाराज और मुनि विहसंत सागर महाराज के सानिध्य में भगवान आदिनाथ का शांतिधारा पूजन किया। इस दौरान भगवान के जयकारों से आसपास का पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

गौरतलब है कि गणाचार्य विराग सागर महाराज के सानिध्य में गर्भ कल्याणक उत्तर रूप में सुबह 6.30 बजे देव स्तवन और गर्भ कल्याणक पूजन हवन आदि एवं दोपहर में मंडप विधान मंदिर वेदी शुद्धि का आयोजन हुआ। इसके अलावा गोद भराई उत्सव और शाम 6 बजे आरती एवं 8 बजे गर्भ कल्याणक का द्वितीय भाग के आयोजन में नाटक का मंचन में माता मरूदेवी के 16 स्वप्न, गर्भ कल्याण अभ्यन्तर क्रिया आदि का नाटकीय चित्रण बखूबी से किया गया। नाटक मंचन में भगवान आदिनाथ की मां मरु को रात में नींद के समय भगवान के जन्म के 16 स्वप्न आते हैं,जागने के बाद माता मरू अपने सपनों के बारे में भगवान के पिता राजा नभिराय को बताती हैं। जिसके बाद राजा नाभिराय कहते हैं कि 16 स्वप्न को सुनकर ऐसा लगता है कि हमारे यहां पर भगवान पैदा होने वाले हैं। जिसके बाद महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने भक्ति भजनों पर नृत्य किया।

धर्म हानि होने पर भगवान पैदा होते हैं

महोत्सव में आयोजित धर्मसभा में गणाचार्य विराग सागर ने कहा कि जब धरती पर धर्म की हानि होने लगी है तो भगवान धर्म को बचाने के लिए पैदा होते हैं। दुनिया में जैन धर्म में भगवान के जन्म को गर्भकल्याण के रूप में मनाया जाता है, अन्य किसी धर्म में ऐसा नहीं होता है। गणाचार्य ने आगे बोलते हुए कहा कि जैन दर्शन कहता है अपने घर के बुजुर्गों की सच्चे मन से सेवा करना ही कई जैन मुनि की सेवा करने के बराबर होता है। माता-पिता अपनी बेटियों को पढ़ा-लिखाकर योग्य बनाएं। साथ ही मांसाहार के स्थान पर हमेशा शाकाहार भोजन करें, जो कई बीमारियों से बचा सकता है।

महोत्सव में भगवान आदिनाथ के माता-पिता की गोद भरते हुए श्रद्घालु।

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