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पंचकल्याणक महाेत्सव: भगवान आदिनाथ के जन्म की मनाईं खुशियां, अतिशय क्षेत्र से निकाला गज चल समारोह
यात्रा मंे सौधर्म और इंद्र-इंद्राणी हाथी पर सवार होकर निकले, श्रद्धालुओं ने बरसाए फूल
अतिशय क्षेत्र बरासों में चल रहे सात दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव और विश्व शांति महायज्ञ में तीसरे दिन रविवार को सुबह आदिनाथ का जन्म हुआ। भगवान के जन्म की सूचना मिलने पर मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने खुशियां मनाई गई। साथ ही तीर्थक्षेत्र में बैंड-बजों के साथ गज शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें सौधर्म और इंद्र-इंद्राणी हाथी पर सवार होकर निकले।
गौरतलब है कि भगवान आदिनाथ के जन्म के बाद शोभायात्रा मंदिर परिसर से शुरू होकर पूरे तीर्थक्षेत्र में घूमी। इस दौराना यात्रा में हाथी पर भगवान को लेकर सौधर्म और इंद्र-इंद्राणी सवार होकर चल रहे थे। साथ में कुबेर यात्रा के दौरान र|ों की बारिश करते हुए चल रहे थे। वहीं यात्रा में राजा-रानियों बग्गियों में सवार होकर चल रही थीं। वहीं महिलाएं हाथों में कलश लेकर चल रहीं थी। साथ ही बैंड-बाजों की धुनों पर युवा भक्त डांस करते हुए चल रहे थे। इस मौके पर सैकड़ों श्रद्घालुओं के अलावा गणाचार्य विराग सागर, मुनि विहसंत सागर सहित अन्य 90 जैन संत शामिल हुए।
भक्ताें ने भगवान का किया अभिषेक: पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के तीसरे दिन भगवान आदिनाथ का जन्म होने के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान का महाभिषेक करते हुए शांतिधारा पूजन किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के भजनों का गायन किया।
भगवान के जन्म पर इंद्र का डोलने लगता है सिंहासन
मंदिर पर परिसर में रविवार की सुबह भगवान आदिनाथ के जन्म का नाटकीय मंचन का आयोजन हुआ। मंचन के दौरान भगवान आदिनाथ के जन्म होने पर इंद्रदेव का सिंहासन डोलने लगता है। इंद्र को पता चलता है कि भगवान आदिनाथ का जन्म हुआ है तो स्वर्ग में खुशियां छा जाती हैं वहां पर देव कन्याएं नृत्य करती हैं। जबकि इंद्र अपने ऐरावत हाथी पर सवार होकर स्वर्ग से भगवान की नगरी में पहुंचते हैं। नगरी में इंद्र भगवान के पास पहुंचते हैं और उन्हें अपनी गोद में उठाकर सुमेरू पर्वत पर ले जाते हैं। सुमेरू पर्वत पर इंद्र और अन्य देवतागण भगवान आदिनाथ का अभिषेक करते हैं। नाटक के मंचन के दौरान वहां मौजूद श्रद्धालु भक्तिभाव में डूब में गए।
सत्य का मार्ग ही जीवन की सफलता का मार्ग है
कौन कहता है, सपने साकार नहीं होते हैं। ऐसा नहीं है क्योंकि माता मरुदेवी के सपने साकार हुए हैं, कर्मयुग के प्रारंभ में आदिनाथ भारत-भू पर अवतरित हुए हैं। भारतीय वसुंधरा र|गर्भा के साथ-साथ साधु संताें की भी है। धरती की कोख से जहां र| निकलते हैं, वहीं माता मरुदेवी की कोख से आदिनाथ, त्रिशला की कोख से भगवान महावीर और मां कौशल्या की कोख से प्रभु श्रीराम से जगमग चेतन र| निकलते हैं। भिंड का सौभाग्य है कि एक महीने के अंदर यहां पर दो पंचकल्याणक महोत्सव आयोजित हुए हैंै।
विधायक का जैन संतों ने किया सम्मानित
46 वर्ष बाद जैन सकल जैन समाज को कीर्ति जैन स्तंभ मंदिर की जमीन को केबिनेट से मंजूरी दिलाने के लिए गणाचार्य विराग सागर सहित अन्य जैन संतों ने विधायक संजीव सिंह कुशवाह को सम्मानित किया। सम्मानित होने पर विधायक कुशवाह ने कहा कि मंदिर की जमीन जैन समाज की थी, उसको उन तक पहुंचाने में मैंने मदद की है। साथ ही मैंने जो वादा किया था उसको पूरा किया है। इस मौके पर अजीत सिंह भदौरिया, मनीष लोहिया, मुकेश जैन, सुनील जैन, जगदीश जैन, कमलेश सांतरी, राजेश जैन, विनोद जैन आदि मौजूद रहे।
रविवार की सुबह बरासों जैन मंदिर में गणाचार्य विराग सागर महाराज ने मीडिया प्रभारी मनोज जैन से बरासों पंचकल्याण महोत्सव की खबर पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर अखबार मांगा। अखबार आने के बाद महाराज ने सर्वप्रथम भिंड भास्कर को उठाते हुए मीडिया प्रभारी मनोज जैन से पूछा महोत्सव की खबर किस पेज पर प्रकाशित हुई है। खबर पढ़ने के बाद गणाचार्य विराग सागर ने दैनिक भास्कर द्वारा प्रकाशित खबर की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जो लोग जिनवाणी को लोगों तक पहुंचाने का काम करते हैं वे मां सरस्वती के पुत्र होते हैं।
मुनिश्री ने भास्कर में पढ़ा महोत्सव का कवरेज
दैनिक भास्कर में पंचकल्याणक खबर को पढ़ते हुए गणाचार्य विराग सागर महाराज।
विधायक संजीव सिंह कुशवाह को महोत्सव में सम्मानित किया गया।
बरासों में गज शोभायात्रा निकालते श्रद्धालु।