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दूसरे पक्षियों की नकल उतारने में माहिर रियूफोस बैक्ड श्राइक का चंबल में डेरा

Bhind News - भिंड |सुबह के वक्त गुलाबी सर्दी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। इसी मौसम में रियूफोस बैक्ड श्राइक भी चंबल में...

Nov 11, 2019, 06:26 AM IST
भिंड |सुबह के वक्त गुलाबी सर्दी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। इसी मौसम में रियूफोस बैक्ड श्राइक भी चंबल में दिखाई देने लगी है। इस मौसम में हिमालय और ठंडे देशों से कई प्रवासी पक्षी चंबल में आते हैं। बस उन्हें ही देखने के लिए अपने राम साइकिल लेकर चल दिए चंबल के बीहड़ों में। क्वारी नदी के किनारे सिमराव में खंडहर होती तोमर परिवारों की हवेलियां अतीत का गौरव-गान कर रही हैं। धूल, धुआं और धुंध की धूम दिल्ली में ही नहीं यहां भी बीहड़ों में दम घोंट रही हैं।

कांच-बंगुला, मोर, तोते फाख्ता, कबूतर, काॅमन-मायना, सतभैया, कोतवाल, बुलबुल आदि पक्षियों का कलरव तो सुनाई दे रहा हैं। लेकिन जिनकी तलाश में मैं यहां आया हूं उनका कोई नामोनिशान नहीं दिखाई दे रहा है। दूर-दूर तक पेड़ों पर यूरोप से आईं रोजी स्टर्लिंग के झुंड के झुंड बैठे हैं जो यहां की स्थानीय स्टर्लिंग में खूब घुलमिल गए हैं। मौसम साफ होने और धूप निकलने का इंतजार करते- करते 10 बज गए हैं। टीकमगढ़ जिले से आए मजदूर परिवार खेतों में बाजरा की कटाई में जुटे हैं। पास में एक घनी झाड़ीनुमा पेड पर कुछ घोंसलों के ऊपर मटियाला लटोरा या काजल लटोरा, जिसे रियूफोस बैक्ड श्राइक भी कहा जाता है बैठी है। बुलबुल के आकार का और मैना से छोटा एक बहुत सुंदर पक्षी है जो यह अक्सर सर्दी में ही दिखाई देता है। इसका माथा काला होता है आंखों के पास से जाने वाली पट्टी काली, निचली पीठ, कूबड़ और निचले अंग बदामी रंग के होते हैं। लगातार बढ़ रहे प्रदूषण से प्रवासी पक्षियों की संख्या घटी है, अगर जल्द ही इस पर काबू नहीं पाया गया तो देर भी हो सकती है।

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दूसरे पक्षियों की नकल उतारने में होती है माहिर

यह कुदरती मिमिक्री आर्टिस्ट है। अपने आसपास रहने वाले प्राणियों की बोली की नकल बखूबी करती है। सांप के द्वारा पकड़े गए मेंढक की चीत्कार, नवजात कुत्ते के बच्चों का भांे-भों करना, पालतू तीतर की आवाज और उसके रखवाले मनुष्य की सीटी, तथा अन्य चिड़ियों की बोलियों की नकल कर लेती है। टिड्डे, बड़े कीट, छिपकली छोटे चूहे इसका प्रमुख भोजन है,। फरवरी से जुलाई तक छोटे पेड़ों की शाखाओं में 15 फुट की ऊंचाई तक टहनियों से गड़ा हुआ गहरा प्यालानुमा घोंसला बनाती है जिसमें 3 से 6 अंडे देती है।भारतीय संघ में सभी जगह यानी पाकिस्तान, बांग्लादेश, लंका और वर्मा में जाड़े के दिनों में खूब दिखाई देता है हिमालय के क्षेत्रों में 8000 फुट की ऊंचाई तक दिखाई देता है सामान्य तौर पर इसकी ध्वनि कर्कश होती है, परंतु प्रजनन काल में काफी देर तक मधुर और अव्यवस्थित गीत गाती रहती है।

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