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घड़ियाल की कठोर त्वचा से अपना भोजन तलाश लेता है बड़ा काखानक

Bhind News - भिंड |दोस्तों, रविवार की सुबह है और मौसम में ठंडक है। चंबल नदी तक पंहुचते-पहुंचते सूर्यदेव निकल तो आए हैं पर चंबल के...

Nov 25, 2019, 06:26 AM IST
Bhind News - mp news the big chest explores its food from the hard skin of the crocodile
भिंड |दोस्तों, रविवार की सुबह है और मौसम में ठंडक है। चंबल नदी तक पंहुचते-पहुंचते सूर्यदेव निकल तो आए हैं पर चंबल के पानी से उठती हुई भाप धुंध को और बढ़ाती दिख रही है। धीरे-धीरे कोहरा छंट रहा है पर धुंध अभी भी है। तभी बड़ा काखानक की तेज कठोर चीख सुनाई देती है पर वह कहीं दिखाई नहीं दे रहा।

ऐसा लगा मानो यह पक्षी वीराने में मनुष्य की उपस्थिति का संकेत देकर शेष प्राणी जगत को सावधान कर रहा है। मैंने अपनी दूरबीन से चारों ओर देखा तो पानी में तैरते घड़ियाल और मगर धूप सेंकने के लिए रेत पर आराम फरमाते दिखे। हमारे ऋषियों ने मगर की आराम करने की मुद्रा को मकरासन नाम दिया है। योगासनों के बीच में मकरासन की सलाह दी जाती है। इन्हीं मगर के ऊपर एक बड़ा काखानक इनकी कठोर त्वचा के बीच बने खांचों में फंसे छोटे जीवों खाकर पेट भरने में लगा दिखाई दिया। सभी प्राणी सूरज निकलते ही भोजन करने लगते हैं। प्रसिद्ध विद्वान वागभट्ट ने भी बेहतर स्वास्थ्य के लिए सूर्य निकलने के तीन घंटे में भोजन करने की सलाह दी है, पर आज के इस दौर में लोग प्राचीन आचार्यों की सलाह मानते कहां है।

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दूर से देखने से ऐसा लगता है जैसे चश्मा पहन रखा हो

बड़ा काखानक या महान पाषाण- प्लॉवर को अंग्रेजी में इसेकस मैग्नीरास्ट्रस या ग्रेटर थिक नी भी कहा जाता है। इसका आकार घरेलू मुर्गी के समान होता है। यह ऊपर रेत के मानिंद भूरा और नीचे सफेद होता है। दूर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे इसने चश्मा पहन रखा हो। बड़ी- बड़ी पीली आंखें बहुत सुंदर लगती है। नर मादा एक जैसे दिखने के कारण पहचान करना कठिन होता है।

साफ नदियों के किनारे करता है विचरण

बड़ा काखानक पूरे भारतीय उप महाद्वीप में पाया जाता है। कभी- कभी खारे पानी की झीलों के किनारे भी दिखता है। यह तेज धावक पक्षी है जो आवश्यकता होने पर बतख की तरह पानी के ऊपर तैर भी सकता है। भोजन में इसे केकड़े बहुत पसंद है और इसकी चोंच भी इसके लिए उपयुक्त होती है। यह पत्थरों के बीच में से न केवल केकड़े बल्कि अन्य छोटे जलीय प्राणियों सरलता से निकाल लेती है।

नर- मादा दोनों करते हैं बच्चों की परवरिश

बड़ा काखानक मादा फरवरी से जून जुलाई तक रेत के खुले भाग में अंडे देती है। नर- मादा मिलकर अपने बच्चों की परवरिश करते हंै। अभी जयपुर में सांभर झील में मरे हुए हजारों प्रवासी पक्षियों के साथ ग्रेटर थिक नी के शव भी बहुत बडी संख्या में मिले है। अनुमान है कि मछलियों के ठेकेदार बोतल में बारूद भरकर विस्फोट करके पक्षियों को झीलों से दूर कर देते है इसी इंसानी दरिंदगी से हजारों प्रवासी पक्षियों की मौत हो गई।

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