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बिना सूचना के मीटिंग में गए डॉक्टर अस्पताल में दवासाज ने मरीजों को देखा

Bhind News - मरीजों को ओपीडी में नहीं मिले डाॅक्टर तो जताई नाराजगी, फार्मासिस्ट को देखना पड़ा रविवार के अवकाश को देखते हुए...

Feb 02, 2020, 08:56 AM IST
Ron News - mp news the doctor went to the meeting without notice the dispenser saw the patients in the hospital

मरीजों को ओपीडी में नहीं मिले डाॅक्टर तो जताई नाराजगी, फार्मासिस्ट को देखना पड़ा

रविवार के अवकाश को देखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रौन में शनिवार को दूर ग्रामीण इलाकों से आए मरीज बड़ी संख्या में इलाज लेने पहुंचे। मगर ओपीडी में डॉक्टर नहीं मिले। स्टाफ से पूछने पर पता चला कि बीएमओ सहित तीनों डॉक्टर जिला मुख्यालय पर स्वास्थ्य विभाग की मीटिंग में गए हैं। मरीजों को यह सूचना ही नहीं थी कि डॉक्टरों की आज मीटिंग है और न हीं अस्पताल प्रबंधन की तरफ से किसी प्रकार का सूचना पटल मेन गेट पर लगाया गया था। जिसकी वजह से सुबह से दोपहर 2 बजे तक इंतजार करने के बाद सैकड़ों मरीजों को बेइलाज ही अपने घर लौटना पड़ा।

फार्मासिस्ट ने देखी नब्ज: डॉक्टरों की अनुपस्थिति में मरीजों ने पर्चे बनवा लिए थे। जब मरीजों ने इसका विरोध किया कि डॉक्टर नहीं हैं तो पर्चे क्यों बनाए जा रहे हैं तब फार्मासिस्ट केडी गौड़ ने मरीजों की नब्ज देखकर उन्हें दवा दी। इस तरह लोगों का उपचार करने से कई बार गंभीर परिणाम सामने आते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के मरीजों को उपचार दिया गया। बता दें कि अस्पताल में बीएमओ डाॅ आर बिमलेश, डॉ विजयपाल उतगेरकर, डॉ अंकित चौधरी को नियुक्त किया गया है। रौन कस्बा के 40 गांवों से मरीज सरकारी इलाज के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। शनिवार को सर्दी, खांसी, पेट दर्द, वायरल और बुखार से पीड़ित लोग दवा लेने पहुंचे तो ओपीडी खाली थी। इसके बाद कई मरीजों ने प्राइवेट क्लीनिकों पर दवा ली।

ग्वालियर से करते हैं अपडाउन: सामुदायिक अस्पताल में पदस्थ तीनों डॉक्टर और स्टाफ ग्वालियर से अपडाउन करता है। प्रतिदिन ओपीडी में एक ही डाॅक्टर टिकता है। जबकि तीन डॉक्टर में से एक की ड्यूटी नाइट में रहती है। वहीं दिन के दोनों डॉक्टरों में केवल एक ही डॉक्टर ओपीडी में बैठता है, जबकि दोपहर की इमरजेंसी में डॉक्टर नहीं रहता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इस लापरवाही के लिए कई बार अवगत कराया गया है। पूर्व में अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर काफी हंगामा भी हुआ है मगर विभागीय अधिकारियों की नरमी के कारण स्टाफ मनमर्जी करता है।


डॉक्टर मीटिंग में हैं, पहुंच रहे हैं

अस्पताल से यह मरीज बिना इलाज लौटे

कक्षपुरा निवासी लक्ष्मी प|ी रमेश सिंह सुबह दस बजे नसबंदी के लिए जांच कराने अस्पताल पहुंची थीं। लेकिन अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं मिला। दोपहर दो बजे तक इंतजार करती रहीं उसके बाद घर लौट गईं। वहीं रौन निवासी आशाराम सिंह पुत्र रामबिहारी अपनी आंखें दिखाने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि तीन दिन से लगातार आ रहे हैं पर आंखों की जांच नहीं हो पा रही है। दशरथ पुत्र ठकुरी प्रसाद कुशवाह को सुबह कुत्ते ने काट लिया था। इसके बाद वह रैबीज का इंजेक्शन लगवाने अस्पताल गए पर डॉक्टर की गैर मौजूदगी में वापस लौटना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों से आए कई मरीजों को परेशानी हुई।

मछंड में एक साल से डाॅक्टर नहीं

मछंड अस्पताल में पिछले एक साल से डॉक्टर नहीं है। डॉ विकास दुबे इन दिनों पीजी का कोर्स करने के लिए जबलपुर गए हैं। ऐसे में अस्पताल कंपाउंडरों के भरोसे चल रहा है। 32 गांवों के लोग अस्पताल में इलाज लेने पहुंचते हैं तो उन्हें बिना उपचार के ही वापस लौटना पड़ता है। प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। मरीजों को हो रही परेशानी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने यहां ध्यान नहीं दिया है। निजी क्लीनिकों पर इलाज लेने वाले लोगों की जेब काटी जा रही है। खास बात यह है कि विभाग ने अस्पताल में डॉक्टर की व्यवस्था नहीं की है। जिससे मरीजों को सरकारी उपचार मिल सके।

डॉक्टर की अनुपस्थिति में मरीजों को दवा लिखता फार्मासिस्ट।

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