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राऊपुरा में मुक्तिधाम की जमीन पर दबंगों का कब्जा
गोरमी नगर से पांच किलोमीटर दूर ढाई हजार की आबादी समेटे राऊपुरा गांव में मुक्तिधाम तो है लेकिन गांव के कुछ दबंग लोगों का उस पर अवैध कब्जा होने से शोकाकुल परिवार को गांव के मुख्य मार्ग के किनारे या फिर अपने घर के सामने दाह संस्कार करना पड़ रहा है। इस संबंध में ग्रामीण लोगों तत्कालीन कलेक्टर इलैया राजा टी से शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन इलैया राजा टी के स्थानातंरण होने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चले जाने से अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
तीन साल पहले शासन की ओर से राऊपुरा में मुक्तिधाम के लिए 18 बिसे (एक बीघा के करीब) शासकीय जगह दी गई थी। 10 साल तक इस मुक्तिधाम की जमीन पर शोकाकुल परिवारों के द्वारा अंतिम संस्कार किया जाता था। लेकिन गांव के कुछ दबंग लोगों ने जमीन पर जबरन अवैध कब्जा करते हुए उस पर फसल उगाना शुरू कर दिया। इस दौरान कुछ शोकाकुल परिवारों ने जमीन पर अपने परिजन का दाह संस्कार करने का प्रयास किया तो दबंगों द्वारा उनको अंतिम संस्कार नहीं करने दिया गया।
सड़क पर किया था अपने पिता का अंतिम संस्कार: राऊपुरा निवासी ग्रामीण गिर्राज सिंह गुर्जर ने बताया कि गांव के मुक्तिधाम की जमीन पर दबंगों का अवैध कब्जा होने से मुझे आठ माह पहले अपने पिता का अंतिम संस्कार गांव के मुख्य मार्ग पर करना पड़ा था। इसी क्रम में मुन्ना वाल्मीकि ने बताया कि मुक्तिधाम पर कब्जा होने से मुझे अपने भतीजे का दाह संस्कार मजबूरी में घर के आगे खेत में करना पड़ा था। गिर्राज सिंह गुर्जर का कहना है कि इस संबंध में ग्रामीणों ने तत्कालीन कलेक्टर इलैया राजा टी को अवगत कराया था। लेकिन उनका स्थानांतरण होने से दबंगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकी।
बारिश के सीजन में होती है परेशानी : ग्रामीणों का कहना है कि गांव में मुक्तिधाम नहीं होने से हम लोग 10 वर्ष से सड़क और खेतों में दाह संस्कार करते आ रहे हैं। बारिश के सीजन में दाह संस्कार के दौरान अगर बारिश होती है तो हम लोगों को टीनशेड लगाकर या फिर पॉलीथिन लगाकर परिजन का अंतिम संस्कार करना पड़ता है।
मुझे मामले की जानकारी नहीं है वहीं इस संबंध में शिवदत्त कटारे, तहसीलदार, गोरमी का कहना है कि राऊपुरा के मुक्तिधाम पर दबंगों का अवैध कब्जा है इस मामले की मुझे जानकारी नहीं है, अगर ऐसा है तो मैं पटवारी को भेजकर जमीन का सीमांकन कराऊंगा।
राऊपुरा में मुक्तिधाम की जमीन पर दबंगों द्वारा की जा रही खेती।