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बेमौसम बारिश से गेहूं की फसल प्रभावित, किसान बोले- दाना कमजोर होने से घट जाएगा उत्पादन
विगत दिनों लगातार हुई बारिश और ओला वृष्टि ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। हालत यह है कि इन दिनों खेतों में फसलें पक कर कटने के लिए तैयार खड़ी हैं, ऐसे में बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जहां किसान फसलों को बचाने का उपाय कर रहे हैं तो वहीं बारिश रोकने के लिए मंदिरों में प्रार्थना कर रहे हैं। मौसम विभाग ने 12 मार्च तक बारिश का अलर्ट जारी किया है। ओलावृष्टि से बची गेहूं, चना और जौ की फसल तेज हवा के साथ भारी बारिश की वजह से कमजोर हो गई है। किसानों का कहना है कि दाना कमजोर होने से उत्पादन घट जाएगा साथ ही फसल का उचित दाम नहीं मिलेगा।
किसानों ने बताया कि यदि मौसम ऐसा ही रहा तो फसलों की दाने की क्वालिटी गिर जाएगी और कटने के बाद उसे बेचने पर किसानों को दाम भी कम मिलेगा जिससे किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। सरकार ने जहां पिछले वर्ष की भावांतर और बोनस की राशि अभी तक नहीं मिली है। जिससे पहले से ही किसानों में मायूसी छाई हुई है। ऊपर से बारिश किसानों को परेशान कर रही है। फसलों को हवा से बचाने किसानों ने खेतों के चारों तरफ साडियां बांधना शुरू कर दिया है। मौसम बारिश ने किसानों के होली के त्योहार को भी फीका कर दिया। क्षेत्र में होने वाली बारिश एवं कहीं-कहीं ओलावृष्टि से गेहूं चना, तुअर जैसी रबी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
20 दिन बाद पकेगी गेहूं की फसल: बता दें कि गोरमी, गोहद और अटेर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में रबी की फसलें कुछ पक कर तैयार हो चुकी हैं तो कुछ पकने वाली हैं, ऐसे में जो फसलें पक चुकी हैं और कहीं-कहीं तो गेहूं और जौ की फसलें कटकर खेतों में रख चुकी हैं। ऐसे में यदि तेज बारिश हो जाती है तो कटी हुई फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। करीब 1 सप्ताह से पढ़ने वाली गर्मी के साथ अब तेज हवा का दौर चालू हो गया है। किसानों का मानना है कि गेहूं की फसल को पकने में अभी 20 दिन का समय लग जाएगा।
अब पीड़ित किसानों को मुआवजा की उम्मीद
ग्रामीण इलाकों में ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों की आस अब नुकसान के मुआवजे पर टिक गई है। किसानों का मानना है कि जितना नुकसान हुआ है उसका कुछ सहयोग भी मिल जाए तो बोझ नहीं होगा। हालांकि जिन किसानों के खेतों में गेहूं की फसल सुरक्षित बची है उनमें भी उत्पादन घट जाएगा। बेमौसम बारिश की वजह से किसानों की सब्जी की फसल को फायदा पहुंचा है। जिन किसानों ने प्याज आलू, टमाटर, धनिया, फूल गोभी, पत्ता गोभी, मटर की फसल लगाई हुई है, वहां अगर ओलावृष्टि हुई है तो फसल को नुकसान पहुंचा है। साथ ही सबसे ज्यादा नुकसान तिलहन, दलहन के साथ ही अन्य फसलों में नुकसान हुआ है।
बेमौसम बारिश से पौधों की ग्रोथ रुक जाती है
अकलौनी के किसान श्यामसुंदर सिंह भदौरिया ने बताया कि बेमौसम बरसात से किसानों को बड़ा नुकसान पहुंचा है। क्योंकि बारिश के साथ तेज हवा चल रही है। जिसके कारण गेहूं की खड़ी फसल गिर जाती है। जिसके बाद पौधे की ग्रोथ वहीं खत्म हो जाती है और फसल का एवरेज गड़बड़ा जाता है। कुछ क्षेत्र में ओला छोटे आकार में पड़ा था जो पानी के साथ जल्दी घुल गया, मगर बेर के आकार के ओलों से सरसों की फसल पूरी तरह से तबाह हो गई है। वहीं दूसरी ओर खेतों में थ्रेसिंग के लिए कटी पड़ी फसलें भी काफी खराब होने की संभावना है। यही नहीं बाजारों में बिकने वाले गेहूं के दामों में भी कमी हो सकती है। इससे आम आदमी की जेब पर भी खास असर पड़ सकता है क्योंकि सीमित आय वाले मध्यमवर्गीय लोगों का घरेलू बजट खराब हो सकता है।
अटेर के मुकुटपुरा में बारिश से प्रभावित फसल को दिखाते किसान।