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रेलवे क्रॉसिंग पर बने अंडर ब्रिज में भरा पानी, 15 गांवों का रास्ता बंद, ट्रैक से निकल रहे लोग

एक वर्ष पहले
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रेलवे ट्रैक से निकलने पर रहता है खतरा

मेहगांव क्षेत्र में रेलवे प्रशासन द्वारा क्रॉसिंग पर निकलने के लिए बनाए गए अंडर ब्रिज नहर और सिंचाई के दौरान खेतों से निकले पानी से लबालब हो गए हैं। पिछले 20 दिन से ग्रामीण रास्ता बदलकर रेलवे ट्रैक के ऊपर से अपने वाहनों को निकाल रहे हैं। अंडर ब्रिजों में 4 फीट तक पानी भर गया है जिसकी निकासी को लेकर रेलवे प्रशासन द्वारा पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। बहरहाल गोहद से गोरमी के बीच पड़ने वाले पंद्रह गांव के मुसाफिरों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।

यहां बता दें कि चारों ही अंडर ब्रिजों में नहरों से सिंचाई के दौरान पानी भर गया है। बारिश के दिनों में चार महीने तक पुल के नीचे से ग्रामीणों का रास्ता बंद था, लेकिन अब निकासी के अभाव में नहरों से पानी भर गया है। इस परेशानी के जिम्मेदार लोग किसानों को भी ठहरा रहे हैं क्योंकि जरपुरा झाल के ब्रिज को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश खेतों में सिंचाई के दौरान निकले पानी से भर दिए गए हैं। हालांकि स्टेशन मास्टर से शिकायत के बाद कुछ पुलों को खाली कराने की कवायद की जा रही है लेकिन पानी की निकासी के इंतजाम न होने के कारण स्थिति फिर यथावत निर्मित हो रही है।

फिसलकर गिर रहे वाहन चालक

पानी से लबालब अंडर ब्रिजों से होकर निकल रहे वाहन चालक फिसलकर दुर्घटना ग्रस्त हो रहे हैं। ज्यादातर बाइक सवार जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक से होकर निकलते हैं। इस दौरान अगर ट्रेन निकल जाए तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है। जबकि सबसे अधिक समस्या चार पहिया वाहन चालकों को हो रही है। स्थानीय रहवासी सतीश थापक, संजू पाराशर, भानू प्रताप सिंह, कौशल तिवारी आदि लोगों ने कहा है कि जब से अंडर पुल बनाए गए हैं तभी से आवाजाही प्रभावित हो रही है। शिकायत करने पर विभाग के अधिकारी पुल से पानी निकलवा देते हैं लेकिन दोबारा बारिश होने पर परेशानी बढ़ जाती है। समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने के कारण ग्राम वासियों को अपने वाहनों को दूसरे रास्तों से होकर गुजारना पड़ता है। इन सभी के बावजूद प्रशासन के जिम्मेदार लोग गंभीर नहीं हैं।

15 गांवों का रास्ता बंद

क्षेत्र के सोंधा, डोंरी, जरपुरा झाल और असोखर के ब्रिजों में पानी भर गया है। सोंधा ब्रिज से होकर सोंधा, चंद्रपुरा, अरेले का पुरा, मानपुरा, केंथपुरा, माता का पुरा, हीरापुरा हेट आदि गांवों के लोग आवागमन करते हैं। वर्तमान में सभी ग्रामीणों के वाहन पुल के नीचे से फंस रहे हैं। पानी भर जाने के बाद गोरमी से गोहद के लिए आवाजाही करने वाले वाहन चालकों को अब रास्ता बदलकर जाना पड़ रहा है। ब्रिज के अंदर 4 से 5 फीट तक पानी भर गया जिससे दोपहिया वाहन रेलवे ट्रैक से होकर निकल रहे हैं। जबकि चार पहिया वाहन बमुश्किल निकल पाते हैं।

रेलवे ने नहीं किए प्रयास

ग्रामीणों ने कई बार इस परेशानी को लेकर उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन के अधिकारियों को अवगत कराया है लेकिन उन्होंने समस्या को जड़ से खत्म करने के प्रयास नहीं किए हैं। गांव के रामौतार थापक का कहना है कि बनाए गए अंडर ब्रिजों में निकासी के लिए कोई रास्ता बना दिया जाए तो यह परेशानी हमेशा के लिए दूर हो जाएगी। जब भी बारिश होती है तो ग्रामीणों का रास्ता महीनों तक बंद रहता है। यह दिक्कत किसी एक ब्रिज की नहीं है बल्कि फूप से लेकर मालनपुर तक दर्जनों रेलवे क्रॉसिंगों पर बनाए गए पुलों पर हो रही है।

सोंधा रेलवे क्रॉसिंग के अंडर ब्रिज से निकलते वाहन चालक ।

सोंधा रेलवे क्रॉसिंग से निकलते वाहन चालक ।
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