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मौसम बिगड़ने से चिंतित किसान सर्वे का इंतजार छोड़ खेतों में फसल काटने में जुटे
किसानों को डर यह भी फसल काटने के बाद कैसे होगा सर्वे
गोरमी क्षेत्र में 7 मार्च को हुई अतिवृष्टि से प्रभावित फसल के लिए प्रशासन ने क्षेत्रों में राजस्व एवं कृषि विभाग के कर्मचारियों के सर्वे दल गठित किए हैं, लेकिन गांवों में पटवारी नहीं पहुंच रहे हैं। शनिवार की सुबह फिर से मौसम खराब हुआ तो किसान सर्वे का इंतजार छोड़ खेतों में शेष फसल को काटने में जुट गए हैं। किसी ने मजदूरों से तो अधिकांश किसान हार्वेस्टर से फसल काटकर घर लाना चाहते हैं। ऐसे में किसानों की एक और चिंता सता रही है कि फसल कटने के बाद प्रभावित फसल का सर्वे ठीक से हो पाएगा या नहीं। हालांकि इस संबंध में मेहगांव एसडीएम गणेश जायसवाल से बात की तो उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया है। सौ फीसदी किसानों का सर्वे कर मुआवजा दिया जाएगा।
यहां बता दें कि बारिश के बाद खेत अभी तक गीले हैं। नमी के कारण किसान सरसों की फसल नहीं काट पा रहे हैं। जो किसान नमीयुक्त खेतों में खड़ी फसल काटकर जमीन पर रखते हैं उनकी फसल खराब हो रही है। ऐसे में किसानों के सामने दोहरा संकट मंडराने लगा है। अगर खेत सूखने का इंतजार करते हैं तो खराब मौसम की मार फिर से पड़ सकती है। साथ ही तेज धूप निकलती है तो बची हुई सरसों झड़ जाएगी। किसानों को अब केवल शुष्क मौसम से उम्मीद है। दो से चार दिन हल्की धूप पड़ जाए तो किसान फसल काट लेंगे।
दोहरी मार... पहले बाढ़ से बर्बाद हुई फसल, अब ओलो ने पानी फेरा
अटेर क्षेत्र के किसानों विशेषकर चंबल नदी के आसपास बसे गांवों के ग्रामीणों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। पहले किसानों की सितंबर माह में बाढ़ के कारण खरीफ की फसल तबाह हो गई अब रबी की फसल भी ओलों से बर्बाद हो गई है। क्षेत्र के नावली वृंदावन, खैराहट, मुकुटपुरा, कक्षपुरा, चौम्हो, रमा, कोट आदि गांवों में किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। क्षेत्र की बात करें तो 60 से 90 फीसदी फसलों में नुकसान है। इस संबंध में कुछ किसानों ने एसडीएम से फसल के सही सर्वे न करने को लेकर शिकायत भी की है। किसानों को केवल एक ही चिंता सता रही है कि इस बार मुआवजा हीं मिला तो बच्चों का भरण पोषण कैसे करेंगे
इधर रौन में हवन में आहुति देकर आसमानी संकट टालने का प्रयास
पहले ही बर्बाद हुई फसल, अब ओले पड़े तो खाने को भी कुछ नहीं बचेगा
भास्कर संवाददाता | रौन
लगातार मौसम की मार झेल रहे किसान अब आसमानी संकट से बचने के लिए भगवान का जतन करने लगे हैं। शनिवार को एक बार फिर से मौसम खराब हुआ तो किसान हवनकुंड पर बैठकर आहुति देने लगे। रैमजा गांव के किसानों ने ओलावृष्टि एवं बारिश को टालने के लिए अखंड रामायण का पाठ किया। रामायण के समापन पर सभी ग्राम वासियों ने हवन कर इंद्र भगवान से प्रार्थना की कि खेतों में खड़ी फसल पहले से ही बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है। ऐसे में दोबारा अगर आसमानी संकट आता है तो किसान पूरी तरह से त्रस्त हो जाएगा। किसानों ने भगवान से प्रार्थना करते हुए कहा कि साल भर की मेहनत खेतों में लहलहा रही है। अगर फसल ही नष्ट हो जाएगी तो बच्चों को क्या खिलाएंगे। यहां बता दें कि रौन क्षेत्र के कुछ गांवों में भी ओलावृष्टि हुई थी लेकिन अन्य क्षेत्रों की तरह इतना नुकसान नहीं है। इसलिए किसान जतन कर रहे हैं कि बारिश या ओलों का संकट टल जाए और खेतों में पकी खड़ी फसल सुरक्षित घर वापस पहुंच जाए।
किसान चिंता नहीं करें, 100% सर्वे होगा
गणेश जायसवाल, एसडीएम, मेहगांव
किसानों ने बाकी काम छोड़े
किसानों ने बाकी सभी काम छोड़कर खेतों में ओलों से थोड़ी बहुत बची सरसों की फसल को काटना शुरू कर दिया है। जिन किसानों को मजदूर नहीं मिल रहे हैं वह मशीनों से काट रहे हैं। किसानों का मानना है कि सरकार से पता नहीं कितना मुआवजा दिया जाएगा। लेकिन ओलावृष्टि के बाद खेतों में जो फसल बच गई है उसे काटकर कुछ भरपाई कर ही सकते हैं। हालांकि सात दिन में फसल पूरी तरह से पककर तैयार हाे गई है। ऐसे में किसान चाहते हैं कि फसल भी काट लें और जो नुकसान हुआ है उसका मुआवजा भी शासन से मिल जाए तो साल भर की मेहनत का कुछ मिल सकता है। इन परिस्थितियों में प्रशासन के सर्वे दल भी गांवों में पहुंच रहे हैं परंतु किसानों को चिंता है कि कहीं वे छूट न जाएं।
सरसों व गेहूं को 90 फीसदी नुकसान
गोरमी क्षेत्र के अकलौनी, राऊपुरा, दौनियापुरा, सुकांड, प्रतापपुरा, नुन्हाड़, मेघपुरा, परोसा, अरेले का पुरा आदि गांवों में 90 फीसदी से अधिक सरसों की फसल में ओलावृष्टि का प्रभाव है। इसी तरह इन गांवों में गेहूं की फसल भी चौपट हो गई है। जिन खेतों में हरी सरसों थी उसकी डालियां टूट गई हैं जबकि पकी सरसों खेतों में ही झड़ गई है। किसानों की उम्मीदें अब प्रशासन से टिक गई हैं। अकलौनी के किसान श्यामसुंदर सिंह भदौरिया ने बताया कि कटता पर खेती लेकर फसल बोई थी। एक बीघा खेत की सरसों काट पाई थी कि ओलों ने सब बर्बाद कर दिया। राऊपुरा निवासी गिर्राज सिंह ने कहा कि पूरी फसल नष्ट हो गई है। अगर शासन से मुआवजा राशि नहीं मिली तो साल भर खाने के लाले पड़ सकते हैं।
रैमजा में हवन करते किसान ।
अकलौनी मेेेंेंें किसान हार्वेस्टर से काट रहे सरसों की फसल ।