मोटापे से जूझ रहे 12 साल के बच्चे को बैरियाट्रिक सर्जरी से मिली नई जिंदगी

3 वर्ष पहले
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  •  बैरियाट्रिक सर्जन डॉ. भंडारी ने पेट की थैली को किया छोटा

भोपाल/इंदौर . आगरा के एक छोटे से गांव में रहने वाला 12 वर्षीय बच्चा अनुराग छोटी उम्र से ही मोटापे से पीड़ित था। बीमारी इतनी विकराल हो गई कि उसे सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी और वेंटीलेटर का सहारा लेना पड़ा। कुशाग्र बुद्धि के अनुराग को पढ़ाई से भी समझौता करना पड़ा।

 

हाईपोथायरॉइडिज्म की समस्या ने भी घेर लिया।  माता-पिता जानते थे कि बच्चे को मोटापे से बेहद तकलीफ हो रही है। आर्थिक हालातों ने भी उन्हें बेबस कर दिया, लेकिन एक दिन ऐसा आया जब उन्हें लगा कि अब उनके बच्चे को नई जिंदगी मिल सकती है। 


    इंदौर के मोहक बैरियाट्रिक एवं रोबोटिक्स सेंटर के डॉ. मोहित भंडारी देश-विदेश में बैरियाट्रिक सर्जरी कर लोगों को मोटापे से निजात दिला रहे हैं। वे देशभर में जागरूकता शिविर भी लगाते हैं। इसी क्रम में उन्होंने आगरा में कैंप लगाया था। संयोग से अनुराग के पिता नरेश कुमार ने अखबार में पढ़ा और बच्चे को कैंप में लेकर पहुंचे। वहां चेकअप कर डॉ. भंडारी ने बच्चे की तुरंत सर्जरी करने की सलाह दी। 4 मार्च को इंदौर में अनुराग की सफल बैरियाट्रिक सर्जरी हुई। डॉ. भंडारी ने बताया कि बच्चे का लिवर बहुत बड़ा हो गया था, जो कि सिरोसिस की स्टेज पर पहुंच चुका था।

 

अब 1 महीने बाद अनुराग को हाईड्रोथैरेपी दी जाएगी। वजन की वजह से टेढ़े हो चुके पैरों को ठीक करने के लिए कैलीपर्स लगाए जाएंगे। बच्चों में मोटापा यानि ओबेसिटी तेजी से बढ़ रही है। 6 से 16 साल के 10 से 15 फीसदी बच्चे इससे ग्रसित हैं। मोटापे की वजह से अन्य बीमारियां जैसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन, डिप्रेशन इत्यादि के लक्षण सामने आ रहे हैं। बीमारियां बढ़ने से बच्चा बिस्तर पकड़ लेता है। डॉ. मोहित बताते हैं कि चाइल्डहुड ओबेसिटी के इलाज में ज्यादा देर करने से प्रोटीन, विटामिन और हार्मोन से संबंधित विकार भी उत्पन्न हो जाते हैं। बाद में उम्र बढ़ने से तकलीफ और भी बढ़ जाती है। हाल ही में की गई रिसर्च बताती है कि बच्चों में अंगों की ग्रोथ सामान्य आदमी जैसी हो गई है, इसीलिए उन्हें बड़ों जैसी बीमारियां लग रही हैं।