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भोपाल: महज ‌‌3 लाख रुपए के लिए कर दिए 14 कत्ल, चेहरे पर शिकन तक नहीं

ट्रक ड्राइवर और कंडक्टर्स का कत्ल करने वाले आदेश खामरा के हिस्से में हर वारदात के बाद महज 40-50 हजार रुपए ही आते थे

Danik Bhaskar | Sep 08, 2018, 04:33 AM IST
पुलिस गिरफ्त में आरोपी पुलिस गिरफ्त में आरोपी

भोपाल. ट्रक ड्राइवर और कंडक्टर्स का कत्ल करने वाले आदेश खामरा के हिस्से में हर वारदात के बाद महज 40-50 हजार रुपए ही आते थे। इतनी ही रकम उसके साथी जयकरण को भी मिलती थी। अब तक हुए खुलासे में पुलिस को पता चला है कि 14 कत्ल करने के बाद आदेश और जयकरण को महज तीन-तीन लाख रुपए ही मिल सके थे। बिलखिरिया थाने में पूछताछ के दौरान जब एक सिपाही ने आदेश को घूरा तो वह बोला- घूर मत मुझको, मैं कोई जेबकतरा नहीं हूं। तुम लोग मुझे को-ऑपरेट करोगे तो ही मैं करूंगा।

बता दें कि भोपाल पुलिस ने ट्रक लूटने के बाद ड्राइवर और क्लीनर की हत्या करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। 3 लोगों का ये गिरोह 14 हत्याएं कर चुका है। गिरोह मध्य प्रदेश के बाहर दूसरे राज्यों में भी सक्रिय था। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इन्होंने अब तक 12 घटनाओं में 14 हत्याएं और लूट का खुलासा किया है।


अंतरराज्यीय हत्यारे के पकड़े जाने की सूचना मिलते ही पुलिस के पास दूसरे राज्यों की पुलिस ने भी संपर्क शुरू कर दिया है। राजनांदगांव और रायपुर से पुलिस को फोन आए हैं कि उनके थाना क्षेत्रों में भी ठीक इसी अंदाज में ट्रक ड्राइवर-कंडक्टर की हत्याएं हुई हैं। फिलहाल तीनों आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं। एसपी साउथ राहुल लोढा के मुताबिक आरोपियों से पूछताछ में और भी कई वारदातों का खुलासा होगा। आदेश की पत्नी मंडीदीप से वर्ष 2016 में पार्षद चुनाव लड़ने की तैयारी में थी।

गुना रूट से जाते थे उप्र, जिसमें टोल नाका न हो: आरोपी बिलखिरिया और पुणे में वारदात के बाद ट्रक लेकर सिरोंज होकर गुजरे। यहां से गुना, अशोक नगर, भितरवार होकर उप्र पहुंच जाते थे। इन्हें दूसरे प्रदेशों के भी ऐसे रास्ते पता हैं, जिन पर टोल नाके नहीं पड़ते। यदि कोई टोल नाका नजर आ भी जाए तो वह रास्ता बदलकर वे गांव की सड़क पकड़ लेते थे। ऐसा केवल इसलिए ताकि टोल नाके के सीसीटीवी कैमरे में ट्रक नंबर या उनके चेहरे न आ जाएं।

बड़ी कंपनी के ट्रक की थी डिमांड: जयकरण और आदेश केवल उन्हीं ट्रक ड्राइवर्स को निशाना बनाते थे, जो एक नामी वाहन निर्माता कंपनी का ट्रक चला रहे हों। इनमें भी वे केवल 12 या 14 चक्का ट्रक को ही चुनते थे। ऐसे ट्रकों की रीसेल वैल्यू ज्यादा रहती थी। पुलिस को ग्वालियर निवासी उस दलाल की तलाश है, जो ट्रक उप्र और बिहार में बिकवाने का काम करता था। वही ट्रक में भरा माल भी औने-पौने दाम में बिकवा देता था।

कर दी एक गलती और पकड़े गए : पुणे से भोपाल आए 25 टन शक्कर से भरे ट्रक को भी आदेश और जयकरण ही ले गए थे। हालांकि, वे इसके ड्राइवर को मारते इससे पहले ही उन्हें पुलिस ने पकड़ लिया। ये ट्रक मिसरोद निवासी मनोज शर्मा का था। मनोज ने ट्रक का नंबर टोल नाकों पर रजिस्टर्ड करवाया था। जब भी ट्रक किसी भी टोल नाके से गुजरता था तो एक मैसेज उनके मोबाइल फोन पर आता था। इससे ही उन्हें अपने ट्रक की आखिरी लोकेशन कानपुर के पास मिली थी। इसी को फॉलो करते हुए पुलिस ने जयकरण को पकड़ा था।

डीजीपी ने की तारीफ, टीम को मिलेगा इनाम: इस गैंग को पकड़ने के लिए एसपी साउथ ने सात सदस्यीय टीम बनाई थी। इसमें एएसपी दिनेश कौशल, सीएसपी बिट्टू शर्मा, टीआई एलएस ठाकुर, संजीव चौकसे, हवलदार सचिन बेडरे, सिपाही दिवेश मालवीय और अरुण कुमार शामिल थे। डीजीपी ऋषिकुमार शुक्ला ने इस टीम को इनाम देने की घोषणा भी की है।