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घरवालों से गुस्सा होकर एक सूने मकान में 2 दिन से छिपी थी 14 साल की बच्ची, भूख-प्यास और ठंड के चलते नीले पड़ने लगे थे होंठ, अलमारी में रख था खत, लिखा था- दादा-दादी हर बात में टोकते हैं...ढूंढने की कोशिश की तो खुदकुशी कर लूंगी

बच्ची ने चिट्टी में लिखा था- में अपने पापा को बहुत प्यार करती हूं...

Dainik Bhaskar

Dec 02, 2018, 05:24 PM IST

भोपाल साकेत नगर से गुरुवार दोपहर लापता हुई आठवीं की छात्रा शनिवार की सुबह अपने घर से करीब 50 मीटर दूर एक सूने मकान में मिली। यहां बच्ची ठंड में दो रात तक भूखी-प्यासी ही रही। भूख-प्यास और ठंड के कारण उसके हाेंठ नीले पड़ने लगे थे। बच्ची अपने माता-पिता के अलग होने और दादा-दादी की रोक-टोक से डिप्रेशन में थी। इसलिए उसने घर छोड़ा था। पुलिस ने शुक्रवार को उसकी अलमारी से एक पत्र भी बरामद किया है जिसमें उसने लिखा है कि दादा-दादी, चाचा-चाची उसके साथ मारपीट करते हैं। उसे दोस्तों से बात नहीं करने देते और हर बात में टोका-टाकी करते हैं। इसलिए वह घर छोड़कर जा रही है। उसे तलाशने की कोशिश की तो वह खुदकुशी कर लेगी। पत्र में यह भी लिखा है कि वह अपने पापा को बहुत प्यार करती है। पुलिस ने कोर्ट में बच्ची के 164 के तहत बयान दर्ज कराने के बाद उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।

पुलिस के मुताबिक गुरुवार को स्कूल गई 14 साल की बच्ची दोपहर बाद भी घर नहीं लौटी थी। परिजनों की शिकायत पर अपहरण का मामला दर्ज किया गया था। बच्ची जिन दोस्तों से मोबाइल पर लंबी बात करती थी, उनसे भी पूछताछ की गई थी। सभी नाबालिग बच्चे अपने-अपने घर में थे। शुक्रवार को बच्ची की अलमारी से एक पत्र मिलने से साफ हो गया था कि उसका अपहरण नहीं हुआ है, बल्कि वह अपनी मर्जी से घर छोड़कर गई है। पुलिस ने पत्र बरामद कर लिया है। शनिवार की दोपहर कोर्ट में अपने बयान में बच्ची ने पत्र में लिखी बातें दोहराई हैं। उसने घर जाने की इच्छा जाहिर की थी। इसके बाद उसे दादा-दादी और पिता के पास छोड़ दिया है।


इस घर में मिली : भूख-प्यास और ठंड के चलते नीले पड़ने लगे थे होंठ
संजीव गुप्ता के मकान के बगल में रहने वाली महिला के दो दिन से कपड़े गायब हो रहे थे। शनिवार की सुबह करीब आठ बजे कपड़े तलाश रहीं थी तभी वहां स्कूली बैग पड़ा दिखा। बच्ची के लापता होने की खबर पूरे साकेत नगर में थी, इसलिए बैग बच्ची का होने के संदेह में उन्होंने पुलिस को सूचना दे दी। जब पुलिस मकान नंबर 104-2बी साकेत नगर पहुंची तो वहां मेनगेट पर ताला और अंदर शटर लगा हुआ था। पुलिस ने बैग खोलकर देखा तो वह लापता बच्ची का था। पुलिस बैग लेकर जाने लगी तभी एक मकान की छत पर खड़ी महिला को मकान के पीछे परछाई सी दिखी। उन्होंने बिना देर किए बच्ची का नाम लेकर आवाज लगा दी। अपना नाम सुनते ही बच्ची पलटकर बाहर निकल आई। महिला ने पुलिस को रोका और बताया कि बच्ची इसी मकान में है।


पत्र में बताई अपनी पीड़ा
दादा-दादी, चाचा-चाची उसे डांटते हैं। छोटी-छोटी बातों पर ताना देते हैं। मां के पास जाने को कहते हैं। मां मायके में हैं और पिता के बीमार होने से वह अकेला महसूस करती है। दुख किसी से शेयर नहीं कर पाती थी। इसके चलते वह घर छोड़कर जा रही है।


बच्ची का दर्द: दादा-दादी, चाचा-चाची और बुआ डांटते थे, बाहर निकलने पर थी पाबंदी
वह दादा-दादी, चाचा-चाची व पापा-मम्मी के साथ रहती थी। पिछले 4-5 साल पहले पापा-मम्मी में झगड़ा हुआ। मां अपने मायके पटना (बिहार) चली गईं। दादा-दादी मुझे मां को लेकर ताने मारने लगे थे। 2 साल पहले चाची ने कहा- तुम यहां क्यों रहती हो, मां के पास पटना में ही रहना। मैं 2 महीने पटना में रही परंतु मम्मी ने मुझे भोपाल भेज दिया। मैं आई तो किसी को खुशी नहीं हुई। दादा बोले- बुढ़ापे में यह आफत कहां से आ गई। चाची मुझे पसंद नहीं करती थीं और चाचा से बोलती थी कि इससे बात नहीं करो। मेरी वजह से घर में बहुत लड़ाई हुई और उसके दो महीने बाद पापा को पैरालिसिस हो गया तो मैं घर में अकेली हो गई। आज से एक-दो साल पहले की बात है। बुआ ने दादी को फोन करके बताया कि उसकी कई लड़कों से दोस्ती है, डांटा करो। आए दिन दादा-दादी, चाचा-चाची और बुआ डांटते-फटकारते थे। बाहर आने-जाने और आसपास के लोगों से बात करने पर पाबंदी लगाते थे। वह परिवार वालों के व्यवहार से दुखी हो गई थी।


गाेदाम में बैग की सूचना
एएसपी दिनेश कौशल ने बताया कि सुबह करीब आठ बजे एक महिला ने पुलिस को सूचना दी थी कि मकान नंबर 104-2बी साकेत नगर में एक स्कूली बैग पड़ा है। यह मकान सिविल कांट्रेक्टर संजीव गुप्ता है। संजीव ने मकान को गोदाम बना रखा है।


बच्ची ने उठाए थे कपड़े
गुप्ता अपने गोदाम में सामान रखते हैं। यहां उनकी मारुति वैन भी खड़ी रहती है। कर्मचारी यहां सामान रखकर या निकालकर ले जाते हैं। बच्ची ने ठंड से बचने के लिए पड़ोसी के कपड़े उठा लिए थे। रात में वह वैन में ही सो जाती थी।


सिविल ड्रेस में की बात
पूछताछ के लिए पुलिस ने अलग ही माहौल बनाया था। बच्ची वर्दी से डरे नहीं, इसके लिए महिला एसअाई एवं अन्य पुलिसकर्मी साधारण कपड़ों में बुलाई गईं। पुलिस ने खास दोस्त को भी बुलाया। उससे बच्ची को चाय-नाश्ता कराया तब वह सामान्य हुई।

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