मैसेज मिलते ही 8 दिन के अंदर देशभर के जवानों ने की शहीद के परिवार की मदद, व्हॉटसऐप पर ही जुटा दिए पौने 2 लाख रुपए / मैसेज मिलते ही 8 दिन के अंदर देशभर के जवानों ने की शहीद के परिवार की मदद, व्हॉटसऐप पर ही जुटा दिए पौने 2 लाख रुपए

छोटे भाई को परेशानी में देखकर बड़े भाई ने दिया अपना अकाउंट नंबर

​अनूप दुबे

Nov 07, 2018, 08:27 AM IST
शहीद आशीष कुमार झा अपने बेटे के साथ और वर्दी में और शव को देखते परिजन। शहीद आशीष कुमार झा अपने बेटे के साथ और वर्दी में और शव को देखते परिजन।

भोपाल : जम्मू के राजौरी में आतंकवादी हमले में शहीद जवान के परिवार के लिए अपनी कृतज्ञता दिखाने की पहल साथी जवानों ने की। वाॅट्सएप पर बनाए ग्रुप पर चले इस अभियान में 8 दिन के अंदर ही देशभर के जवानों ने पौने दो लाख रुपए जुटा लिए। इसकी शुरुआत जम्मू में पदस्थ भोपाल के एक जवान ने की थी। इसमें उनकी मदद उनके बड़े भाई ने अपना खाता उपलब्ध करा कर की। सोमवार को पैसे शहीद की पत्नी के खाते में ट्रांसफर का भी कर दिए गए। भोपाल के सेमरा में रहने वाले अरविंद रघुवंशी जम्मू कश्मीर में आर्मी में बतौर टेक्नीशियन पदस्थ है।

अरविंद ने बताया कि 2017 में उनकी ट्रेनिंग हुई। दिसंबर 2017 में उन्होंने जूनियर और साथियों का वाॅट्सएप ग्रुप बनाया। 512 लोग होने के कारण दो ग्रुप बनाने पड़े। 28 अक्टूबर को अरविंद भोपाल में ही थे । तभी उन्हें वाॅट्सएप पर अपने जूनियर पटना निवासी आशीष कुमार झा के शहीद होने की सूचना मिली।

एक पल में ही मदद के लिए तैयार हो गए सभी लोग
आशीष जम्मू कश्मीर में हुए आतंकी हमले में 26 अक्टूबर को शहीद हुए। अरविंद ने जूनियर को श्रद्धांजलि देने और परिवार की मदद करने के इरादे से 28 अक्टूबर को दोनों वाॅट्सएप ग्रुप पर एक मैसेज सर्कुलेट कर शहीद के परिवार की मदद करने की इच्छा जताई। एक पल में ही सभी इसके लिए तैयार हो गए, लेकिन समस्या यह थी कि पैसा कैसे दिया जाए।

छोटे भाई को परेशानी में देखकर बड़े भाई ने दिया अपना अकाउंट नंबर

दो दिन तक छोटे भाई को इसी पर चर्चा करते बड़े भाई यशवंत रघुवंशी ने सुन लिया। यशवंत ने कहा कि इसके लिए वे अपना खाता उपलब्ध करा सकते हैं, क्योंकि उनका खाता प्राइवेट नहीं है। वे एक सेंटर चलाते हैं। इसमें वे ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर सकते हैं। पैसा जमा होने होने के बाद किसी के भी खाते में ट्रांसफर कर देंगे।

यशवंत ने इसके लिए अपने बैंक मैनेजर से बात की और उन्हें स्थिति के बारे में बताया। बैंक मैनेजर ने कहा कि निश्चित समय के बीच में कोई भी निजी ट्रांजेक्शन ना करें। केवल ऑनलाइन ट्रांजेक्शन होने दे। उसके बाद रुपए सीधे संबंधित के खाते में ट्रांसफर कर दे। इससे आयकर की भी समस्या नही आएगी और आप मदद भी कर सकेंगे।

खाता खुलवाकर रुपए कर दिए ट्रांसफर

अरविंद अपनी टीम के साथ सोमवार शाम शहीद आशीष के घर पटना पहुंचे। घर में उस समय अंतिम संस्कार के बाद के कार्यक्रम किए जा रहे थे। अरविंद ने पहले आशीष की पत्नी के नाम पर एक अकाउंट बैंक में खुलवाया और उसके बाद अपने साथियों से जुटाए हुए पैसे खाते में ट्रांसफर करवा दिए। अरविंद बताते हैं कि आशीष का चार साल का इकलौता बेटा है। वे घर में सबसे बड़े थे। उनके बाद उनके छोटे भाई पर उनके परिवार और माता-पिता की जिम्मेदारी आ गई।

बेटे के शव को देखती हुई मां। बेटे के शव को देखती हुई मां।
शहीद आशीष कुमार झा का बेटा दादा के साथ। शहीद आशीष कुमार झा का बेटा दादा के साथ।
2 lakhs collected for the family of martyrs in bhopal
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शहीद आशीष कुमार झा अपने बेटे के साथ और वर्दी में और शव को देखते परिजन।शहीद आशीष कुमार झा अपने बेटे के साथ और वर्दी में और शव को देखते परिजन।
बेटे के शव को देखती हुई मां।बेटे के शव को देखती हुई मां।
शहीद आशीष कुमार झा का बेटा दादा के साथ।शहीद आशीष कुमार झा का बेटा दादा के साथ।
2 lakhs collected for the family of martyrs in bhopal
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