भोपाल / 21 मंत्रियों के पास अभी 27 ओएसडी भाजपा सरकार वाले

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी भाजपा सरकार के मंत्रियों के स्टॉफ को नहीं रखने के लिए मंत्रियों को चिट्‌ठी लिखी थी। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी भाजपा सरकार के मंत्रियों के स्टॉफ को नहीं रखने के लिए मंत्रियों को चिट्‌ठी लिखी थी।
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पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी भाजपा सरकार के मंत्रियों के स्टॉफ को नहीं रखने के लिए मंत्रियों को चिट्‌ठी लिखी थी।पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी भाजपा सरकार के मंत्रियों के स्टॉफ को नहीं रखने के लिए मंत्रियों को चिट्‌ठी लिखी थी।

  • मुख्यमंत्री ने समझाया था- पुराना स्टाफ न रखें, हनीट्रैप केस में दो मंत्रियों के ओएसडी का नाम, उठ रहे सवाल
  • सरकार बनने के बाद दिग्विजय ने भी स्टाफ बदलने लिखी थी चिट्‌ठी

दैनिक भास्कर

Jan 03, 2020, 02:41 AM IST

शैलेंद्र चौहान | भोपाल . हनीट्रैप से जुड़े मानव तस्करी मामले में पांच दिन पहले जो चालान मजिस्ट्रेट कोर्ट में दाखिल हुआ था, उसमें खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के ओएसडी (विशेष सहायक) हरीश खरे और खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल के ओएसडी अरुण निगम का भी नाम है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या मंत्रियों को अपने ओएसडी की करतूतों की भनक तक नहीं थी?

ये दोनों ओएसडी पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में भी लंबे समय तक तत्कालीन मंत्रियों के स्टाफ में रहे हैं। 2018 में जब कांग्रेस सरकार बनी थी, तब मुख्यमंत्री कमलनाथ  ने सभी मंत्रियों से निजी स्टाफ बदलने को कहा था, लेकिन 21 मंत्रियों के स्टाफ में 27 ओएसडी, निज सचिव और पीए ऐसे हैं, जो भाजपा के मंत्रियों के स्टाफ में वर्षाें काम करते रहे। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी भाजपा सरकार के मंत्रियों के स्टॉफ को नहीं रखने के लिए मंत्रियों को चिट्‌ठी लिखी थी। लेकिन, मंत्रियों ने ध्यान नहीं दिया। केवल आठ मंत्री हैं, जिन्होंने नए अफसर-बाबुओं को अपने स्टॉफ में जगह दी है।

अभी किस मंत्री के स्टाफ में कौन पुराना

 सज्जन सिंह वर्मा : तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह के ओएसडी रहे महेश गुप्ता और अरविंद सोनगिरकर अब पीडब्ल्यूडी मंत्री के पीए हैं। स्टाफ में पदस्थ मायाराम वर्मा भी पहले भाजपा मंत्रियों के साथ काम कर चुके हैं।
 

उमंग सिंघार : इनके ओएसडी बसंत बाथरे हैं, जो पूर्व में भाजपा विधायक संजय पाठक, सरताज सिंह के साथ रहे।                       
 

 प्रदीप जायसवाल : जब खनिज मंत्री बने, तब स्टाफ के लिए एक दर्जन इंटरव्यू लिए। बोले थे- कोई दागी नहीं रखूंगा, लेकिन हनीट्रैप के शिकार अरुण निगम को रख लिया। ये लंबे समय तक रंजना बघेल के स्टाफ में रहे। 

प्रद्युमन सिंह तोमर : खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री हैं, लेकिन इनके ओएसडी हरीश खरे पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के स्टाफर रह चुके हैं। तोमर ने पीए जेल प्रहरी जीआई माझी को बनाया है, जो नारायण सिंह कुशवाह के पीए थे।
 

ओंकार सिंह मरकाम : जनजाति कार्य विभाग के आशीष चेके को पीएस बनाया है। चेके पूर्व मंत्री ज्ञान सिंह के साथ रहे हैं। जयसिंह मरावी और अंतर सिंह आर्य के यहां भी थे। मरकाम ने गौरीशंकर बिसेन के स्टॉफ में रहे एसडी हरोड़े को भी रख लिया है। हरोड़े को पहले मंत्री लाखनसिंह यादव ने रखा था।
 

लखन घनघोरिया : इनके निज सचिव वीरेंद्र कुमार तिवारी हैं, जो मूलत: भोपाल नगर निगम में राजस्व निरीक्षक हैं। ये पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया से लेकर अजय विश्नोई तक के स्टाफ में रहे हैं।  
 

विजयलक्ष्मी साधौ : पूर्व वनमंत्री गौरीशंकर शेजवार और नानाभाउ महोड़ के स्टॉफ में रहे आर के पंवार साधौ के पीएस हैं। अनूप मिश्रा के पीए रहे महेंद्र गुप्ता को भी साधौ ने स्टॉफ में रखा है। 
 

डॉ. गोविंद सिंह : पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के स्टॉफ में रहे संजय जैन को सिंह ने अपना ओएसडी बनाया है। पहले अरविंद सिंह सेंगर ओएसडी थे। वे भी भाजपा नेताओं के साथ रहे थे।  
 

हर्ष यादव : चिकित्सा शिक्षा मंत्री रहे शरद जैन के स्टॉफ में मुख्य रूप से रहे विमल गुप्ता और पारस जैन के स्टॉफ में रहे गुलाबराव बुवाड़े को पीएस रखा है। 
 

लाखन सिंह यादव : पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य, गौरीशंकर बिसेन और कन्हैया लाल अग्रवाल के स्टॉफ मेंे जुड़े रहे बाबू विजय बुधवानी को मंत्री ने विशेष नोटशीट पर स्टॉफ में रखवाया है। यादव ने पारस जैन के पीए आरडी सोलंकी को अपना पीए बनाकर रखा है।
 

इमरती देवी : जलसंसाधन विभाग के मनोज गोटीवाले बतौर पीए स्टॉफ में पहले दिन से है। वे महेंद्र हार्डिया के साथ रहे हैं। 
 

पीसी शर्मा : पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ला के स्टॉफ में रहे आनंद भट्‌ट अभी शर्मा के पीए हैं।
तरूण भनोत : पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के स्टॉफ में रहे केडी कुकरेती को रखा है। पीए राजेश गंगराड़े पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन के स्टॉफ में थे। वहीं माया सिंह के साथ रहे पीएस विजय शर्मा को भी रख लिया। पूरा स्टॉफ पुराने मंत्रियों का है।
 

गोविंद सिंह राजपूत : पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के स्टॉफ में रहे आरपी राय को राजपूत ने भी अपने साथ रखा है।
 

तुलसी सिलावट : महिला बाल विकास मंत्री रहीं अर्चना चिटनिस के पीए राकेश मिश्रा वर्तमान में सिलावट के पीए हैं। 
 

बाला बच्चन :  सुरेंद्र पटवा के स्टॉफ में रहे प्रजापति को अपना पीए बना लिया है। वे पहले बयान दे चुके हैं कि हम पिछली सरकार के किसी स्टॉफ को साथ नहीं रखेंगे।
 

सुखदेव पांसे : इनके ओएसडी पंकज श्रीवास्तव पहले रामकृष्ण कुसुमारिया के बंगले पर थे। व्यापमं घोटाले के अहम किरदार पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के पीएस रहे दिगेंद्र भार्गव को भी साथ रख लिया।  
 

सचिन यादव : पूर्व वन मंत्री रहे गौरीशंकर शेजवार के प्रमुख निज सचिव रहे अशोक डहारे को यादव ने अपने स्टॉफ में निज सचिव बनाया है।
 

आऱिफ अकील : अनिल सुमानी इनके निज सहायक हैं, जो पूर्व मंत्री रामकृष्ण कुसमारिया के स्टाफर रह चुके हैं। 
 
भाजपा में भी हो चुकी बदनामी
भाजपा के शासन में निजी स्थापना में संघ पृष्ठभूमि वाले कई पद पा चुके थे। व्यापमं घोटाले में पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के साथ उनके ओएसडी ओपी शुक्ला फंसे थे। शुक्ला की वजह से सरकार की खासी बदनामी होने पर हटाना पड़ा था।

मंत्री तोमर बोले- खरे को हटाने बोल दिया था; पीएस ने कहा- लिखकर नहीं दिया था

चालान में ओएसडी का नाम आने को गंभीरता से लिया है। हम कोई बचाव नहीं कर रहे। पहले दिन खरे को हटाने के लिए प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल को कह दिया था। ओएसडी कितना दोषी है, ये एसआईटी जांचेगी - प्रद्युम्न सिंह तोमर, मंत्री

खाद्य मंत्री का मेरे पास फोन आया था, मैंने कहा था कि लिखित में भेजिए, उन्होंने लिखकर नहीं भेजा, इसलिए खरे को नहीं हटाया। - अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री

(नोट- खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल ने फोन नहीं उठाया। उनके पीएसओ शैलेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि मंत्री 5 जनवरी तक बाहर छुट्‌टी पर है)

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