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भास्कर एक्सक्लूसिव / भोपाल, इंदौर, जबलपुर आईटी पार्क में 104 प्लॉट खाली 21 कंपनियों ने दिया जमीन वापस करने का आवेदन

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 03:07 AM IST


21 plots empty out of IT park
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21 plots empty out of IT park

  • मेपआईटी ने जबलपुर आईटी पार्क की 25 एकड़ जमीन विकसित नहीं करने का लिया निर्णय
  • तर्क दिया जब कोई आना ही नहीं चाहता तो जमीन को डेवलप करने का क्या फायदा

गुरुदत्त तिवारी, भोपाल . प्रदेश में 21 कंपनियों ने आईटी पार्क में आवंटित जमीनें लौटाने के आवदेन दिए हैं। कारण, डेवलपमेंट में हो रही देरी और प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कदम न उठाए जाने से कंपनियों में नाराजगी है।

 

भाजपा सरकार ने प्रदेश के आईटी पार्क में निवेश करने वाली कंपनियों को अनुदान देने का आश्वासन दिया था, लेकिन पिछले 4 साल से करीब 65 आईटी कंपनियों के आवदेन पेंडिंग हैं। इनमें पेटीएम जैसी नामचीन कंपनियां भी शामिल हैं। पेटीएम ने जबलपुर में निवेश किया था। उसे स्कील डेवलपमेंट ट्रेनिंग और रोजगार देने के एवज में यह सब्सिडी मिलनी थी। हालात यह है कि जो कंपनियां यहां प्लांट लगाना चाह रहीं हैं, उन्हें जटिल प्रक्रिया और प्रशासकों के कठिन सवालों से गुजरना पड़ रहा है।

 

नतीजतन भोपाल, इंदौर और जबलपुर के आईटी पार्कों में 104 प्लॉट आज भी निवेशकों का इंतजार कर रहे हैं। इनके लिए 35 कंपनियों के आवेदन पेंडिंग हैं। मेपआईटी ने जबलपुर स्थित आईटी पार्क को आवंटित की गई 25 एकड़ जमीन को डेवलप नहीं करने का निर्णय लिया है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि जब कोई आना ही नहीं चाहता तो जमीन को डेवलप करने का क्या फायदा। बेहतर हो इसे राज्य सरकार को वापस कर दिया जाए।

 

17 कंपनियों के आवंटन किए रद्द : मेपआईटी ने पिछले माह कुल 17 कंपनियों के आवंटन रद्द किए थे। इनमें से 7 कंपनियां भोपाल की थीं, लेकिन इन कंपनियों का कहना था कि विभाग ने समय पर न तो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया और न ही दूसरी सुविधाएं ही दीं। ऐसे में वे कैसे वहां काम शुरू कर सकते थे। जिन 17 कंपनियों के आवंटन रद्द किए  गए हैं उनका कहना है कि हमसे डेवलपमेंट शुल्क के 21 लाख रुपए मांगे गए थे।

 

बिजली कनेक्शन लगवाने लगा रहे दफ्तरों के चक्कर

 

  • जमीन आवंटित किए जाने के बाद पजेशन में 1 से 2 साल तक का समय लग रहा है।
  • लीज रेंट एक फीसदी से बढ़ाकर दो फीसदी कर दिया गया है।
  • प्रोसेस चार्ज 5,000 रुपए से बढ़ाकर 20,000 रुपए कर दिया गया।
  • पहले आईटी कंपनियों को निवेश करने पर मिलने वाले अनुदान समाप्त कर दिए गए हैं।
  • निवेश कर चुकीं 65 कंपनियों के अनुदान जारी करने के आवेदन पेंडिंग हैं। 
  • सिंगल विंडो प्रणाली नहीं है। निवेश करने वाली कंपनियों को बिजली के कनेक्शन और नक्शा पास कराने के लिए एक जगह से दूसरी जगह भटकना पड़ रहा है।
  • इंदौर, जबलपुर और छिंदवाड़ा में एसटीपीआई के तहत स्वीकृत परियोजनाओं पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।
  • समय पर विकास कार्य शुरू न होने पर भोपाल में 9, जबलपुर में 4, इंदौर में 6 और ग्वालियर में 2 कंपनियों ने जमा की गई राशि वापस मांग ली है।

आवेदन करने के सालभर बाद भी प्रेजेंटेशन नहीं हुआ

 

हमने फरवरी 2018 में बड़वई के आईटी पार्क के लिए आवेदन किया था। अक्टूबर में हमसे 5 लाख रुपए भरवाए गए थे, लेकिन अब तक हमारा प्रेजेंटेशन ही नहीं हुआ। इस प्रेजेंटेशन के बाद ही तय होगा कि हमें जमीन मिलेगी या नहीं। - रमेश थडानी, वनिशा सॉफ्टवेयर

हमने जबलपुर आईटी पार्क में जमीन मांगी थी, लेकिन प्रक्रिया इतनी धीमी है कि हमें अब तक जमीन नहीं मिली। परियोजना की समय सीमा लगातार आगे बढ़ रही है। हम अन्य राज्यों में वैकल्पिक जमीन की तलाश में हैं। - फ्रेंकी सूरी, सूरी सॉफ्टवेयर

नई जमीन लेने या वापस करने का निर्णय डिमांड के आधार पर होता है
 

हम आईटी पार्क को डेवलप कर रहे हैं। इसके लिए सभी जरूरी उपाय किए जा रहे हैं। जिन्हें प्लॉट मिल चुके हैं उनके डेवलपमेंट का काम जारी है। नई जमीन लेने या वापस करने का निर्णय डिमांड के आधार पर होता है। इससे डेवलपमेंट में कोई असर नहीं होगा। - प्रवीण दीक्षित, प्रोजेक्ट मैनेजर, आईटी पार्क, मप्र

 

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