भोपाल

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चुनाव आयोग की परीक्षा में 48% फेल

संघ लोक सेवा आयोग और मप्र लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं पास कर आईएएस (प्रोबेशनरी एसडीएम), संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी...

Dainik Bhaskar

Sep 10, 2018, 03:15 AM IST
संघ लोक सेवा आयोग और मप्र लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं पास कर आईएएस (प्रोबेशनरी एसडीएम), संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार बने अधिकारी भारत निर्वाचन आयोग की परीक्षा में फेल हो गए हैं। आयोग द्वारा भेजे गए रिजल्ट में केवल 52 फीसदी अधिकारी ही पास हुए हैं और 48 फीसदी अधिकारी फेल हो गए हैं। यह रिजल्ट मई माह में आए एमपी बोर्ड 10वीं की परीक्षा में पास होने वाले छात्रों के 66.54 प्रतिशत से भी कम रहा है। आयोग से शनिवार को ही यह रिजल्ट भोपाल स्थित आयोग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास पहुंचा है। अभी इसे औपचारिक तौर पर घोषित नहीं किया गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मप्र वीएल कांताराव ने कहा कि रिजल्ट शनिवार को ही आया है, मैंने देखा नहीं है।

सोमवार को घोषित किया जाएगा। फेल होने वाले अधिकारियों के लिए रिफ्रेशर कोर्स होगा। इसके बाद उनकी दोबारा परीक्षा होगी, जिसे पास करना जरूरी रहेगा।

इंदौर-उज्जैन संभाग से 198 अधिकारियों ने दी थी परीक्षा

अगस्त में भारत निर्वाचन आयोग ने यह परीक्षा काफी गोपनीय रूप से ली थी। इसके लिए दिल्ली से ही अधिकारी अपने साथ सीलबंद लिफाफे में पेपर लेकर आए थे। इन्हीं पेपर में उत्तर लिखने की जगह थी और बाद में यही प्रशनपत्र वह अपने साथ जांचने दिल्ली ले गए थे। इंदौर में यह परीक्षा होलकर कॉलेज में इंदौर-उज्जैन संभाग के अधिकारियों की एक साथ हुई थी, जिसमें 15 जिलों के 198 अधिकारी बैठे थे। इंंदौर जिले के करीब 18 अधिकारियों ने यह परीक्षा दी थी। इसमें एक घंटे का पेपर था और चुनाव तैयारियों को लेकर प्रश्न पूछे गए थे।

दो माह बाद चुनाव, चिंता में आयोग

प्रदेश से 550 से ज्यादा अधिकारियों ने यह परीक्षा दी थी। इसमें से आधे भी पास नहीं हुए हैं। वहीं एक माह बाद आचार संहिता और करीब दो माह बाद विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में चुनाव आयोग के लिए भी चिंता की बात है कि वह जल्द रिफ्रेसर कोर्स कराकर, अधिकारियों को जानकारी दे। वहीं अधिकारियों का कहना है कि जब चुनाव का काम संभालते हैं तो आयोग के दिशा-निर्देश वाली किताब उनके पास रहती है। जरूरत होने पर उच्च अधिकारियों, आयोग से भी चर्चा कर लेते हैं। ऐसे में परीक्षा में पास-फेल को चुनाव का काम करने का पैमाना बनाना उचित नहीं है।

चुनाव में अधिकारी रहते हैं रिटर्निंग ऑफिसर

विधानसभा चुनाव में डिप्टी कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर अधिकारी ( नए आईएएस भी प्रोबेशन में एसडीएम रहते हैं) को रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) की जिम्मेदारी रहती है, जो प्रत्याशियों के नामांकन फॉर्म आदि लेते हैं और संबंधित विधानसभा चुनाव के लिए जिम्मेदारी संभालते हैं। उनके साथ तहसीलदार असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर (एआरओ) की भूमिका में रहते हैं। इनकी एक भी चूक पूरे चुनाव पर भारी पड़ सकती है।

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