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56 कोर्ट, सुरक्षा के लिए सिर्फ 15 जवान; 16 कैमरे, उनमें भी आधे बंद

एशिया की सबसे बड़ी जिला अदालत। यहां कुल 56 कोर्ट लगती हैं। इन सबकी सुरक्षा का जिम्मा 30 पुलिसकर्मियों के हवाले है,...

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2018, 03:25 AM IST
Bhopal - 56 कोर्ट, सुरक्षा के लिए सिर्फ 15 जवान; 16 कैमरे, उनमें भी आधे बंद
एशिया की सबसे बड़ी जिला अदालत। यहां कुल 56 कोर्ट लगती हैं। इन सबकी सुरक्षा का जिम्मा 30 पुलिसकर्मियों के हवाले है, लेकिन रोजाना तैनात 15 ही रहते हंै। पिछले गुरुवार को सामूहिक ज्यादती के आरोपी मेहबूब के सजा सुनने के बाद कोर्ट रूम से भागने की घटना ने एक बार फिर अदालत की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया। चूक पहली बार हुई ऐसा बिल्कुल नहीं है। बार एसोसिएशन कई बरसों से अदालत में पुलिस चौकी की मांग करता रहा है लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई।

कहने को तो पूरी अदालत की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से हो रही है। लेकिन सच्चाई चौंकाने वाली है। अदालत के मुख्य प्रवेश द्वार के बांई तरफ एक ओपन केबिन में रखे एक स्क्रीन पर सीसीटीवी कैमरे की हकीकत देखी जा सकती है।

पूछताछ में सामने आया कि पूरी अदालत में 16 कैमरे लगे हुए हैं। स्क्रीन पर साफ दिख रहा है कि इनमें से 8 कैमरे बंद हंै और जो चालू हैं उनसे भी कोई फुटेज मिल सकेंगे ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती है। इन कैमरों की रिकार्डिंग कहां हो रही है यह पूछने पर बताया गया कि कम्प्यूटर रूम में। जब भास्कर संवाददाता ने कम्प्यूटर रूम से जानकारी चाही तो जबाव मिला- हमें जानकारी नहीं है। अदालत के एक कर्मचारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि जब से अदालत बनी है इन कैमरों का मेंटेनेंस पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के जिम्मे है। वे ही इसे ठीक कराते हैं। इन कैमरों की रिकार्डिंग करने वाला डीवीआर कहां रखा है? उसकी मेमोरी कितनी है? वह काम कर भी रहा है या नहीं इसके बारे में किसी के पास कोई जानकारी नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि इस लापरवाही के लिये कौन जिम्मेदार है और क्या उसके खिलाफ कार्रवाई होगी? जब हमने इस संबंध में हमने जिला रजिस्ट्रार सिराज अली से फोन पर बात करनी चाही तो उनसे संपर्क नहीं हो सका ।

पिछले हफ्ते सजा सुनते ही कठघरे से भाग खड़ा हुआ था ज्यादती का आरोपी

स्क्रीन पर कोर्ट का आधा-अधूरा व्यू

कीर्ति गुप्ता| भोपाल

एशिया की सबसे बड़ी जिला अदालत। यहां कुल 56 कोर्ट लगती हैं। इन सबकी सुरक्षा का जिम्मा 30 पुलिसकर्मियों के हवाले है, लेकिन रोजाना तैनात 15 ही रहते हंै। पिछले गुरुवार को सामूहिक ज्यादती के आरोपी मेहबूब के सजा सुनने के बाद कोर्ट रूम से भागने की घटना ने एक बार फिर अदालत की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया। चूक पहली बार हुई ऐसा बिल्कुल नहीं है। बार एसोसिएशन कई बरसों से अदालत में पुलिस चौकी की मांग करता रहा है लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई।

कहने को तो पूरी अदालत की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से हो रही है। लेकिन सच्चाई चौंकाने वाली है। अदालत के मुख्य प्रवेश द्वार के बांई तरफ एक ओपन केबिन में रखे एक स्क्रीन पर सीसीटीवी कैमरे की हकीकत देखी जा सकती है।

पूछताछ में सामने आया कि पूरी अदालत में 16 कैमरे लगे हुए हैं। स्क्रीन पर साफ दिख रहा है कि इनमें से 8 कैमरे बंद हंै और जो चालू हैं उनसे भी कोई फुटेज मिल सकेंगे ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती है। इन कैमरों की रिकार्डिंग कहां हो रही है यह पूछने पर बताया गया कि कम्प्यूटर रूम में। जब भास्कर संवाददाता ने कम्प्यूटर रूम से जानकारी चाही तो जबाव मिला- हमें जानकारी नहीं है। अदालत के एक कर्मचारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि जब से अदालत बनी है इन कैमरों का मेंटेनेंस पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के जिम्मे है। वे ही इसे ठीक कराते हैं। इन कैमरों की रिकार्डिंग करने वाला डीवीआर कहां रखा है? उसकी मेमोरी कितनी है? वह काम कर भी रहा है या नहीं इसके बारे में किसी के पास कोई जानकारी नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि इस लापरवाही के लिये कौन जिम्मेदार है और क्या उसके खिलाफ कार्रवाई होगी? जब हमने इस संबंध में हमने जिला रजिस्ट्रार सिराज अली से फोन पर बात करनी चाही तो उनसे संपर्क नहीं हो सका ।

कोर्ट परिसर में रोजाना 6 हजार लोगों का आना-जाना

अदालत परिसर के अंदर आने के लिए वैसे तो तीन प्रवेश द्वार हैं, लेकिन कोर्ट रूम तक जाने के लिए सात गेट हैं। मुख्य प्रवेश द्वार से न्यायधीश प्रवेश करते हैं इसलिए खानापूर्ति के नाम पर यहां कुछ पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं, बाकी किसी भी गेट से आप बिना तलाशी के अंदर आ जा सकते हैं। तलाशी के नाम पर मुख्य प्रवेश द्वार एक मेटल डिटेक्टर लगा हुआ है जो दिनभर बीप बजाकर अपनी उपस्थिति का अहसास कराता है। अदालत में सत्र न्यायाधीश और सीजेएम के साथ 56 अदालतें नियमित रूप से काम करती हैं। 2000 वकील, 3000 पक्षकार और न्यायिक कर्मचारी, कोर्ट मुंशी और कोर्ट मुहर्रिर और कोर्ट परिसर में काम करने वालों को मिलाकर एक हजार यानी रोजाना कुल छह हजार लोगों को आना जाना है।

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