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भोपाल / दूषित हवा ने छीनी मप्र के 83 हजार से ज्यादा लोगों की जिंदगी



83 thousand people died from air pollution in Madhya Pradesh
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83 thousand people died from air pollution in Madhya Pradesh

  • प्रदूषण ने 1.9 साल घटा दी प्रदेश के लोगों की औसत उम्र
  • वायु प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों के कारण रोजाना 3116 मरीजों को जाना पड़ रहा है अस्पताल

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2018, 05:54 AM IST

हरेकृष्ण दुबोलिया,  भोपाल . दूषित हवा में सांस लेने के कारण मध्यप्रदेश के लोगों की औसत उम्र 1.9 साल घट गई है। वर्ष 2017 में प्रदेशभर में 83,045 लोगों की जान वायु प्रदूषण के कारण हुई है।

 

यह आंकड़ा इसलिए भी चिंताजनक है, क्योंकि प्रदेश में रोजाना 3,116 लोगों को वायु प्रदूषण से होने वाली 8 बीमारियों के कारण अस्पताल जाना पड़ता है। यह निष्कर्ष विश्व के प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द लैंसेट में वायु प्रदूषण के असर पर प्रकाशित हालिया रिपोर्ट में निकाला गया है। 6 दिसंबर को प्रकाशित रिपोर्ट को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और बिल एंड मिलेंडा गेट्स फाउंडेशन के एक्सपर्ट ने तैयार किया है। 


आईसीएमआर भोपाल के विशेषज्ञों के मुताबिक हवा के साथ उड़ती बारीक धूल और वाहनों का धुंआ हमारी सेहत के लिए इतना खतरनाक हो सकता है, इस बारे में न तो राज्य सरकार चिंतित है और न ही स्थानीय निकाय। शहरों में हवा के प्रदूषित होने के लिए जितना जिम्मेदार हम वाहनों को ठहराते हैं, उससे कहीं ज्यादा जिम्मेदारी स्थानीय निकायों की हैं।

 

वक्त पर सफाई नहीं होना, उखड़ी हुई सड़कें, डिवाइडर पर फैली मिट्‌टी, अनियंत्रित तरीके से होती भवनों की तुड़ाई और निर्माण, कचरे को जलाकर नष्ट करने की प्रवृत्ति इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में घर के अंदर ठोस ईधन का इस्तेमाल लोगों को प्रदूषित वायु से होने वाली बीमारियों के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार है।

 

उत्तरप्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र में वायु प्रदूषण से हालात सबसे ज्यादा खराब तो मध्यप्रदेश भी इस सूची में चौथे नंबर पर।

 

68% आबादी कर रही ठोस ईधन का इस्तेमाल : रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश में पीएम-2.5 का औसत स्तर 60 से 80 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रहता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मध्यप्रदेश की 68 फीसदी आबादी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अब भी सॉलिड फ्यूल यानी लकड़ी, कोयला और कंडे को जलाने को मजबूर है। प्रदेश के ग्रामीण और खासकर आदिवासी बहुल इलाकों में रसोई के धुएं और कच्चे रास्तों की धूल बीमारी की बड़ी वजह है।

 

घरेलू वायु प्रदूषण सबसे ज्यादा खतरनाक : प्रदेश में घरेलू वायु प्रदूषण की स्थिति ज्यादा खतरनाक है। दूषित वायु के कारण होने वाली कुल मौतों में से 39895 घरेलू वायु प्रदूषण के कारण हुई हैं। वहीं 37774 मौतें एंबिएंट एयर पॉल्यूशन (घर के बाहर खुले क्षेत्र के प्रदूषण) से हुई हैं। वायु प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों के कारण रोजाना 3116 लोगों को अस्पताल जाना पड़ता है। 1591 हाउसहोल्ड पॉल्यूशन तो 1416 एंबिएंट एयर पॉल्यूशन के कारण बीमार हैं।

 

8 बीमारियां, जिनके लिए प्रदूषित हवा जिम्मेदार : 

  • लोअर रेस्पायरेटरी इन्फेक्शन
  • क्रॉनिक अब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज (सीओपीडी)
  • स्कैमिक हार्ट डिसीज {स्ट्रोक {डायबिटीज मेलिटस
  • लंग कैंसर (फेंफड़ों का कैंसर)
  • केटेरेक्ट (आंखों में जलन, खुजली)
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