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11 साल का था जब पुलिस ने परिवार सहित पकड़ा, अब पढ़ता हूं ताकि बता सकूं कि हम अपराधी समाज से नहीं

कक्षा 12 वीं की और 2016 में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विवि में स्नातक (बीए) में एडमिशन लिया।

Danik Bhaskar | Jan 22, 2018, 04:59 AM IST

भोपाल. नाम है तसवीर। उम्र 20 बरस। ग्यारह साल की उम्र में पुलिस ने उसे उसके परिवार सहित चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया और आठ दिन तक पीटा। उसके बाद उसे कुछ दिनों के लिए बाल सुधार गृह भेज दिया गया। जीवन के इस कड़वे अनुभव से गुजरना एक तरह से एक सबक की तरह काम आया। उसने पढ़ना नहीं छोड़ा।

आज वो अपने पारदी समाज से निकला पहला युवा है, जो स्नातक की पढ़ाई कर रहा है। उसका एक सपना है कि वो भविष्य में कभी अपने समाज के इतिहास के उस अध्याय को दुनिया के सामने रखे, जिसे अनदेखा कर उन्हें अपराधी बताकर बदनाम कर दिया गया है।

यह कहानी है शहर के नेहरू नगर से लगे स्लम एरिया राजीव नगर में 10x12 के एक छोटे से कमरे में माता-पिता व छोटे भाई-बहन के पांच सदस्यों वाले परिवार के साथ रहने वाले युवा 'तसवीर' की। आम पारदी परिवार की तरह ही उसका परिवार कचरा बीनने वाला है। माता-पिता और उसकी छोटी बहन दिनभर कचरा बीनती है और छोटा भाई कैटरर की दुकान पर काम करता है।

इसके बावजूद उसका उसे किताबों और पढ़ाई से लगाव है। कभी वो किताबों में अपने समाज का इतिहास खंगालता है तो कभी अपने हालातों पर कविताएं लिखता है। अब समाज के दूसरे बच्चे भी उसकी तरह पढ़ना चाहते हैं। समाज के लिए तसवीर एक रोल मॉडल की तरह सामने आया है। लेकिन इन सबके बावजूद उसे अपने परिवार के लिए कमाई करते समय अपनी पहचान छुपानी पड़ती है।

शिक्षा ही कलंक से दिला सकती है मुक्ति
मुझे पढ़ाई में शुरू से ही रुचि थी। कमला नेहरू प्राइवेट स्कूल में तीसरी तक पढ़ाई की लेकिन इंग्लिश कमजोर होने के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी। प्राइवेट पांचवीं पास की। उसी साल परीक्षा के दौरान ही पुलिस मुझे और पापा के साथ 10-12 लोगों को उठाकर टीटी नगर थाने ले गई। यह बात 2009 की है। पुलिस ने पीटा लेकिन जब मेडिकल हुआ तो यह साबित नहीं हुआ। बाद में मानवाधिकार वालों ने मुझे 17 दिन के लिए बाल सुधारगृह भेजा और पिता को सेंट्रल जेल। इसके बाद 5 साल तक कभी वेटर का काम तो कभी कंस्ट्रक्शन साइट पर काम किया। 2012 में 10 वीं पास की। फिर कक्षा 12 वीं की और 2016 में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विवि में स्नातक (बीए) में एडमिशन लिया।

पसंदीदा विषय इतिहास है। इससे चुनने की एक वजह है पापा समुदाय का इतिहास बताते थे। हमें बचपन से बताया गया कि राजा-महाराजाओं से जुड़ाव रहा है। हमें जंगलों का काफी ज्ञान था। एक जाति जिसका इतिहास में उसका अपना महत्व था लेकिन आज उसका चित्रण एक अपराधी समुदाय की तरह कर दिया गया। आज शिक्षा ही हमें अपने ऊपर लगे कलंक से मुक्ति दिला सकती है। (जैसा कि तसवीर ने भास्कर को बताया)