भोपाल

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प्रोटेक्शन एक्ट जल्द बनाने की मांग नहीं तो एडवोकेट एसोसिएशन करेगा बड़ा आंदोलन,

एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को जल्द नहीं बनाया गया तो अभिभाषक संघ बड़ा आंदोलन करेगा।

Danik Bhaskar

Dec 13, 2017, 06:16 AM IST

भोपाल. एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को जल्द नहीं बनाया गया तो अभिभाषक संघ बड़ा आंदोलन करेगा। यह बात मंगलवार को कोर्ट परिसर में प्रदर्शन के दौरान संघ के अध्यक्ष राजेश व्यास ने कही। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों एक एडवोकेट पर हुए हमले के विरोध में प्रतिवाद दिवस मनाया गया है। वकीलों ने भी न्यायालयीन कार्य से खुद को विरत रखा।

- व्यास का कहना है कि एडवोकेट का काम है केस पर अपना पक्ष रखना, लेकिन फैसला सुनाने का काम न्यायालय का है। पुलिस जांच करती है, लेकिन अगर केस हमारे पक्ष में नहीं आता तो अपमानित हमें किया जाता है।

- हमले भी वकीलों पर किए जाते है। इसको लेकर सरकार को हमने पहले 2007 में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट बनाने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन 10 साल से ज्यादा बीत जाने के बाद भी गंभीरता से नहीं लिया।

- जिसके फलस्वरूप एडवोकेट पर हमला होना आम बात हो गई है। हम कोर्ट ऑॅफिसर होते है और हम ही सुरक्षित नहीं है।

सौंपा ज्ञापन

- व्यास ने कहा कि मप्र उच्च न्यायाधीश के नाम जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र शुक्ला और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर के प्रतिनिधि रवि कुमार को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान पैदल मार्च करते हुए करीब 800 वकीलों ने मंत्रालय के समक्ष प्रदर्शन भी किया। हमले को लेकर वकीलों में काफी आक्रोश है। न्यायालयीन कार्य से विरत रहकर प्रतिवाद दिवस मनाने से न्यायालय कार्य नहीं हुआ। जिला सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र शुक्ला ने कहा कि राजधानी के 64 न्यायालय में 3300 केस प्रभावित हुए। जिन्हें अब अगली तारीखें दी जाएंगी।

ये प्रमुख पांच मांगे
- एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए।

- अधिवक्ता के विरुद्ध कार्रवाई से पहले संघ अध्यक्ष और सचिव से सहमति लेने के बाद ही पुलिस प्रकरण दर्ज करें।

- अशोक विश्वकर्मा पर हुए हमले को लेकर जल्द ही न्यायालय में चालान पेश किया जाए।

- वकीलों के साथ कोई घटना होती है तो पुलिस तत्काल कानूनी कार्रवाई करे।

- पैरवी करने पर कोई धमकी देता है तो उन्हें तुरंत सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।

90 हजार वकील गैर हाजिर रहे

- जिला अधिवक्ता संघ भोपाल के सदस्य के साथ मारपीट करने के विरोध में मंगलवार को प्रदेशभर के अधिवक्ताओं ने पैरवी नहीं की। इस दौरान अदालतों से प्रदेशभर के करीब 90 हजार वकील गैर हाजिर रहे।

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