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उम्र के आधार पर भेदभाव असंवैधानिक, सरकार सबको बराबर छूट देने को स्वतंत्र: HC

हाईकोर्ट जबलपुर ने उम्र के आधार किसी अभ्यर्थी के साथ भेदभाव को असंवैधानिक बताया है।

Dainik Bhaskar

Mar 07, 2018, 06:02 PM IST
discrimination with age of any candidate is unconstitutional : HC

भोपाल. हाईकोर्ट जबलपुर ने उम्र के आधार किसी अभ्यर्थी के साथ भेदभाव को असंवैधानिक बताया है। बुधवार को सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस विजय शुक्ला की युगल पीठ ने सुनाया। उन्होंने ये फैसला उत्तर प्रदेश के अभ्यर्थी मुकेश कुमार और रीता सिंह की ओर से दायर की गई याचिकाओं पर सुनाया। कोर्ट ने आगे कहा है कि छूट देना हो तो सबको बराबर छूट देने के लिए सरकार स्वतंत्र है।

-याचिका में उन्होंने मप्र लोक सेवा आयोग द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति को लेकर 12 दिसंबर 2017 को जारी विज्ञापन में तय की गई आयुसीमा को चुनौती दी थी। इसके तहत सरकार ने मप्र के बाहर के अभ्यर्थियों की आयुसीमा न्यूनतम 21 साल से अधिकतम 28 साल तक तय की थी, जबकि शिक्षित बेरोजगारों की बढ़ी हुई संख्या को देखते हुए मप्र के अभ्यर्थियों को उम्र में 12 साल की अतिरिक्त छूट देते हुए 21 से 40 साल रखी गई थी।

-सरकार ने ये भी कहा था कि मप्र में 20 साल भर्ती नहीं की गई है, इसलिए मूल निवासियों को उम्र में छूट दी जा रही है। कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार दिया है।

याचिका कर्ताओं ने लगाया था भेदभाव का आरोप
-उत्तर प्रदेश के याचिका कर्ताओं ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर भर्ती को लेकर तय की गई आयु सीमा में आरोपित तौर पर भेदभाव होने का आरोप लगाया था। इस पर सरकार ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा था। सरकार का कहना है कि वर्ष 1993 के बाद यह भर्ती हो रही है।

-चूंकि मध्य प्रदेश में शिक्षित बेरोजगारों की संख्या अत्याधिक है और उन्हें मौका देने के लिए ही उनकी अधिकतम आयुसीमा 40 वर्ष तय की गई है। सरकार को विस्तार से पक्ष रखने का समय देते हुए चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने सुनवाई 15 फरवरी तक के लिए मुलतवी कर दी।

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