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जोशी दंपती के 17 मददगारों पर चलेगा बेनामी एक्ट का मुकदमा

सीमा ने अपने पति और बेटी के तो मीराज ने साथ काम करने वाले 13 एजेंट के खातों का उपयोग किया था।

Dainik Bhaskar

Jan 17, 2018, 03:57 AM IST
Anonymous action lawsuit against Joshis

भोपाल. बर्खास्त आईएएस दंपती अरविंद-टीनू जोशी के 3.25 करोड़ रुपए की बीमा पॉलिसी और एफडी से जुड़े मामले में उनकी मदद करने वाले 17 लोगों पर बेनामी कानून के तहत मुकदमा चलेगा। इस कानून के तहत इन्हें 7-7 साल की सजा हो सकती है। मामले की अगुवाई आईसीआईसीआई प्रूडेंसियल की मैनेजर सीमा जायसवाल और आईसीआईसीआई बैंक के मैनेजर मीराज अली ने की थी। सीमा ने अपने पति और बेटी के तो मीराज ने साथ काम करने वाले 13 एजेंट के खातों का उपयोग किया था।

- आयकर विभाग ने माना है कि इन सभी ने खास मकसद से अपने खातों का इस्तेमाल होने दिया। इसलिए सभी के खिलाफ बेनामी एक्ट के तहत कार्रवाई करने की सिफारिश की है। इस पूरे मामले में शुरू से ही निशाने पर रहीं सीमा जायसवाल ने अपने बयान में कहा था कि यह पैसा उसे जोशी दंपती ने नहीं, किसी अन्य व्यक्ति ने निवेश के लिए दिया था, लेकिन सीमा यह नहीं बता सकी कि वह व्यक्ति कौन था। बेनामी लेन-देन निषेध कानून-2016 के अस्तित्व में आने के बाद संभवत: देश में पहली बार बैंक खातों में बेनामी राशि रखने वाले किसी बैंकर्स के खिलाफ इस एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है।

ट्रिक... पहले खाते में पैसा डाला, फिर डीडी से पॉलिसी बनवाई
- मीराज अली ने अपने साथ काम करने वाले आईसीआईसीआई बैंक के 13 एजेंट्स के बैंक खातों में भी पैसा डालकर डीडी बनवाए। बाद में इन डीडी से बीमा पॉलिसी बनवाई। आयकर विभाग का रिकॉर्ड कहता है कि इन सभी 17 लोगों ने 100 से अधिक चेक इश्यू करवाए।

- ज्यादातर डीडी और चेक 49,500 रुपए के थे। मीराज ने जिन एजेंट्स से चेक लिए उनसे पहले से ही पोस्ट डेटेड चेक ले लिए थे। जांच में पता लगा कि सारे डीडी राम कुमार, दिनेश कुमार समेत डमी नामों से बनवाए गए थे।

कार्रवाई... सीमा के इंडसइंड बैंक के लॉकर में भी मिले थे 18 लाख
- आयकर विभाग को सीमा जायसवाल के इंडसइंड बैंक के लॉकर में 18 लाख रुपए नकद मिले थे। अभी तक वे इसका स्रोत नहीं बता पाई हैं। बेनामी विंग इसकी भी पूछताछ कर सकता है। बेनामी लेन-देन निषेध कानून 2016 के तहत बेनामीदार (जिसके नाम चल-अचल संपति होगी) और लाभार्थी (जिसने बेनामीदार के माध्यम से फायदा लिया है), को इस तरह के लेन-देन पर अधिकतम 7 साल की सजा हो सकती है। साथ ही प्रॉपर्टी के मार्केट वैल्यूएशन पर 25% पेनाल्टी भी लगाई जा सकती है।

संभवत: यह देश का पहला मामला होगा

- बेनामी एक्ट के प्रावधान बेहद सख्त हैं। आयकर विभाग पुख्ता जानकारी होने के बाद ही इस तरह केे कदम उठाता है। अब तक देश में कहीं ओर से बैंकिंग सेवा से जुड़े लोगों के खिलाफ इस कानून के तहत कार्रवाई करने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

- राजेश जैन, उपाध्यक्ष, टैक्स लॉ बार एसोसिएशन

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