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रद्दी में बेच दीं 90 लाख अांसर कॉपी, ऐसे पकड़ में आई गड़बड़ी

नियमों को ताक पर रख भोज (मुक्त) विश्वविद्यालय में आंसर कॉपी रद्दी में बेच दी गईं।

Dainik Bhaskar

Jan 19, 2018, 05:33 AM IST
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भोपाल . नियमों को ताक पर रख भोज (मुक्त) विश्वविद्यालय में आंसर कॉपी रद्दी में बेच दी गईं। विश्वविद्यालय ने पिछले साल करीब 90 लाख आंसर काॅपी बेची हैं। इसका न तो सही से वजन हुआ और न ही बाजार मूल्य के हिसाब से राशि तय की गई। रिकाॅर्ड में लाखों की गड़बड़ी होना पाया गया है। यह खुलासा तब हुआ जब विवि ने सीबीआई, ईओडब्ल्यू और सीधी पुलिस की जांच में पुरानी आंसर कॉपी खोजना शुरू कीं। विवि ने रिकाॅर्ड खंगाला तो अधिकारियों ने काॅपियों को रद्दी में बेचना बता दिया। इसके बाद जब रद्दी का रिकाॅर्ड देखा तो उसमें लाखों रुपए की गड़बड़ी सामने आई।

- इस मामले में कुलपति प्रो. आरआर कान्हेरे का कहना है कि पहले जो भी हुआ है उससे सबक लेते हुए अगली बार से कॉपियों को सरकारी फर्म को ही बेचने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए बुरहानुपर स्थित कागज मिल से संपर्क किया जा रहा है। उधर, विवि से गायब हुए दस्तावेजों की बात सामने आने के बाद राजभवन ने विवि के अफसरों को तलब किया है।

फर्जी तरीके से परीक्षा पास करने वाले छात्र की मांगी थी कॉपी
- आराेप है कि 2014 में हुई बीएससी अंतिम वर्ष की परीक्षा में शामिल एक छात्र ने सभी पेपर परीक्षा सेंटर से साठगांठ कर किसी अन्य छात्र से हल करवाकर परीक्षा पास की है। इसकी शिकायत होने के बाद सीधी पुलिस ने विवि छात्र की मूल आंसर कॉपियां हैंड राइटिंग परीक्षण के लिए तलब की हैं।

- विवि ने जब कॉपियों को खंगाला तो वो रिकॉर्ड में नहीं मिली। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2014 की परीक्षाओं की कॉपियों को रद्दी में बेचा जा चुका है। जबकि इसी मामले में विवि प्रशासन सूचना के अधिकार के तहत आवेदक को कॉपियां दे चुका है।

विवि के 80 कर्मचारियों को सात महीने से नहीं मिला वेतन
- विवि में सुरक्षा एजेंसी के तहत कार्यरत कर्मचारियों का मामला उलझ गया है। 80 कर्मचारियों को न तो विवि अपना मान रहा है और न ही सुरक्षा एजेंसी। कर्मचारी परेशान हैं कि आखिर वे अब तक किसके अधीन काम कर रहे थे। विवि ने हाल ही में पुरानी एजेंसी काे हटाकर नई के लिए टेंडर जारी किया है, लेकिन पुरानी एजेंसी के संचालक के हाईकोर्ट से स्टे लाने के बाद मामला विवादित हो गया है। विवि और एजेंसी के बीच फंसे सभी 80 कर्मचारियों का पिछले सात महीने का वेतन अटका हुआ है। यह राशि करीब 50 लाख रुपए हो रही है।

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