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75 साल पहले महीनों जंगलों में प्रैक्टिस कर जीता था बर्मा का युद्ध, अब यादें ताजा कर रहे जवान

द्वितीय विश्वयुद्ध के ‘चिंडित्त अभियान’ का अनुभव करने बुंदेलखंड के जंगलों में उतरे सेना के जवान।

अभिषेक यादव | Last Modified - Mar 04, 2018, 04:29 AM IST

75 साल पहले महीनों जंगलों में प्रैक्टिस कर जीता था बर्मा का युद्ध, अब यादें ताजा कर रहे जवान

सागर. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापानी सेना से मात खाने के बाद तत्कालीन एलाइट फोर्सेेस (अंग्रेज सरकार के अधीन भारतीय सैन्य दल) ने बुंदेलखंड के जंगलों में गोरिल्ला युद्ध की प्रैक्टिस की थी। करीब 6 महीने तक सैकड़ों किमी के जंगल-पहाड़ और नदियों को पार करने के इस सैन्य अभ्यास के बाद एलाइट फोर्सेस ने सन 1943 में बर्मा बार्डर पर युद्ध किया और जापानियों को पराजित कर दिया।

जंगलों में 400 किमी का पैदल मार्च किया

उस समय इस अभियान को चिंडित्त (बर्मा का एक धार्मिक चिन्ह, जिसका आकार शेर और ड्रैगन से मिलकर बना है ) नाम दिया गया था। इस साल इस चिंडित्त अभियान की 75 वीं वर्षगांठ है। इस उपलक्ष्य में भारतीय सेना की 31 आर्मर्ड डिविजन ने इस स्पेशल ट्रेनिंग को याद करते हुए बुंदेलखंड के जंगलों में 400 किमी का पैदल मार्च किया है। यह अभियान 16 फरवरी को सैन्य बेस बबीना (झांसी) से शुरु किया गया था जो 9 मार्च को तेंदूखेड़ा के पास नर्मदा नदी के किनारे डोंगरगांव में समाप्त होगा।

बुंदेलखंड के जंगल और आबो-हवा बर्मा जैसे थे

कर्नल आकाश पांडे ने बताया कि जापानी गोरिल्ला युद्ध में माहिर थे। दूसरी तरफ अंग्रेजों के अधीन उस समय की भारतीय सेना इसमें सिद्धहस्त नहीं थी। अंग्रेज सैन्य अफसर ब्रिगेडियर आॅर्ड विंटेज ने देखा कि बुंदेलखंड के जंगल और पठारी इलाका भी कुछ ऐसा ही है। उन्होंने सैकड़ों सैनिकों को झांसी-ललितपुर-सागर-टीकमगढ़-छतरपुर-पन्ना और दमोह के करीब 400 किमी लंबे जंगली रास्ते में यह ट्रेनिंग कराई। इस अभ्यास के बाद प्रशिक्षित सेना ने उस समय ऑपरेशन लांग क्लाथ और थर्सडे लांच कर जापानियों को हरा दिया।

जंगली जानवरों के बीच गुजार रहे रात :अभियान में सेना के 100 जवान 75 साल पहले उपलब्ध संसाधनों के जरिए जंगल में चल रहे हैं। ये लोग रस्सियां बांधकर नदियां पार करत हैं तो रात के समय जंगली जानवरों से बचने के लिए आग जलाते हैं। इसके लिए उन्हें सांप, जंगली छिपकलियां आदि मारने की भी ट्रेनिंग दी जा रही है। स्टेशन हैड क्वार्टर में पदस्थ कर्नल मुनीष गुप्ता ने बताया कि अभियान में शामिल सदस्यों को रास्ते में तेंदूआ, रीछ का भी सामना करना पड़ा। सैनिक उन्हें बिना कोई नुकसान पहुंचाए आगे बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों को देशभक्ति की शपथ दिलाई : कर्नल पांडे के अनुसार रास्ते में कुछ वनग्राम भी मिले। यहां हमारी टीम के डॉक्टर्सने विशेष कैंप किया। आखिर में उन्हें देश की एकता बनाए रखने की शपथ दिलाई।

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Web Title: 75 saal pehle mhinon jngalon mein praiktis kar jeetaa thaa brmaa ka yuddh, ab yaaden taajaa kar rahe jvaan
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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