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बाबुओं ने ऊपर-नीचे कर दिए लिस्ट के नाम, बाद वालों को पहले मिली अनुकंपा पोस्टिंग

सूबे के स्वास्थ्य महकमे मेंं अनुकंपा नियुक्तियों में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है।

Danik Bhaskar | Jan 16, 2018, 04:54 AM IST

भोपाल. सूबे के स्वास्थ्य महकमे मेंं अनुकंपा नियुक्तियों में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। विभाग में ऐसे कई डॉक्टर से लेकर कर्मचारी थे, जिनकी आकस्मिक मृत्यु हो गई, लेकिन रिश्तेदारों को अब भी अनुकंपा नियुक्ति का इंतजार है। वहीं करीब 50 मामले ऐसे सामने आए हैं, जिनमें बाबुओं ने फाइलों को ऐसा घुमाया कि जिन कर्मचारियों की मौत बाद में हुई उनके रिश्तेदारों को नौकरी पहले वालों को दरकिनार कर दी गई। जब अफसरों ने ऐसे मामलों की पड़ताल की और रिकॉर्ड खंगाला तो मामला सामने आ गया। अब 63 पात्र लोगों को जल्द नौकरी मिलने का रास्ता साफ हो गया जो कई सालों से इस दफ्तर से उस दफ्तर भटक रहे थे। कोई 8 साल तो कोई 5 साल से नौकरी के इंतजार में चक्कर काट रहा है।

- दरअसल, प्रदेश में कर्मचारी की आकस्मिक मृत्यु के बाद रिश्तेदार को अनुकंपा नियुक्ति मिलती है। स्वास्थ्य विभाग में संबंधित कर्मचारी की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया पदस्थापना वाले जिले से लेकर स्वास्थ्य संचालनालय के बीच चलती है। इसी प्रक्रिया में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर बाबुओं ने करीब 104 अनुकंपा नियुक्ति के मामले लटका रखे हैं।

- इधर, स्वास्थ्य विभाग की आयुक्त डॉ. पल्लवी जैन गोविल का कहना है कि विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के सभी लंबित मामलों को निपटाने की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे 63 प्रकरणों में नियुक्ति के लिए कलेक्टरों को ज्वाइनिंग के लिए लिख दिया गया है।

ऐसे पकड़ी गड़बड़ी

- स्वास्थ्य संचालनालय में एडिशनल डायरेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने अनुकंपा के लंबित मामलों की जानकारी निकलवाई। संचालनालय से जिलों की सूची का मिलान करवाया। मृत कर्मचारी के रिकॉर्ड और खाली पदों का ब्योेरा देखा गया। सामने आया कि बड़ी संख्या में पद खाली हैं। इसके बाद लंबित प्रकरणों में से 63 आवेदकों को नौकरी मिलना साफ हो गया है।

अब सिस्टम ऑनलाइन

कर्मचारी की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए आने वाले आवेदन को ऑनलाइन िसस्टम में डाल दिया जाएगा। पहले आवदेन से आखिरी आवेदन करने वालों के प्रकरण एक साथ होंगे। यानी सूची के क्रमानुसार ही नौकरी मिलेगी। इससे अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदकों से रुपए ऐंठने की विसंगती पर अंकुश लगेगा।

कार्रवाई... संचालनालय में पदस्थ क्लर्क को हटाया

- स्वास्थ्य विभाग में जिले से संचालनालय तक अनुकंपा नौकरी देने का प्रकरण चलता है। संचालनालय और जिले के बाबू आपसी साठगांठ से सूची में किसी तरह से गड़बड़ कर देते थे।

- इसमें जिनकी मृत्यु को पांच से आठ साल हो चुके हैं, उनके आवेदनों को अटका दिया जाता था। कुछ मामलों के आवेदन ही अफसरों तक पहुंचाए जाते थे। किसी मामले में पद नहीं होने या कागजी खानापूर्ति में खामी का बहाना बना दिया जाता है।

- एेसे मामले बड़ी संख्या में हैं, जिनमें बाद में मृत्यु वाले कर्मचारी के रिश्तेदारों को नौकरी मिल गई। कुछ नौकरी तो ऐसे रिश्तेदारों को ंमिल गईं, जिनकी मृत्यु 2016 में हुई है। इस सब मामलों में संचालनालय में पदस्थ क्लर्क मुकेश श्रीवास्तव पर कार्रवाई कर हटा दिया गया है।

मृत कर्मचारियों के बेटे-बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति का इंतजार

मृतक का नाम और मृत्यु की तारीख पद आवेदक
दिनेश सिंह कुशवाह, भिंड-8 फरवरी 2010 सहायक ग्रेड-3 शिवांग राजपूत (बेटा)
माला लाल, जबलपुर- 24 दिसंबर 2011 स्टाफ नर्स सोनिका लाल (बेटी)
गायत्री शर्मा, मुरैना- 13 जुलाई 2012 एएनएम आदित्य तिवारी(बेटा)
शशिप्रभा मिश्रा, दतिया- 6 सितंबर 2013 सहायक ग्रेड-3 कृष्ण कुमार(बेटा)
होरिस सिंह, इंदौर- 15 अक्टूबर 2013 एएनएम अमिता सिंह (बेटी)
डॉ. सुनील जान,छिंदवाड़ा, 1 दिसंबर 2013 चिकित्सा अधिकारी एलेक्स इम्मानुएल (बेटा)
प्रदीप कुमार उपाध्याय, सागर-29 जनवरी 2014 एमपीडब्ल्यू दीपक कुमार उपाध्याय (बेटा)