भोपाल

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बेटे के दिल के छेद से यूं जुड़े मां- पिता के दिल, लोकअदालत का ऐसा था नजारा

पति-पत्नी के झगड़े को बेटे की बीमारी ने दूर करके एक कर दिया।

Danik Bhaskar

Dec 10, 2017, 07:59 AM IST

होशंगाबाद(भोपाल)। पति-पत्नी के झगड़े को बेटे की बीमारी ने दूर करके एक कर दिया। शनिवार को लोक अदालत में कई मामले सामने आए लेकिन सबसे खास रहा तारबहार के श्वेता और नरेंद्र मालवीय का केस। उनके बेटे अमन के दिल में छेद है। 9 दिन पहले पत्नी ने पति के खिलाफ मारपीट का केस दर्ज कराया था।

दिल के छेद ने मिला दिए मां पिता के दिल

- न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रेमा साहू ने बच्चे अमन मालवीय से पूछा.. किस कक्षा में पढ़ते हो। अमन बोला-मैं स्कूल नहीं जाता। जज ने कारण पूछा तो अमन ने कहा उसके दिल में छेद है, इसलिए। जज दंग रह गईं। उन्होंने अमन के भविष्य की चिंता जाहिर करते हुए श्वेता और नरेंद्र को समझाया। मां की ममता जाग गई और वह पीड़ा भूल गई।

- पिता का बेटे के प्रति स्नेह भी प्रस्फुटित हो उठा और महज 9 दिन का वियोग बेटे की वजह से सुलह में बदल गया। अमन के अलावा उनकी दो बेटियां भी हैं। एक अन्य मामले में नर्मदी बाई द्वारा पति कल्लू कहार पर लगाए गए भरण पोषण के केस में भी सुलह हुई।


मारपीट के मामले में समझौता
- बाबई के बीकोर में ब्रजमोहन कीर और राजू कीर के बीच मामूली बात पर मारपीट हो गई थी। न्यायाधीश नीलम शुक्ला ने दोनों में समझौता कराया।

जमीन दी, भाई ने छुए बहन के पैर
गुराड़िया में 15 एकड़ जमीन को लेकर भाई दीपक सिंह और बहन साधना सिंह का विवाद सुलझा। भाई बहन को जमीन नहीं देना चाहता था लेकिन 12 साल से बहन हिस्सा मांग रही थी। न्यायिक मजिस्ट्रेट देवेंद्र अतुलकर के सामने भाई ने बहन से समझौता कर लिया। भाई बहन को उसके हिस्से की जमीन देने को तैयार हो गया। भाई ने बहन को पैर छुए और आशीर्वाद लिया। न्यायाधीश ने उन्हें पौधे दिए।

दुकान खाली की, बिल भी दिया
कोठी बाजार में दुकान मालिक अब्दुल वसीम और किराएदार अंशुमन के बीच दुकान खाली कराने का विवाद था। जेएमएफसी देवेंद्र अतुलकर के सामने किराएदार दुकान खाली कराने को तैयार हो गया। उसने बिल की राशि करीब 3 हजार रुपए जमा कर दी और बकाया भी दे दिया। दोनों मन साफ करके वहां से चले गए।

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