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मप्र को खर्च करने होंगे ज्यादा रुपए, 10,195 के बजाय अब केंद्र से 7841 Cr ही मिलेंगे

केंद्र ने हाथ खींचे, मप्र सरकार को खर्च करने होंगे 2354 करोड़ ज्यादा।

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 06:52 AM IST
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भोपाल. केंद्र ने राज्य को विभिन्न केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में दी जाने वाली अनुदान राशि से हाथ खींच लिया है। इससे राज्य सरकार को इन योजनाओं के लिए अपने खजाने से करीब 2353 करोड़ रुपए ज्यादा खर्चकरने पड़ेंगे। दरअसल उसे केंद्र से मिलने वाली मदद के एवज में 10,195 करोड़ रुपए के बजाय अब 7841 करोड़ रुपए ही मिलेंगे। यानी सीधे-सीधे प्रदेश सरकार पर 2354 करोड़ रुपए का भार आएगा।

यह राशि हम अपने हिसाब से खर्चकर सकते हैं

इसके बाद भी राज्य के अफसरों का कहना है कि केंद्र से मिलने वाले अनुदान की राशि घटी है तो केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी तो बढ़ गई है। यह राशि हम अपने हिसाब से खर्चकर सकते हैं। इसमें पहले की तरह बाध्यता नहीं होगी कि केंद्र से जो भी पैसा मिला है, वो उसी मद में खर्च हो, जिसके लिए दिया गया है।

इन योजना के तहत खर्च करना पड़ेगी ज्यादा राशि

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनने वाली सड़कों, राष्ट्रीय कषृि विकास योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, प्रधानमंत्री कषृि सिंचाई योजना और प्रधानमंत्री आवास योजनाओं के संचालन में पहले से ज्यादा राशि खर्च करना पड़ेगी। इसके साथ ही अन्य प्रमखु योजनाओं में निर्मल भारत, राष्ट्रीय मिशन आॅफ आयुष, सर्वशिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थाओं में मूलभूत न्यूनतम सेवाओं की उपलब्धता, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान योजना, एकीकृत बाल विकास सेवा योजना, समकिे त बाल संरक्षण योजना, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान योजना, राष्ट्रीय उद्यानिकी मिशन, मध्याह्न भोजन कार्यक्रम, समस्यामूलक गांवों में पेयजल प्रदाय योजना।

ऐसे बढ़ा खर्च

पहले केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत और राज्य सरकार की महज 25 प्रतिशत ही थी। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में तो शत प्रतिशत राशि भारत सरकार से ही मिलती थी। नए तय हुए फार्मूले में सभी योजनाओं में 60 प्रतिशत राशि केंद्र देगा तो 40 प्रतिशत राज्य को मिलाना होगी।

इधर, ऐसे मिली अप्रत्यक्ष कर में हिस्सेदारी

राज्य सरकार को केंद्र से अप्रत्यक्ष करों के 2014-15 में 9652 करोड़ रुपए मिले थे, जबकि 2015-16 में 17888 करोड़ रुपए मिले। यानी 8236 करोड़ रुपए ज्यादा थे। इनमें 2014-15 में मिले अप्रत्यक्ष करों में सीमा शुल्क की राशि 3898 करोड़ रुपए, संघ उत्पाद शुल्क के 2201 करोड़ और सेवाकर के 3553 करोड़ रुपए थे। वहीं, 2015-16 में अप्रत्यक्ष करों में सीमा शुल्क की राशि 6133 करोड़, संघ उत्पाद शुल्क के 5100 करोड़ और सेवाकर के 6655 करोड़ रुपए थे।

प्रमुख योजनाएं, जिनमें बढ़ेगा सरकार का खर्च

योजना राज्य सरकार पर भार
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना 748 करोड
वाटरशेड विकास 75 करोड़ रुपए
एकीकृत बाल विकास सेवा 545 करोड़ रुपए
प्रधानमंत्री आवास योजना 144 करोड़ रुपए
सर्वशिक्षा अभियान 113 करोड़ रुपए
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन 27 करोड़ रुपए

ग्रांट में कमी हुई है

वित्तमंत्री जयंत मलैया ने बताया कि केंद्र से मिलने वाली ग्रांट में कमी हुई है, लेकिन केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी भी बड़ी है। किस योजना में कितना हिस्सा केंद्र और राज्य का हो यह फाॅर्मूला बदलता रहता है। अब हमे केंद्र से जो राशि मिल रही है, उसका उपयोग प्राथमिकता के अनुसार कर सकते हैं। पहले केंद्र की शर्तों की बाध्यता के अनुसार ही खर्च करना पड़ता था।