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​बजट का असर: केंद्रीय करों में प्रदेश की हिस्सेदारी में कटौती नहीं

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 06:23 AM IST

मोदी सरकार के अंतिम बजट ने मध्यप्रदेश सरकार की सबसे बड़ी दुविधा को दूर कर दिया है।

Central taxes do not cut the share of the state

भोपाल. मोदी सरकार के अंतिम बजट ने मध्यप्रदेश सरकार की सबसे बड़ी दुविधा को दूर कर दिया है। दरअसल, शिवराज सरकार प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंतित थी। वजह थी, केंद्रीय करों में लगातार कमी आना। सरकार को आशंका थी कि चालू वित्तीय वर्ष में केंद्रीय करो में उसकी हिस्सेदारी घट सकती है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे दूर करते हुए यह साफ कर दिया कि केंद्रीय करो में प्रदेश की हिस्सेदारी में कोई कमी नहीं आएगी। इससे उम्मीद है कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में केंद्रीय करो के हिस्से से प्रदेश को लगभग 51000 करोड़ रुपए मिलेंगे।

- यह राशि अगले वित्तीय वर्ष मेंं बढ़कर 58000 करोड़ तक हो सकती है। वित्त मंत्री जयंत मलैया के अनुसार केंद्र से आश्वासन मिलने के बाद प्रदेश सरकार की लंबित योजनाओं के क्रियान्वयन और नई योजनाओं को जमीन पर उतारने में वित्तीय समस्या नहीं आएगी।

- मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों ने गुरुवार को संसद में पेश बजट पर दिन भर नजर बनाए रखी। एक अफसर के अनुसार फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य को डेढ़ गुना करने, 50 करोड़ लोगों को 5 लाख तक का सालाना मुफ्त इलाज की सुविधा से मध्यप्रदेश के किसानों और गरीबों को अन्य राज्यों से ज्यादा लाभ मिलेगा।

- यही नहीं पशुपालन और मत्स्य पालन के आधारभूत संरचना के विकास के लिए 10 हजार करोड़ के प्रावधान के अलावा किसानों के कर्ज के लिए 11 हजार करोड़ के फंड का लाभ भी प्रदेश को मिलेगा।

- प्रदेश की अधिकांश आबादी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर कृषि के क्षेत्र से जुड़ी है और उनकी जीवन इससे होने वाली आमदनी पर निर्भर रहता है। उम्मीद है कि बजट में की गईं घोषणाओं से इस सेक्टर को मदद मिलेगी।

बांस मिशन से मिलेगा फायदा
- सरकार ने राष्ट्रीय बांस मिशन बनाने की घोषणा की है। इसके तहत 1500 करोड़ रुपए का आवंटन किया जाएगा। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश बांस से बनने वाले उत्पाद लाखों परिवार के रोजगार का माध्यम है। ऐसे में बांस से बनने वाली वस्तुओं पर सरकार के नई घोषणा से मप्र को लाभ मिल सकता है। बता दें कि बांस उत्पादन में मप्र देश के प्रथम पांच राज्यों में शामिल है।

इसका भी मिलेगा लाभ
बजट में अनुसूचित जनजाति बहुल इलाकों में एकलव्य विद्यालय खोलने की घोषणा की गई है। यह आवासीय विद्यालय होगा। आदिवासी छात्रों के लिए वर्ष 2022 तक हर ट्राइबल ब्लॉक जहां इनकी आबादी 50% से ज्यादा है, वहां एकलव्य विद्यालय खोले जाएंगे। प्रदेश में हर पांचवां व्यक्ति अनुसूचित जनजाति वर्ग का है, इसलिए इसका सबसे अधिक लाभ मप्र को ही मिलेगा।

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