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पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती पर लगाया सेस, राज्य सरकार के खजाने को बड़ा झटका

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में जितनी कटौती कर सेस लगाया है, उससे राज्य सरकार के खजाने पर बड़ा झटका लगा है।

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2018, 06:41 AM IST
Cess, levied on the excise duty cut on petrol and diesel

भोपाल. केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में जितनी कटौती कर सेस लगाया है, उससे राज्य सरकार के खजाने पर बड़ा झटका लगा है। कारण है सेस से वसूली गई राशि राज्यों को नहीं दी जाती है। दरअसल, केंद्र द्वारा बेसिक एक्साइज ड्यूटी में 2 रुपए की कमी और 6 रुपए की अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी को खत्म किया गया, लेकिन दूसरी तरफ 8 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से रोड सेस लगा दिया गया। वित्त विभाग के एक अफसर का अनुमान है कि केंद्र के इस फैसले से मप्र को सालाना 1 हजार करोड़ रुपए का नुकसान होगा। बता दें कि केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 42 फीसदी रहती है, लेकिन इससे मिलने वाले राजस्व में भारी कमी आएगी।

एक माह से रुकी है क्षतिपूर्ति 600 करोड़

- केंद्र सरकार ने नवंबर-दिसंबर 2017 की क्षतिपूर्ति राशि 600 करोड़ रुपए एक माह से रोक रखी है। यह राशि 10 जनवरी तक राज्य के खाते में आना थी, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी यह राशि नहीं मिली।

- जीएसटी लागू होने से पहले यह तय हो चुका था कि राज्य को विभिन्न करों से मिलने वाले राजस्व से जीएसटी लागू होने के बाद 14 फीसदी आय नहीं बढ़ती है तो केंद्र सरकार 5 साल तक बतौर क्षतिपूर्ति के रूप से अतिरिक्त राशि देगी। लेकिन पिछले दो माह की राशि 600 करोड़ रुपए मप्र को नहीं मिले हैं।

क्षतिपूर्ति के बजाय सेटलमेंट राशि मिलने की संभावना

- वित्त विभाग के सूत्रों ने बताया कि क्षतिपूर्ति राशि के बजाय केंद्र सरकार आईजीएसटी के तहत सेटलमेंट के रूप में मिलने वाली राशि 671 करोड़ रुपए देने की तैयारी कर रही है। इसमें नियम यह है कि यदि सेटलमेंट राशि से राज्य को हिस्सेदारी दी जाएगी तो क्षतिपूर्ति का भुगतान नहीं किया जाएगा। बता दें कि केंद्र सरकार को 17 हजार कराेड़ रुपए सेटलमेंट फंड में मिले हैं। इसमें से राज्य से मिली राशि का 50 फीसदी राज्य को दिया जाता है।

जीएसटी लागू होने के बाद चार माह में कम मिले 2323 करोड़-

- जीएसटी लागू होने के बाद चार माह में राज्य सरकार को केंद्र से 2323 करोड़ रुपए कम मिले हैं। आंकड़ों के मुताबिक अगस्त से नवंबर माह के बीच प्रदेश को 6640 करोड़ का राजस्व मिलना था, मगर मिला मात्र 4317 करोड़। केंद्रीय वित्त सचिव हसमुख आधिया ने भी चिंता जताई।

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