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​सीएम शिवराज ने कहा-कुछ आईएएस इस सेवा पर बोझ, काम को टालते हैं

आईएएस-मीट में ब्यूरोक्रेसी की तारीफ की, लेकिन बाद में एक-एक करके कई कमियां भी गिना दी।

Dainik Bhaskar

Dec 16, 2017, 05:25 AM IST
CM Shivraj said- Some IAS burden the service, avoiding work

भोपाल. सीएम शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर आईएएस-मीट में ब्यूरोक्रेसी की तारीफ की, लेकिन बाद में एक-एक करके कई कमियां भी गिना दी। उन्होंने कहा कि कुछ आईएएस दिन-रात काम करते हैं, रिजल्ट देते हैं। तभी लोकसेवा गारंटी और लाडली लक्ष्मी योजनाएं बनती हैं और सफल होती हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो नकारात्मक सोच के साथ ही शुरू होते हैं। कहते हैं-सर, नहीं हो सकता। तीसरे वो होते हैं जो सोचते हैं कि कौन चक्कर में पड़े। जो उचक रहा है वो करे। ऐसे लोग सर्विस पर बोझ होते हैं। जो काम करते हैं वो ही सिस्टम में बदलाव करते हैं।

- सीएम शुक्रवार को प्रशासन अकादमी में बोल रहे थे। वे शनिवार को परिवार समेत मीट में शामिल होंगे। मीट के आरंभ में चर्चा का विषय ‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एंड गवर्नेंस’ (एआईजी) रखा गया था। पिछली बार स्मार्ट सिटी विषय था।

- एआईजी के बारे में बोलते हुए सीएम ने कहा कि यह विषय समसामयिक तो है, लेकिन चाहता हूं कि बेटियों की सुरक्षा, दुष्कर्म के विरुद्ध समाज को बदलने और दिशा देने के प्रयास और जनता के हित के मुद्दों पर चर्चा हो। अफसर ऐसे बनें ताकि नरोन्हा एकेडमी की तरह उनके नाम पर भी कोई स्मारक बने।

तारीफ में ये बोेले...

- मप्र की ब्यूरोक्रेसी देश में सर्वश्रेष्ठ है। पड़ोसी राज्यों में तो कलेक्टरों से मिलना कठिन होता है। हमारे अफसर जनसुनवाई करते हैं। जनता से जुड़कर काम करते हैं। ये प्राइवेट नौकरी में जा सकते थे, लेकिन चुनिंदा लोग इस सेवा में आए। भावांतर स्कीम ही देखें। लोग कहते थे कि भावांतर के भंवर में फंस जाएंगे। लेकिन यह सफल हुआ। देश भी इस मॉडल को

दस मिनट बाद ही ऐसे बताईं कमियां

- हमारा काम सिर्फ पुल-पुलिया बनाना नहीं, लोगों की जिंदगी भी बनाना है। बेटियों की सुरक्षा पुलिस कर रही है तो प्रशासन की भी कुछ जिम्मेदारी बनती है।
- आज टेक्नोलॉजी ने सत्यानाश कर दिया है। स्मार्ट फोन और इंटरनेट से पोर्न फिल्में परोसी जा रही हैं। समाज परेशान है। अफसरों को लग सकता है कि समाज को दिशा देने का काम उनका नहीं है। लेकिन उनकी भूमिका जरूरी है।
- एक कलेक्टर चाहे तो जिला ठीक हो सकता है। एसपी अच्छा हो तो अपराधी जिला छोड़ देते हैं।
- मैं तो चतुर्थ श्रेणी के लोगों को भी गले लगाता हूं, लेकिन अफसर दूरी बनाकर रखते हैं। यह आईएएस कम्यूनिटी में ज्यादा होता है। ऐसे में एक टीम के रूप में रिजल्ट कैसे देंगे।
- टारगेट लेकर काम करें, तभी जीवन सार्थक होगा।

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CM Shivraj said- Some IAS burden the service, avoiding work
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